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Prayagraj News: आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी
Mon, 07 Sep 2026 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 07 Sep 2026 02:03 AM IST
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सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल परपुरानी नियमावली लागू करने कीमांग को लेकर प्रदर्शन करते
- फोटो : shiv tripathi
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युवा मंच अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक व इंटर कॉलेजों में रिक्त शिक्षक पदों पर पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न के आधार पर भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर आंदोलनरत है। रविवार को आमरण अनशन का दूसरा दिन रहा। सरकार द्वारा ठोस निर्णय न लेने से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ रही है।
युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 हजार से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं। अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
नई नियमावली में बदलावों से लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के अवसर सीमित हो रहे हैं। शिमला पटेल, मीना देवी, रोशन सरोज, अभिषेक कुमार और प्रवीण यादव आमरण अनशन पर बैठे हैं। संगठन ने सरकार से छात्रहित और समान अवसर को ध्यान में रखते हुए पुरानी नियमावली बहाल करने की मांग की है।
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युवा मंच ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रवक्ता पदों पर बीएड की अनिवार्यता समेत विभिन्न विषयों की शैक्षिक योग्यता में किए गए बदलावों की समीक्षा मांगी है। इसमें हिंदी में इंटर स्तर पर संस्कृत की अनिवार्यता और कला में प्राविधिक कला के अभ्यर्थियों को मौका देना शामिल है। शारीरिक शिक्षा में सीपीएड को अवसर और गृह विज्ञान में बीएड की अनिवार्यता जैसे बदलावों पर भी आपत्ति जताई गई है।
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युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 हजार से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं। अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
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नई नियमावली में बदलावों से लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के अवसर सीमित हो रहे हैं। शिमला पटेल, मीना देवी, रोशन सरोज, अभिषेक कुमार और प्रवीण यादव आमरण अनशन पर बैठे हैं। संगठन ने सरकार से छात्रहित और समान अवसर को ध्यान में रखते हुए पुरानी नियमावली बहाल करने की मांग की है।
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युवा मंच ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रवक्ता पदों पर बीएड की अनिवार्यता समेत विभिन्न विषयों की शैक्षिक योग्यता में किए गए बदलावों की समीक्षा मांगी है। इसमें हिंदी में इंटर स्तर पर संस्कृत की अनिवार्यता और कला में प्राविधिक कला के अभ्यर्थियों को मौका देना शामिल है। शारीरिक शिक्षा में सीपीएड को अवसर और गृह विज्ञान में बीएड की अनिवार्यता जैसे बदलावों पर भी आपत्ति जताई गई है।