हाईकोर्ट:विषम परिस्थितियों के सिवा नो एडवर्स का प्रस्ताव न्यायिक प्रक्रिया में बाधक, HCBA के पत्र पर कोर्ट खफा
यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने हाजी तहसीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कहा कि भविष्य में नो एडवर्स ऑर्डर पारित करने का अनुरोध पत्र आमसभा के पारित प्रस्ताव संग आना चाहिए।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छठ पर्व पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से तीन दिन के जारी नो एडवर्स के प्रस्ताव पर सख्त आपत्ति जताई है। कहा कि आमसभा में प्रस्ताव पारित किए बगैर तीन दिन तक अधिवक्ता की अनुपस्थिति में विपरीत आदेश न पारित करने का अनुरोध न्यायिक प्रक्रिया में बाधक है। यह प्रस्ताव के केवल विषम परिस्थितियों में ही लाया जाना चाहिए।
यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने हाजी तहसीम की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कहा कि भविष्य में नो एडवर्स ऑर्डर पारित करने का अनुरोध पत्र आमसभा के पारित प्रस्ताव संग आना चाहिए।
एकल पीठ से याची के अधिवक्ता ने मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था। जबकि, मामले की पुकार हुई तो विपक्षी अधिवक्ता गैर हाजिर रहे। इस पर पीठ सचिव ने अदालत को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव विक्रांत पांडेय की ओर से छठ पूजा के मद्देनजर नो एडवर्स के भेजे गए प्रस्ताव की जानकारी दी। बताया कि बार एसोसिएशन की ओर से सात, आठ और नौ नवंबर तक नो एडवर्स ऑर्डर का अनुरोध किया है।
खफा कोर्ट ने विस्तृत जानकारी के लिए बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी और महासचिव विक्रांत पांडे को तलब कर पूछा कि क्या इस संबंध में आमसभा की ओर से कोई ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है। यदि है तो उसे अदालत को दिखाया जाए। अध्यक्ष, महासचिव की जगह अदालत में वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश खरे पेश हुए। लेकिन, आमसभा का कोई प्रस्ताव नहीं दिखा सके।
इस पर नाराज कोर्ट ने कहा कि ऐसे अनुरोध से संवैधानिक अदालत की कार्यवाही को बिना जनता के समय और धन की परवाह किए रोका जा रहा है। जबकि, सभी का उद्देश्य त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। न्यायालय ने कहा कि बार एसोसिएशन को समझना चाहिए कि अदालतें नियमों के तहत काम करती हैं। उनका कैलेंडर पहले से निर्धारित होता है।
प्राकृतिक आपदा, महामारी या किसी अधिवक्ता के साथ अनहोनी जैसी स्थिति को छोड़कर अदालत की कार्यवाही को सामान्यतः प्रभावित नहीं किया जा सकता है। वह भी सिर्फ इसलिए कि कुछ अधिवक्ता निजी धार्मिक और पारंपरिक त्योहार के कारण अदालत आने में असमर्थ हैं। इस प्रकार की स्थिति में अदालत से व्यक्तिगत प्रार्थना की जा सकती है, जिसे कोर्ट निश्चित रूप से स्वीकार करेगी।
कोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन की विशेष परिस्थितियों में नो एडवर्स ऑर्डर के प्रस्ताव का हमेशा सम्मान है। लेकिन, बार या कार्यकारिणी से उम्मीद की जाती है कि वह इस संबंध में प्रस्ताव पारित करें। कोई भी पदाधिकारी यदि कुछ वकीलों के कहने पर इस संबंध में पत्र लिखता है तो इसे बार का सामान्य मत नहीं माना जा सकता है।