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ब्लाक प्रमुख बनने का सपना देख रहे नेताओं को लगा आरक्षण का करंट, मंसूबों पर फिरा पानी

Thu, 04 Mar 2021 01:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Mar 2021 01:14 AM IST
सार

प्रयागराज: ब्लॉक प्रमुख आरक्षण
उरूवा-महिला, करछना-अनुसूचित जाति, कोरांव-महिला, कौंधियारा-अनारक्षित, कौड़िहार-पिछड़ी जाति,  चाका-अनारक्षित, जसरा-महिला, धनूपुर- पिछड़ी जाति महिला, प्रतापपुर- पिछड़ी जाति, फूलपुर-पिछड़ी जाति, बहादुरपुर-अनारक्षित, बहरिया-अनारक्षित, भगवतपुर-अनुसूचित जाति महिला, मऊआइमा-पिछड़ी जाति महिला, मांडा-अनारक्षित, मेजा-महिला, शंकरगढ़-अनुसूचित जाति, शृंगवेरपुरधाम-अनुसूचित जाति, सहसों- अनुसूचित जाति महिला, सैदाबाद-पिछड़ी जाति, सोरांव-अनारक्षित, हंडिया-अनारक्षित, होलागढ़-अनारक्षित

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The politicians dreaming of becoming block chief felt the current of reservation, water fell on their plans
पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

ब्लाक प्रमुख के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होते ही कहीं खुशी तो मायूसी छा गई। कई सीटें आरक्षित होने से दिग्गजों के समीकरण बिगड़ गए हैं। सामान्य सीटों पर लड़ने के लिए कई दावेदारों ने तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन सीटें आरक्षित हो जाने के बाद उनको तगड़ा झटका लगा है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर भी जिताऊ उम्मीदवार की तलाश करना भी चुनौती बन गया है। 

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विकास खंड करछना में पहली बार ब्लॉक प्रमुख का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। सपा का गढ़ माने जाने वाले करछना में सभी दल प्रत्याशियों की तलाश में जुट गए हैं। वर्ष 2015 से अब तक सांसद रेवती रमण सिंह के करीबी विजय राज ब्लॉक प्रमुख हैं। हंडिया तथा धनूपुर ब्लॉक का प्रमुख पद वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। धनूपुर में सुनील कुमार और हंडिया से सुनीता देवी ब्लॉक प्रमुख के रूप में निर्वाचित हुए थे। अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक बड़े नेता के सहयोग से हंडिया से रामफल भारतीया तथा धनूपुर से अमृतलाल ब्लॉक प्रमुख बन गए। इस बार की सूची में हंडिया का प्रमुख पद अनारक्षित तथा धनूपुर का पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हो गया।

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The politicians dreaming of becoming block chief felt the current of reservation, water fell on their plans
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विकास खंड सैदाबाद के ब्लॉक प्रमुख का 2015 में पद अनारक्षित था, जिस पर समाजवादी पार्टी समर्थित प्रत्याशी भार्गवी त्रिपाठी विजयी हुई थीं। सरकार बदलते ही प्रमोद त्रिपाठी बुलबुल ने उनसे कुुर्सी छीन ली। 2021 में सैदाबाद के ब्लॉक प्रमुख का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी की तलाश में प्रमुख पार्टियों ने गोटें बिछानी शुरू कर दी हैं। शंकरगढ़ ब्लॉक प्रमुख सीट वर्ष 2015 में पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित की गई है। होलागढ़ ब्लॉक प्रमुख की सीट अनारक्षित कर दी गई है, जबकि यह सीट 2015 में महिला के लिए आरक्षित थी। ब्लॉक प्रमुख के पद पर श्रद्धा तिवारी निर्वाचित हुई थीं। 

The politicians dreaming of becoming block chief felt the current of reservation, water fell on their plans
पंचायत चुनाव - फोटो : Social Media

कौंधियारा ब्लॉक प्रमुख की सीट इस बार अनारक्षित हो गई है। वर्ष 2015 के चुनाव में अनु मिश्रा ब्लॉक प्रमुख बनीं थीं। विकास खंड उरूवा के प्रमुख पद की सीट 2021 में महिला के लिए आरक्षित की गई है । इसके पूर्व में यह सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस दौरान सपा समर्थित महेश राज यादव प्रमुख बने। अविश्वास प्रस्ताव के बाद जगत बहादुर प्रमुख बन गए। 

मेजा ब्लॉक में प्रमुख पद इस बार महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इसमें कई नामचीन लोगों के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना बढ़ गई है। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में मेजा प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित थी, जिसमें रंजना प्रमुख बनीं। बाद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद पूर्व विधायक राजबली जैसल की पत्नी राजकुमारी जैसल प्रमुख निर्वाचित हुईं। मांडा ब्लॉक में प्रमुख पद का आरक्षण सामान्य है। सन 2015 में यह सीट पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित थी। 

कोरांव ब्लॉक में इस बार प्रमुख का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है, जबकि वर्ष 2015 में यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। बहरिया प्रमुख की सीट अनारक्षित होने से इस बार सभी जाति के लोगों को मौका मिलेगा। 2015 में भी यह सीट अनारक्षित थी। सपा के चंद्रजीत यादव ने कुलदीप पांडे को हराकर चुनाव जीता था। भाजपा सरकार बनने पर चंद्रजीत यादव के खिलाफ  अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद कुलदीप पांडे बहरिया के ब्लॉक प्रमुख बन गए।

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The politicians dreaming of becoming block chief felt the current of reservation, water fell on their plans
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

नवसृजित ब्लाकों पर रहेंगी निगाहें

इस बार सबकी निगाहें नवसृजित ब्लॉकों पर रहेंगी। सहसों ब्लाक प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई है, जिससे सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लोगों में मायूसी छाई है। इसी तरह भगवतपुर को अनुसूचित जाति महिला और शृंगवेरपुरधाम अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित की गई है। इन सीटों पर कई दावेदार अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे थे, लेकिन आरक्षण ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया। इसी तरह कौड़िहार को पिछड़ी जाति, चाका को अनारक्षित, बहादुरपुर को अनारक्षित, मऊआइमा को पिछड़ी जाति महिला, सोरांव को अनारक्षित और जसरा ब्लॉक को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। 

फूलपुर और प्रतापपुर ब्लॉक प्रमुख की सीट पिछड़ा वर्ग को आरक्षित

फूलपुर। फूलपुर विकास खंड के ब्लॉक प्रमुख की सीट इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। यह सीट 2015 के चुनाव में महिला के लिए आरक्षित थी, जिसमें समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक विजमा यादव की बेटी ज्योति यादव ब्लॉक प्रमुख बनीं थीं। कुछ वर्ष बाद हुए अविश्वास प्रस्ताव में भाजपा की गीता सिंह फूलपुर की ब्लॉक प्रमुख बनी, लेकिन अबकी चुनाव में यह सीट पिछड़ा वर्ग के खाते में है। इसी प्रकार प्रतापपुर विकास खंड में ब्लॉक प्रमुख का पद अबकी पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है। 2015 में यह सीट अनारक्षित थी और यहां पुनीत पांडेय प्रतापपुर के ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए थे। 
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