ब्लाक प्रमुख बनने का सपना देख रहे नेताओं को लगा आरक्षण का करंट, मंसूबों पर फिरा पानी
प्रयागराज: ब्लॉक प्रमुख आरक्षण
उरूवा-महिला, करछना-अनुसूचित जाति, कोरांव-महिला, कौंधियारा-अनारक्षित, कौड़िहार-पिछड़ी जाति, चाका-अनारक्षित, जसरा-महिला, धनूपुर- पिछड़ी जाति महिला, प्रतापपुर- पिछड़ी जाति, फूलपुर-पिछड़ी जाति, बहादुरपुर-अनारक्षित, बहरिया-अनारक्षित, भगवतपुर-अनुसूचित जाति महिला, मऊआइमा-पिछड़ी जाति महिला, मांडा-अनारक्षित, मेजा-महिला, शंकरगढ़-अनुसूचित जाति, शृंगवेरपुरधाम-अनुसूचित जाति, सहसों- अनुसूचित जाति महिला, सैदाबाद-पिछड़ी जाति, सोरांव-अनारक्षित, हंडिया-अनारक्षित, होलागढ़-अनारक्षित
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ब्लाक प्रमुख के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होते ही कहीं खुशी तो मायूसी छा गई। कई सीटें आरक्षित होने से दिग्गजों के समीकरण बिगड़ गए हैं। सामान्य सीटों पर लड़ने के लिए कई दावेदारों ने तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन सीटें आरक्षित हो जाने के बाद उनको तगड़ा झटका लगा है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर भी जिताऊ उम्मीदवार की तलाश करना भी चुनौती बन गया है।
विकास खंड करछना में पहली बार ब्लॉक प्रमुख का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। सपा का गढ़ माने जाने वाले करछना में सभी दल प्रत्याशियों की तलाश में जुट गए हैं। वर्ष 2015 से अब तक सांसद रेवती रमण सिंह के करीबी विजय राज ब्लॉक प्रमुख हैं। हंडिया तथा धनूपुर ब्लॉक का प्रमुख पद वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। धनूपुर में सुनील कुमार और हंडिया से सुनीता देवी ब्लॉक प्रमुख के रूप में निर्वाचित हुए थे। अविश्वास प्रस्ताव के बाद एक बड़े नेता के सहयोग से हंडिया से रामफल भारतीया तथा धनूपुर से अमृतलाल ब्लॉक प्रमुख बन गए। इस बार की सूची में हंडिया का प्रमुख पद अनारक्षित तथा धनूपुर का पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हो गया।
विकास खंड सैदाबाद के ब्लॉक प्रमुख का 2015 में पद अनारक्षित था, जिस पर समाजवादी पार्टी समर्थित प्रत्याशी भार्गवी त्रिपाठी विजयी हुई थीं। सरकार बदलते ही प्रमोद त्रिपाठी बुलबुल ने उनसे कुुर्सी छीन ली। 2021 में सैदाबाद के ब्लॉक प्रमुख का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है। पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी की तलाश में प्रमुख पार्टियों ने गोटें बिछानी शुरू कर दी हैं। शंकरगढ़ ब्लॉक प्रमुख सीट वर्ष 2015 में पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित की गई है। होलागढ़ ब्लॉक प्रमुख की सीट अनारक्षित कर दी गई है, जबकि यह सीट 2015 में महिला के लिए आरक्षित थी। ब्लॉक प्रमुख के पद पर श्रद्धा तिवारी निर्वाचित हुई थीं।
कौंधियारा ब्लॉक प्रमुख की सीट इस बार अनारक्षित हो गई है। वर्ष 2015 के चुनाव में अनु मिश्रा ब्लॉक प्रमुख बनीं थीं। विकास खंड उरूवा के प्रमुख पद की सीट 2021 में महिला के लिए आरक्षित की गई है । इसके पूर्व में यह सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस दौरान सपा समर्थित महेश राज यादव प्रमुख बने। अविश्वास प्रस्ताव के बाद जगत बहादुर प्रमुख बन गए।
मेजा ब्लॉक में प्रमुख पद इस बार महिला के लिए आरक्षित हुआ है। इसमें कई नामचीन लोगों के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना बढ़ गई है। वर्ष 2015 में हुए चुनाव में मेजा प्रमुख की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित थी, जिसमें रंजना प्रमुख बनीं। बाद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद पूर्व विधायक राजबली जैसल की पत्नी राजकुमारी जैसल प्रमुख निर्वाचित हुईं। मांडा ब्लॉक में प्रमुख पद का आरक्षण सामान्य है। सन 2015 में यह सीट पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित थी।
कोरांव ब्लॉक में इस बार प्रमुख का पद महिलाओं के लिए आरक्षित है, जबकि वर्ष 2015 में यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। बहरिया प्रमुख की सीट अनारक्षित होने से इस बार सभी जाति के लोगों को मौका मिलेगा। 2015 में भी यह सीट अनारक्षित थी। सपा के चंद्रजीत यादव ने कुलदीप पांडे को हराकर चुनाव जीता था। भाजपा सरकार बनने पर चंद्रजीत यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद कुलदीप पांडे बहरिया के ब्लॉक प्रमुख बन गए।