{"_id":"5c1e9c49bdec2257235e65fb","slug":"the-philosophy-of-the-original-renewal-will-not-be-distant-nor-will-the-parikrama","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूल अक्षयवट के दूर से दर्शन, न पूजा होगी न परिक्रमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मूल अक्षयवट के दूर से दर्शन, न पूजा होगी न परिक्रमा
Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
विज्ञापन
प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब 435 वर्ष बाद इस कुंभ में आने वाले देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं को अकबर के ऐतिहासिक किले में स्थित मूल अक्षयवट के दूर से दर्शन होंगे। लगभग 10 मीटर दूर सुरक्षा घेरा के भीतर चलकर पवित्र अक्षयवट की जड़ों को निहारा जा सकेगा। मूल अक्षयवट की पूजा -परिक्रमा करने की छूट नहीं होगी। त्रिवेणी स्नान के बाद श्रद्धालु पहली बार चलते-चलते मूल अक्षयवट के दर्शन कर वापस पातालपुरी और सरस्वती कूप होते हुए बाहर निकलेंगे। लंबे समय बाद मूल अक्षयवट के खोले जाने से सनातनधर्मियों के लिए यह कुंभ बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में प्रचारित इस कुंभ मेले में मूल अक्षयवट को खोले जाने का मार्ग शनिवार को प्रशस्त हो गया। मूल अक्षयवट के नए रास्ते के लिए किले के प्रवेश द्वार पर स्थित दक्षिणी हिस्से की 28 फीट चौड़ी दीवार तोड़कर मलबे की सफाई करा ली गई। किला द्वार से मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए 15 फीट चौड़ा रास्ता दिया जाएगा। एमएनआईटी की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सेना इस रास्ते को सुगम बनाने के लिए बैरीकेडिंग के अलावा अन्य सुरक्षा मानकों का निर्धारण कर रही है।
यहां से 250 मीटर लंबी दूरी तय कर श्रद्धालु यमुना किनारे किले में स्थित मूल अक्षयवट के दर्शन करेंगे। वापसी भी इसी मार्ग की दूसरी लेन की बैरीकेडिंग से होगी। इस तरह मूल अक्षयवट में प्रवेश और निकास को लेकर कुल पांच सौ मीटर लंबा रास्ता तय करना होगा। श्रद्धालु मूल अक्षयवट के दर्शन 10 मीटर दूर से ही कर सकेंगे। इसके लिए सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है। मेला प्रशासन से जुड़े एक उच्चाधिकारी ने बताया कि मूल अक्षयवट में कोई पुजारी नियुक्त नहीं होगा। वहां पूजा या अक्षयवट की परिक्रमा की छूट नहीं मिलेगी। श्रद्धालु सिर्फ दूर से मूल अक्षयवट के दर्शन कर सकेंगे।
विज्ञापन
अक्षयवट में दर्शन के समय व इसके लिए बनाए जा रहे नए रास्ते पर एक साथ कितने श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाए, इसका निर्धारण अंतिम रूप से सेना करेगी। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद सबके सहयोग से मूल अक्षयवट के नए मार्ग को खोलना संभव हो सका है। अब मूल अक्षयवट के रास्ते के सुदृढ़ीकरण, सौंदर्यीकरण के अलावा किले के भीतर अवस्थापना सुविधाओं को पूरा कराने का काम जल्द ही मूर्त रूप ले लेगा। मूल अक्षयवट के दर्शन के समय, श्रद्धालुओं के भीड़ प्रबंधन व सुरक्षा प्रबंधों पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
प्रयागराज। अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुणायक के अनुसार पुजारियों की सहमति से रामजानकी-राधाकृष्ण मंदिर को पातालपुरी परिसर में शिफ्ट कराया गया है। रात को प्रतिमाओं को पातालपुरी परिसर में जाकर विधि-विधान से परंपरागत पूजा, आरती के साथ प्रतिष्ठापित करवाया गया। अब राधाकृष्ण व राम जानकी की प्रतिमाओं की पूजा-आरती पातालपुरी परिसर में ही पूर्व की भांति होगी।
मूल अक्षयवट के नए रास्ते को खोले जाने के बाद शनिवार को किले में आम लोगों का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया। पातालपुरी में स्थित देव विग्रहों की पूजा के लिए सिर्फ गिनती के पुजारियों को ही अंदर जाने दिया गया। इस दिन पातालपुरी में दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रवेश नहीं कर सके। अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुणायक ने बताया कि किला द्वार से मंदिर शिफ्ट कराने और दक्षिणी दीवार तोड़े जाने के बाद मलबा हटाने और साफ-सफाई कराने के लिए वहां आवाजाही स्थगित की गई थी। किले की सुरक्षा सेना के जिम्मे है। ऐसे में सुरक्षा कारणों से भी वहां सतर्कता बरती जा रही है। साफ-सफाई पूरी होने के बाद किा द्वार से प्रवेश खोल दिया जाएगा।
विज्ञापन
विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में प्रचारित इस कुंभ मेले में मूल अक्षयवट को खोले जाने का मार्ग शनिवार को प्रशस्त हो गया। मूल अक्षयवट के नए रास्ते के लिए किले के प्रवेश द्वार पर स्थित दक्षिणी हिस्से की 28 फीट चौड़ी दीवार तोड़कर मलबे की सफाई करा ली गई। किला द्वार से मूल अक्षयवट में प्रवेश के लिए 15 फीट चौड़ा रास्ता दिया जाएगा। एमएनआईटी की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर सेना इस रास्ते को सुगम बनाने के लिए बैरीकेडिंग के अलावा अन्य सुरक्षा मानकों का निर्धारण कर रही है।
विज्ञापन
यहां से 250 मीटर लंबी दूरी तय कर श्रद्धालु यमुना किनारे किले में स्थित मूल अक्षयवट के दर्शन करेंगे। वापसी भी इसी मार्ग की दूसरी लेन की बैरीकेडिंग से होगी। इस तरह मूल अक्षयवट में प्रवेश और निकास को लेकर कुल पांच सौ मीटर लंबा रास्ता तय करना होगा। श्रद्धालु मूल अक्षयवट के दर्शन 10 मीटर दूर से ही कर सकेंगे। इसके लिए सुरक्षा घेरा बनाया जा रहा है। मेला प्रशासन से जुड़े एक उच्चाधिकारी ने बताया कि मूल अक्षयवट में कोई पुजारी नियुक्त नहीं होगा। वहां पूजा या अक्षयवट की परिक्रमा की छूट नहीं मिलेगी। श्रद्धालु सिर्फ दूर से मूल अक्षयवट के दर्शन कर सकेंगे।
विज्ञापन
अक्षयवट में दर्शन के समय व इसके लिए बनाए जा रहे नए रास्ते पर एक साथ कितने श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाए, इसका निर्धारण अंतिम रूप से सेना करेगी। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद सबके सहयोग से मूल अक्षयवट के नए मार्ग को खोलना संभव हो सका है। अब मूल अक्षयवट के रास्ते के सुदृढ़ीकरण, सौंदर्यीकरण के अलावा किले के भीतर अवस्थापना सुविधाओं को पूरा कराने का काम जल्द ही मूर्त रूप ले लेगा। मूल अक्षयवट के दर्शन के समय, श्रद्धालुओं के भीड़ प्रबंधन व सुरक्षा प्रबंधों पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
प्रयागराज। अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुणायक के अनुसार पुजारियों की सहमति से रामजानकी-राधाकृष्ण मंदिर को पातालपुरी परिसर में शिफ्ट कराया गया है। रात को प्रतिमाओं को पातालपुरी परिसर में जाकर विधि-विधान से परंपरागत पूजा, आरती के साथ प्रतिष्ठापित करवाया गया। अब राधाकृष्ण व राम जानकी की प्रतिमाओं की पूजा-आरती पातालपुरी परिसर में ही पूर्व की भांति होगी।
मूल अक्षयवट के नए रास्ते को खोले जाने के बाद शनिवार को किले में आम लोगों का प्रवेश पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया। पातालपुरी में स्थित देव विग्रहों की पूजा के लिए सिर्फ गिनती के पुजारियों को ही अंदर जाने दिया गया। इस दिन पातालपुरी में दर्शन के लिए श्रद्धालु प्रवेश नहीं कर सके। अपर मेलाधिकारी दिलीप कुमार त्रिगुणायक ने बताया कि किला द्वार से मंदिर शिफ्ट कराने और दक्षिणी दीवार तोड़े जाने के बाद मलबा हटाने और साफ-सफाई कराने के लिए वहां आवाजाही स्थगित की गई थी। किले की सुरक्षा सेना के जिम्मे है। ऐसे में सुरक्षा कारणों से भी वहां सतर्कता बरती जा रही है। साफ-सफाई पूरी होने के बाद किा द्वार से प्रवेश खोल दिया जाएगा।