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जो पेपर बंटा नहीं, जारी कर दी उसकी उत्तर कुंजी, अब संशोधित दी

Wed, 23 Jan 2019 05:51 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 23 Jan 2019 05:51 AM IST
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The paper which was not distributed despite issued its answer key
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) ने 15 दिसंबर को विज्ञापन संख्या 47 के तहत हुई 23 विषयों की परीक्षा के बाद मंगलवार को एक विषय उद्यानिकी विषय की संशोधित उत्तर कुंजी जारी की। आयोग ने कुछ दिनों पूर्व इस विषय की गलत उत्तर कंजी जारी कर दी थी। परीक्षार्थियों ने आयोग में शिकायत और अपनी आपत्ति दर्ज कराई तो आयोग ने जांच कराई। इसमें गड़बड़ी सामने आ गई और आयोग को संशोधित उत्तर कुंजी जारी करनी पड़ी।
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आयोग ने पिछले दिनों विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए 15 दिसंबर को हुई 23 विषयों की उत्तर कुंजी जारी की थी। इसमें उद्यानिकी विषय की उत्तर कुंजी जारी करने में लापरवाही की गई। दरअसल, परीक्षा के लिए तीन सेटों में पेपर तैयार कराए जाते हैं। आयोग ने जो सेट परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को बांटा था, उसकी उत्तर कुंजी जारी नहीं। बल्कि आयोग ने उस सेट की उत्तर कुंजी जारी कर दी, जो सेट अभ्यर्थियों को दिया ही नहीं गया था। उत्तर कुंजी जारी होने के बाद अभ्यर्थियों के बीच अफरातफरी मच गई।
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बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आयोग पहुंच गए, क्योंकि सभी को लग रहा था कि अगर इस उत्तर कुंजी को आधार माना गया तो कोई भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सकेगा। अभ्यर्थियों से आपत्ति और शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच कराई गई तो गड़बड़ी सामने आ गई। आयोग ने मंगलवार को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की। यह उत्तर कुंजी उस सेट के पेपर की है, जो अभ्यर्थियों को दिया गया था। अभ्यर्थियों से इस उत्तर कुंजी पर 30 जनवरी तक आपत्तियां मांगी गई हैं।
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रिटायर जज सुभाष चंद्रा करेंगे पेपर लीक मामले की जांच
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 47 के तहत 12 जनवरी को छह विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए हुई लिखित परीक्षा में पेपर लीक होने के आरोपों की जांच के लिए रिटायर जज सुभाष चंद्रा को जिम्मेदारी सौंपी है। अभ्यर्थियों का आरोप था कि पेपर शुरू होने से पहले व्हाट्स एप पर वायरल हो गया था। हालांकि इसकी शिकायत आयोग में एक दिन बाद दर्ज कराई गई। इस पर आयोग ने जनपद स्तर के किसी रिटायर जज से मामले की जांच कराने का निर्णय लिया था। आयोग के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक की ओर से जांच के लिए आयोग को छह रिटायर जजों के नाम भेजे गए। इनमें से आयोग ने कानपुर के रिटायर जिला जज सुभाष चंद्रा से मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है।
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