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महिला कोचों से उतारे गए यात्री
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 10 Mar 2015 12:57 AM IST
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इलाहाबाद। जनरल कोच में जगह नहीं मिल रही है तो ट्रेनों के महिला कोच में न सवार हों। महिलाओं के कोच में घुसना रास्ते में मुसीबत में डाल सकता है। आरपीएफ की ओर से चल रहे धरपकड़ अभियान में सोमवार को भी 18 यात्री दबोचे गए। इन सभी की यात्रा खराब हुई। साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ा।
रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ट्रेनों के महिला कोचों से यात्रियों की धरपकड़ के लिए लगातार अभियान चला रही है। इलाहाबाद पोस्ट के इंस्पेक्टर बीपी सिंह के मुताबिक जम्मू जाने वाली मुरी एक्सप्रेस के महिला कोच में यात्री घुसे थे। रास्ते में महिलाओं ने इसकी शिकायत भी की। जंक्शन पर ट्रेन पहुंचने पर 18 यात्रियों को उतारा गया। कानपुर, दिल्ली, अमृतसर और दूसरे स्टेशनों पर जाने वाले यात्री दोपहर बाद तक आरपीएफ थाने में ही बैठे रह गए। बाद में इन सभी से 500-500 रुपये जुर्माना वसूलकर छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि जंक्शन पर पिछले दो महीने में 500 से ज्यादा यात्री महिला कोचों से उतारे जा चुके हैं। रेलवे एक्ट के तहत सभी से जुर्माना वसूला जा रहा है। बताया कि लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में अब महिला कोचों की पड़ताल भी शुरू की जा चुकी है।
होली मनाकर कार्य स्थलों पर लौटने में रेलयात्रियों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को जंक्शन से रवाना हुई संगम एक्सप्रेस और नौचंदी एक्सप्रेस के जनरल कोचों में भीड़ के कारण महिलाएं और बच्चे नहीं घुस सके। बाद में कई यात्री जनरल टिकट लेकर स्लीपर कोचों में भरकर गए। प्रयागराज एक्सप्रेस में मुख्यालय कोटा से बर्थ पाने के लिए भारी मारामारी रही। इसके कारण रिजर्वेशन चार्ट को अंतिम रूप देने में भी विलंब हुआ। भीड़ के कारण ट्रेन छूटने पर दो बार चेन पुलिंग भी हुई।
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त्योहार के तीसरे दिन भी शाम को जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़ जुटी। संगम एक्सप्रेस से कानपुर जाने के लिए पहुंचे नैनी के चंद्र प्रकाश किसी तरह जनरल कोच में सवार हो गए लेकिन उनकी पत्नी और बच्चे प्लेटफार्म पर ही छूट गए। वह तमाम जतन के बाद भी परिजनों को कोच में नहीं बैठा सके। मजबूरी में खुद भी ट्रेन से उतर गए। चंद्र प्रकाश इंटरसिटी से कानपुर गए लेकिन खुर्जा, हापुड़, देहरादून, अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद जाने के लिए पहुंचे यात्रियों को भारी मुसीबत उठानी पड़ी। नौचंदी एक्सप्रेस, लखनऊ इंटरसिटी और मनकापुर जाने वाली सरयू एक्सप्रेस में भी बैठने के लिए मारामारी रही। इन ट्रेनों में प्रयाग स्टेशन से भी यात्रियों का हुजूम चढ़ा। ऐसे में जंक्शन से सवार मुसाफिरों के लिए भी परेशानी खड़ी हुई।
दिल्ली जाने के लिए सोमवार को जंक्शन से न कोई स्पेशल ट्रेन थी और न ही दिल्ली दूरंतो। ऐसे में यात्रियों का पूरा दबाव प्रयागराज एक्सप्रेस पर ही रहा। स्लीपर में प्रतीक्षासूची 350 के ऊपर तक थी। ट्रेन के जनरल कोच में आरपीएफ ने कतार लगाकर यात्रियों को प्रवेश दिलाया लेकिन स्लीपर कोच में फर्श पर बैठने के लिए भी मारामारी मची रही। प्रतीक्षासूची के यात्री किसी तरह दिल्ली पहुंचने के फेर में जुटे थे। शिवगंगा, रीवांचल, पुरुषोत्तम, ब्रह्मपुत्र मेल में भी दिल्ली जाने के लिए यात्रियों की भीड़ रही।
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रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ट्रेनों के महिला कोचों से यात्रियों की धरपकड़ के लिए लगातार अभियान चला रही है। इलाहाबाद पोस्ट के इंस्पेक्टर बीपी सिंह के मुताबिक जम्मू जाने वाली मुरी एक्सप्रेस के महिला कोच में यात्री घुसे थे। रास्ते में महिलाओं ने इसकी शिकायत भी की। जंक्शन पर ट्रेन पहुंचने पर 18 यात्रियों को उतारा गया। कानपुर, दिल्ली, अमृतसर और दूसरे स्टेशनों पर जाने वाले यात्री दोपहर बाद तक आरपीएफ थाने में ही बैठे रह गए। बाद में इन सभी से 500-500 रुपये जुर्माना वसूलकर छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि जंक्शन पर पिछले दो महीने में 500 से ज्यादा यात्री महिला कोचों से उतारे जा चुके हैं। रेलवे एक्ट के तहत सभी से जुर्माना वसूला जा रहा है। बताया कि लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में अब महिला कोचों की पड़ताल भी शुरू की जा चुकी है।
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होली मनाकर कार्य स्थलों पर लौटने में रेलयात्रियों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को जंक्शन से रवाना हुई संगम एक्सप्रेस और नौचंदी एक्सप्रेस के जनरल कोचों में भीड़ के कारण महिलाएं और बच्चे नहीं घुस सके। बाद में कई यात्री जनरल टिकट लेकर स्लीपर कोचों में भरकर गए। प्रयागराज एक्सप्रेस में मुख्यालय कोटा से बर्थ पाने के लिए भारी मारामारी रही। इसके कारण रिजर्वेशन चार्ट को अंतिम रूप देने में भी विलंब हुआ। भीड़ के कारण ट्रेन छूटने पर दो बार चेन पुलिंग भी हुई।
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त्योहार के तीसरे दिन भी शाम को जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़ जुटी। संगम एक्सप्रेस से कानपुर जाने के लिए पहुंचे नैनी के चंद्र प्रकाश किसी तरह जनरल कोच में सवार हो गए लेकिन उनकी पत्नी और बच्चे प्लेटफार्म पर ही छूट गए। वह तमाम जतन के बाद भी परिजनों को कोच में नहीं बैठा सके। मजबूरी में खुद भी ट्रेन से उतर गए। चंद्र प्रकाश इंटरसिटी से कानपुर गए लेकिन खुर्जा, हापुड़, देहरादून, अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद जाने के लिए पहुंचे यात्रियों को भारी मुसीबत उठानी पड़ी। नौचंदी एक्सप्रेस, लखनऊ इंटरसिटी और मनकापुर जाने वाली सरयू एक्सप्रेस में भी बैठने के लिए मारामारी रही। इन ट्रेनों में प्रयाग स्टेशन से भी यात्रियों का हुजूम चढ़ा। ऐसे में जंक्शन से सवार मुसाफिरों के लिए भी परेशानी खड़ी हुई।
दिल्ली जाने के लिए सोमवार को जंक्शन से न कोई स्पेशल ट्रेन थी और न ही दिल्ली दूरंतो। ऐसे में यात्रियों का पूरा दबाव प्रयागराज एक्सप्रेस पर ही रहा। स्लीपर में प्रतीक्षासूची 350 के ऊपर तक थी। ट्रेन के जनरल कोच में आरपीएफ ने कतार लगाकर यात्रियों को प्रवेश दिलाया लेकिन स्लीपर कोच में फर्श पर बैठने के लिए भी मारामारी मची रही। प्रतीक्षासूची के यात्री किसी तरह दिल्ली पहुंचने के फेर में जुटे थे। शिवगंगा, रीवांचल, पुरुषोत्तम, ब्रह्मपुत्र मेल में भी दिल्ली जाने के लिए यात्रियों की भीड़ रही।