{"_id":"573cca2f4f1c1bb450ac722a","slug":"the-new-generation-must-add-culture","type":"story","status":"publish","title_hn":"नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 19 May 2016 01:48 AM IST
विज्ञापन
सांस्कृतिक विरासत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर इलाहाबाद संग्रहालय में बुधवार को विविधतापूर्ण कार्यक्रम हुए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.रतन लाल हांगलू और उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने भारतीय रेलवे की छायाचित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। बाद में प्रो. हांगलू ने कहा, भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत एवं मूल्यों से नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी है। मौखिक इतिहास के रूप में लोक में बिखरे संगीत, संस्कृति और कला को भी सहेजा जाना चाहिए।
बतौर अध्यक्ष उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने कहा, संग्रहालय में रेलवे की प्रदर्शनी लगना गौरव की बात है। संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा, सजीव और निर्जीव सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। जन संपर्क अधिकारी बिजय कुमार ने स्वागत, डॉ.राजेश मिश्र ने संचालन और डॉ.ओए वानखेड़े ने धन्यवाद ज्ञापितकिया। इस दौरान कई स्कूलों के विद्यार्थियों ने संग्रहालय की कलाकृतियों पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया।
वहीं अभिनव संस्था की ओर से शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत की प्रस्तुतियां दी गईं। अंश शर्मा ने वायलिन पर राग पुरिया कल्याण की प्रस्तुति दी। शुभम पटवा, अभिनव जायसवाल, इंद्रजीत बोस, तेजभान प्रिंस की तीन ताल की प्रस्तुति खूब पसंद की गई। शिवम कुशवाहा और विनीत श्रीवास्तव ने ध्रुपद शैली में गायन, सारंग गुप्ता ने ख्याल गायन, करिश्मा गुप्ता ने दादरा और राम प्रसाद एवं साथियों ने बिरहा, अनाहिता गुप्ता और शोभित ने भी प्रस्तुतियां दी। डॉ.वामन आनंद वानखेडे और डॉ.संजू मिश्रा ने कार्यक्रम में सहयोग किया।
विज्ञापन
संग्रहालय में लगी प्रदर्शनी में तस्वीरों के माध्यम से रेलवे के अतीत से लेकर वर्तमान तक के सफरनामे को बखूबी प्रदर्शित किया गया। 31 मई तक चलने वाली प्रदर्शनी में भारतीय रेल के इतिहास सहित रेलवे में हो रहे नए बदलाव, विकास, आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं के बारे में भी जानने को मिलेगा। प्रदर्शनी में देश में चली पहली रेलगाड़ी से लेकर गतिमान एक्सप्रेस तक की यात्रा तो है ही, रेल के इतिहास में राजा-रजवाड़ों के योगदान और आजादी के बाद के युद्धों में कर्तव्यनिष्ठ रेल कर्मियों के बलिदान की कहानी भी है। प्रदर्शनी में ‘परिवर्तन की डगर’ नामक दीर्घा में रेलवे की यात्री सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं जैसे नई ट्रेनों, एटीवीएम, वाई-फाई, बैगेज स्कैनर आदि के बारे में जानकारी दी गई है।
इलाहाबाद संग्रहालय में रेल प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर दर्शक गर्मी और उमस से परेशान रहे। कुमारास्वामी प्रदर्शनी कक्ष में लगी प्रदर्शनी में एसी की समुचित व्यवस्था न होने से लोग पसीने से तर बतर हो गए। रेलवे के अधिकारियों में भी इस बात को लेकर नाराजगी रही। वहीं संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा, एसी चल रहा था लेकिन लोगों की अधिक संख्या और तेज तापमान की वजह से दिक्कत हुई। इस समस्या का निदान जल्द से जल्द कराया जाएगा।
विज्ञापन
बतौर अध्यक्ष उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने कहा, संग्रहालय में रेलवे की प्रदर्शनी लगना गौरव की बात है। संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा, सजीव और निर्जीव सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। जन संपर्क अधिकारी बिजय कुमार ने स्वागत, डॉ.राजेश मिश्र ने संचालन और डॉ.ओए वानखेड़े ने धन्यवाद ज्ञापितकिया। इस दौरान कई स्कूलों के विद्यार्थियों ने संग्रहालय की कलाकृतियों पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया।
विज्ञापन
वहीं अभिनव संस्था की ओर से शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत की प्रस्तुतियां दी गईं। अंश शर्मा ने वायलिन पर राग पुरिया कल्याण की प्रस्तुति दी। शुभम पटवा, अभिनव जायसवाल, इंद्रजीत बोस, तेजभान प्रिंस की तीन ताल की प्रस्तुति खूब पसंद की गई। शिवम कुशवाहा और विनीत श्रीवास्तव ने ध्रुपद शैली में गायन, सारंग गुप्ता ने ख्याल गायन, करिश्मा गुप्ता ने दादरा और राम प्रसाद एवं साथियों ने बिरहा, अनाहिता गुप्ता और शोभित ने भी प्रस्तुतियां दी। डॉ.वामन आनंद वानखेडे और डॉ.संजू मिश्रा ने कार्यक्रम में सहयोग किया।
विज्ञापन
संग्रहालय में लगी प्रदर्शनी में तस्वीरों के माध्यम से रेलवे के अतीत से लेकर वर्तमान तक के सफरनामे को बखूबी प्रदर्शित किया गया। 31 मई तक चलने वाली प्रदर्शनी में भारतीय रेल के इतिहास सहित रेलवे में हो रहे नए बदलाव, विकास, आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं के बारे में भी जानने को मिलेगा। प्रदर्शनी में देश में चली पहली रेलगाड़ी से लेकर गतिमान एक्सप्रेस तक की यात्रा तो है ही, रेल के इतिहास में राजा-रजवाड़ों के योगदान और आजादी के बाद के युद्धों में कर्तव्यनिष्ठ रेल कर्मियों के बलिदान की कहानी भी है। प्रदर्शनी में ‘परिवर्तन की डगर’ नामक दीर्घा में रेलवे की यात्री सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं जैसे नई ट्रेनों, एटीवीएम, वाई-फाई, बैगेज स्कैनर आदि के बारे में जानकारी दी गई है।
इलाहाबाद संग्रहालय में रेल प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर दर्शक गर्मी और उमस से परेशान रहे। कुमारास्वामी प्रदर्शनी कक्ष में लगी प्रदर्शनी में एसी की समुचित व्यवस्था न होने से लोग पसीने से तर बतर हो गए। रेलवे के अधिकारियों में भी इस बात को लेकर नाराजगी रही। वहीं संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा, एसी चल रहा था लेकिन लोगों की अधिक संख्या और तेज तापमान की वजह से दिक्कत हुई। इस समस्या का निदान जल्द से जल्द कराया जाएगा।