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14 हजार की जमीन का मुआवजा सवा दो करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 19 Sep 2015 01:25 AM IST
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इलाहाबाद। भूमि अधिग्रहण कानून का दुरुपयोग कर मुआवजा तय करने में सरकारी धन की लूट करने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारियों की मिलीभगत से चंद लोग मुआवजे के नाम पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन को लूट रहे हैं। वास्तविक भूमि स्वामी को कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। आगरा में किसान से खरीदी गई 14 हजार रुपये जमीन का दो करोड़ 32 लाख रुपया मुआवजा दिए जाने के अपर जिला जज के आदेश को खारिज करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक मापदंडों की अनदेखी कर बाजारी मूल्य से सैकड़ों गुना ज्यादा मुआवजा दिया गया है।
प्रदेश सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने विशेष भूमि आध्याप्ति अधिकारी द्वारा तय किए गए मुआवजे को सही करार दिया। मामला आगरा जिले का है। विषेष भूमि आध्याप्ति अधिकारी ने 42.37 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से मुआवजा तय किया था। इसका रिफरेंस अपर जिला जज को भेजा गया। अपर जिला जज द्वारा मुआवजे की राशि बढ़ाकर 189.82 रुपये कर दी गई।
इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। दो जजों की बेंच ने अपर जिला जज के रेफरेंस की जांच की। पता चला कि रकम सिंह ने जमीन 14 हजार रुपये में क्रय की थी। इसका मुआवजा सरकार द्वारा एक लाख 94 हजार रुपये तय किया, जिसे अपर जिला जज ने 120 प्रतिशत बढ़ाकर दो करोड़ 32 लाख चार हजार रुपये से अधिक कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इसे गलत मानते हुए रद्द कर दिया है।
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प्रदेश सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति बीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने विशेष भूमि आध्याप्ति अधिकारी द्वारा तय किए गए मुआवजे को सही करार दिया। मामला आगरा जिले का है। विषेष भूमि आध्याप्ति अधिकारी ने 42.37 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से मुआवजा तय किया था। इसका रिफरेंस अपर जिला जज को भेजा गया। अपर जिला जज द्वारा मुआवजे की राशि बढ़ाकर 189.82 रुपये कर दी गई।
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इसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। दो जजों की बेंच ने अपर जिला जज के रेफरेंस की जांच की। पता चला कि रकम सिंह ने जमीन 14 हजार रुपये में क्रय की थी। इसका मुआवजा सरकार द्वारा एक लाख 94 हजार रुपये तय किया, जिसे अपर जिला जज ने 120 प्रतिशत बढ़ाकर दो करोड़ 32 लाख चार हजार रुपये से अधिक कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इसे गलत मानते हुए रद्द कर दिया है।
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