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बार-बार नहीं बढ़ाया जा सकता लखनऊ बेंच का क्षेत्राधिकार

Sat, 10 Jan 2015 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 10 Jan 2015 12:17 AM IST
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The jurisdiction of the Lucknow bench often can not be extended
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का क्षेत्राधिकार बढ़ाने की मांग मुख्य न्यायाधीश ने फिलहाल खारिज कर दी है क्योंकि प्रदेश सरकार का ऐसा प्रस्ताव नहीं है। मगर कानून के जानकारों की मानें तो मौजूदा प्रावधानों के तहत लखनऊ पीठ का क्षेत्राधिकार बढ़ाना मुमकिन नहीं है। इसकी वजह ’दी यूनाइटेड प्राविन्सेज हाईकोर्ट(अमल्गमेशन) आर्डर 1948‘ का प्रावधान है जिनके तहत क्षेत्राधिकार बढ़ाने का निर्णय एक ही बार हो सकता है बार-बार नहीं।
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हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बीके श्रीवास्तव के मुताबिक अमल्गमेशन आर्डर के तहत 1948 में हाईकोर्ट का दर्जा प्राप्त, चीफ कोर्ट इन अवध एट लखनऊ का विलय इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया और इसे हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच मान लिया गया। अमल्गमेशन आर्डर के पैरा 14 के मुताबिक चीफ जस्टिस कम से कम दो न्यायाधीशों को समय-समय पर लखनऊ बेंच में बैठने की अनुमति दे सकते हैं और जबकि इसी पैरा के दूसरे क्लॉज के मुताबिक चीफ जस्टिस क्षेत्राधिकार का निर्धारण कर सकेंगे। इस क्लॉज में ‘समय-समय पर’ का प्रयोग नहीं किया गया है। स्पष्ट है, चीफ जस्टिस क्षेत्राधिकार निर्धारण के अधिकार का प्रयोग एक बार ही कर सकते हैं बार-बार नहीं।
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दूसरे क्लॉज को लेकर हाईकोर्ट की फुलबेंच ने अपने निर्णय में कहा कि चीफ जस्टिस जब चाहें लखनऊ बेंच का क्षेत्राधिकार घटा या बढ़ा सकते हैं। (यह निर्णय एआईआर 1972 इलाहाबाद पेज 200 पर प्रकाशित है।)। इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय ने नसीरुद्दीन बनाम स्टेट ट्रिब्यूनल के निर्णय में पलट दिया। निर्णय के पैरा 33 में कहा गया है कि क्षेत्राधिकार के सवाल पर चीफ जस्टिस अपने अधिकार और विवेक का प्रयोग सिर्फ एक बार कर सकते हैं, क्योंकि अमल्गमेशन आर्डर के पैरा 14 मेें उस अधिकार को बार-बार प्रयोग करने की मंशा नहीं है। (यह निर्णय एआईआर 1976 सुप्रीमकोर्ट पेज 331 पर प्रकाशित है।) इसी निर्णय के पैरा 34 में सुप्रीमकोर्ट ने फुलकोर्ट के निर्णय को निरस्त कर दिया है।
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