हाईकोर्ट ने कहा : खाते से रुपये निकालने से कोई निजी बैंक रोकता है तो यह आरबीआई की शर्ताें का उल्लंघन
कंपनी के निदेशक राजीव कुमार अरोड़ा पर एक महिला ने स्वयं को उनकी पत्नी होने का दावा करते हुए कोर्ट के आदेश से पुलिस स्टेशन लिंक रोड, ट्रांस हिंडन कमिश्नरी, गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज कराया था।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या कंपनी को अपने खाते से रुपये निकालने से कोई निजी बैंक रोकता है तो यह आरबीआई की लाइसेंस शर्ताें का उल्लंघन है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने बैंक की ओर से खाता फ्रीज करने के आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने प्रोव्यू कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की याचिका पर दिया है।
कंपनी के निदेशक राजीव कुमार अरोड़ा पर एक महिला ने स्वयं को उनकी पत्नी होने का दावा करते हुए कोर्ट के आदेश से पुलिस स्टेशन लिंक रोड, ट्रांस हिंडन कमिश्नरी, गाजियाबाद में मुकदमा दर्ज कराया था। वैवाहिक विवाद के लंबित रहने के दौरान महिला ने कंपनी के खाते को फ्रीज करने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक के समक्ष आवेदन किया। इस पर बैंक ने कंपनी के खाते को फ्रीज कर दिया। इसके बाद कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खातों को डीफ्रीज करने की प्रार्थना की गई।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि न तो सक्षम न्यायालय ने बैंक को याची की कंपनी के खाते को फ्रीज करने का निर्देश दिया है और न ही किसी मामले में काेई जांच एजेंसी ने निर्देश दिया है। बैंक की ओर से खाता सीज करने की एकतरफा कार्रवाई मनमानी पूर्ण व अवैध है। इससे याची व्यवसाय करने के अधिकार से वंचित हो गया है। वहीं, बैंक के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह याचिका पोषणीय नहीं है, क्योंकि कोटक महिंद्रा बैंक एक निजी बैंक है और यह अपने बैंकिंग कार्यों के निर्वहन में कोई सार्वजनिक कर्तव्य नहीं निभा रही है।
कोर्ट ने कहा कि बैंक को दिए गए लाइसेंस की शर्तों के विरुद्ध किसी व्यक्ति को उसके बैंक खाते से धन निकालने से रोकना सार्वजनिक कार्य के विरुद्ध है। कोर्ट ने निजी बैंक के कार्य का सार्वजनिक कार्य मानते हुए बैंक के खाता सीज किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया।