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Prayagraj News: जलस्तर के साथ बढ़ने लगीं निचले इलाकों के बाशिंदों की धड़कनें
Fri, 11 Jul 2025 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 11 Jul 2025 02:25 AM IST
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गंगा और यमुना के जलस्तर संग कछारी और निचले इलाकों में बसें लोगों की धड़कनें भी बढ़ने लगी हैं। प्रशासन की ओर से सतर्कता की चेतावनी जारी होने के बाद कोई ऊपरी मंजिल पर सामान चढ़ा रहा है तो कोई रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को तैयार है। शहर से लगे सलोरी, छोटा बघाड़ा, राजापुर समेत कई मोहल्लों में बाढ़ की आशंका गहराते ही हजारों की संख्या में क्षेत्रवासियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
सलोरी निवासी निहाल भारतीय का कहना है कि बरसात में बाढ़ आने पर हर साल घर छोड़ना मजबूरी हो गई है। इस दाैरान ऊपरी तल पर या फिर रिश्तेदार के यहां चले जाते हैं।
शैलेंद्र निषाद ने बताया कि जलस्तर बढ़ने पर छत पर शरण लेना पड़ता है। नाव से जरूरी सामान लाना ले जाना पड़ता है।
मिथिलेश भारतीय कहते हैं कि पिछले वर्ष बाढ़ का दंश झेल चुके हैं, इसलिए पहले ही रिश्तेदार के यहां जाने की तैयारी कर ली है।
राजापुर निवासी संतोष कुमार कहते हैं कि बाढ़ में हर साल घर डूब जाता है। ऊपरी इलाके में जाकर कुछ दिन गुजारते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से चिंता बढ़ने लगी है।
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वहीं केदारनाथ भारतीय कहते हैं बाढ़ की मार झेलते-झेलते अब आदत हो गई है। सरकार से अनुरोध है कि कछार के लोगों के लिए अस्थायी आश्रय की व्यवस्था हो, जिससे न किराए की चिंता हो और न रिश्तेदारी में शरण लेनी पड़े।
सुरेंद्र भारतीय कहते हैं कि बाढ़ आने पर छत ही एकमात्र सहारा होता है। सरकार से अनुरोध है कि निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित व्यवस्था करे।
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सलोरी निवासी निहाल भारतीय का कहना है कि बरसात में बाढ़ आने पर हर साल घर छोड़ना मजबूरी हो गई है। इस दाैरान ऊपरी तल पर या फिर रिश्तेदार के यहां चले जाते हैं।
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शैलेंद्र निषाद ने बताया कि जलस्तर बढ़ने पर छत पर शरण लेना पड़ता है। नाव से जरूरी सामान लाना ले जाना पड़ता है।
मिथिलेश भारतीय कहते हैं कि पिछले वर्ष बाढ़ का दंश झेल चुके हैं, इसलिए पहले ही रिश्तेदार के यहां जाने की तैयारी कर ली है।
राजापुर निवासी संतोष कुमार कहते हैं कि बाढ़ में हर साल घर डूब जाता है। ऊपरी इलाके में जाकर कुछ दिन गुजारते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से चिंता बढ़ने लगी है।
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वहीं केदारनाथ भारतीय कहते हैं बाढ़ की मार झेलते-झेलते अब आदत हो गई है। सरकार से अनुरोध है कि कछार के लोगों के लिए अस्थायी आश्रय की व्यवस्था हो, जिससे न किराए की चिंता हो और न रिश्तेदारी में शरण लेनी पड़े।
सुरेंद्र भारतीय कहते हैं कि बाढ़ आने पर छत ही एकमात्र सहारा होता है। सरकार से अनुरोध है कि निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित व्यवस्था करे।