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दहशत में खाली हुई कचहरी की पांच मंजिला बिल्डिंग
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 25 Apr 2015 11:52 PM IST
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भूकंप के झटकों की दहशत जिला कचहरी में भी नजर आई। पांच मंजिला न्याय भवन में सभी क्रिमिनल कोर्ट स्थित हैं। यहां दिन भर खासी चहल पहल रहती है। शनिवार सुबह लगभग पौने बारह बजे जैसे ही भूकंप का पहला झटका महसूस हुआ लोगों में घबराहट फैल गई। जैसे ही समझ में आया लोग नीचे भागने लगे। हल्ला मच गया। पूरी बिल्डिंग में हजारों की संख्या में लोगों के मौजूद होने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति हो गई।
गनीमत यह थी कि न्याय भवन में सीढ़ियों के अलावा स्लोप भी बने हैं, जिनकी वजह से भगदड़ में कोई घायल नहीं हुआ और लोग सहूलियत से नीचे उतर गए। कोई बड़ा हादसा न हो इसके मद्देनजर न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बिल्डिंग से बाहर बुला लिया गया। अधिवक्ता संघ भवन के सामने स्थित लघु वाद न्यायाधीश की अदालत की बिल्डिंग पुरानी है। भूकंप के झटके से छत के प्लास्टर का कुछ हिस्सा नीचे गिर गया। इस घटना में किसी को चोट नहीं आई। घटना के बाद पूरी बिल्डिंग को खाली करा लिया गया। भूकंप के झटकों से दहशत का यह आलम था कि इसके बाद न्याय भवन में कोई काम नहीं हुआ। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया।
कचहरी में भूकंप जैसी आपदा से सचेत करने के लिए एलार्म जैसा कोई सिस्टम नहीं। घटना के बाद लोगों में इस बात की चर्चा रही है कि संयोग से कोई हादसा नहीं हुआ वरना इस प्रकार की स्थिति में भगदड़ मचने पर भी कई जानें जा सकती हैं। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र का कहना है कि भूकंप के झटके महसूस होने के बाद वकीलों ने न्यायिक कार्य बंद कर दिया। न्याय भवन को पूरी तरह से खाली करा दिया गया। कचहरी में किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है। यह संयोग ही था कि इतनी दहशत और भगदड़ के बावजूद कोई हादसा नहीं हुआ।
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गनीमत यह थी कि न्याय भवन में सीढ़ियों के अलावा स्लोप भी बने हैं, जिनकी वजह से भगदड़ में कोई घायल नहीं हुआ और लोग सहूलियत से नीचे उतर गए। कोई बड़ा हादसा न हो इसके मद्देनजर न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बिल्डिंग से बाहर बुला लिया गया। अधिवक्ता संघ भवन के सामने स्थित लघु वाद न्यायाधीश की अदालत की बिल्डिंग पुरानी है। भूकंप के झटके से छत के प्लास्टर का कुछ हिस्सा नीचे गिर गया। इस घटना में किसी को चोट नहीं आई। घटना के बाद पूरी बिल्डिंग को खाली करा लिया गया। भूकंप के झटकों से दहशत का यह आलम था कि इसके बाद न्याय भवन में कोई काम नहीं हुआ। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया।
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कचहरी में भूकंप जैसी आपदा से सचेत करने के लिए एलार्म जैसा कोई सिस्टम नहीं। घटना के बाद लोगों में इस बात की चर्चा रही है कि संयोग से कोई हादसा नहीं हुआ वरना इस प्रकार की स्थिति में भगदड़ मचने पर भी कई जानें जा सकती हैं। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र का कहना है कि भूकंप के झटके महसूस होने के बाद वकीलों ने न्यायिक कार्य बंद कर दिया। न्याय भवन को पूरी तरह से खाली करा दिया गया। कचहरी में किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है। यह संयोग ही था कि इतनी दहशत और भगदड़ के बावजूद कोई हादसा नहीं हुआ।
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