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हाईकोर्ट मनाएगा पहली सिटिंग का जश्न
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 16 Jun 2016 01:41 AM IST
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अब से डेढ़ सौ साल पहले हाईकोर्ट इलाहाबाद की पहली सिटिंग 18 जून 1866 में हुई थी। इस उपलक्ष्य में 17 जून को हाईकोर्ट में फुलकोर्ट मीटिंग का आयोजन किया गया है। मीटिंग सुबह दस बजे मुख्य न्यायाधीश कक्ष में आयोजित की गई है। यह कार्यक्रम हाईकोर्ट के 150वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।
निबंधक प्रोटोकॉल आशीष कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना 17 मार्च 1866 को रॉयल चार्टर के द्वारा की गई थी। प्रारंभ में यह उत्तर-पश्चिम प्रांत के हाईकोर्ट के रूप में स्थापित हुआ। इसकी पहली सिटिंग 18 जून 1866 को हुई। 17 नवंबर 1916 को हाईकोर्ट इलाहाबाद आ गया। मौजूदा भवन, जिसमें हाईकोर्ट स्थित है, का उद्घाटन तत्कालीन वायसराय और भारत के गवर्नर जनरल लार्ड चेम्सफोर्ड ने किया था। 11 मार्च 1919 को सप्लीमेंट्री लेटर्स पेंटेंट के द्वारा हाईकोर्ट का नामकरण ‘हाईकोर्ट ऑफ ज्यूडीकेचर एट इलाहाबाद’ कर दिया गया। 1948 में यूनाइटेड प्राविंसेज हाईकोर्ट (अमालगमेशन) आर्डर के द्वारा चीफ कोर्ट एट अवध को इलाहाबाद हाईकोर्ट में समाहित कर दिया गया। शुरूआती दौर में इलाहाबाद हाईकोर्ट में छह न्यायमूर्ति हुआ करते थे। आज इसकी स्वीकृत जजों की संख्या 160 है।
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निबंधक प्रोटोकॉल आशीष कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना 17 मार्च 1866 को रॉयल चार्टर के द्वारा की गई थी। प्रारंभ में यह उत्तर-पश्चिम प्रांत के हाईकोर्ट के रूप में स्थापित हुआ। इसकी पहली सिटिंग 18 जून 1866 को हुई। 17 नवंबर 1916 को हाईकोर्ट इलाहाबाद आ गया। मौजूदा भवन, जिसमें हाईकोर्ट स्थित है, का उद्घाटन तत्कालीन वायसराय और भारत के गवर्नर जनरल लार्ड चेम्सफोर्ड ने किया था। 11 मार्च 1919 को सप्लीमेंट्री लेटर्स पेंटेंट के द्वारा हाईकोर्ट का नामकरण ‘हाईकोर्ट ऑफ ज्यूडीकेचर एट इलाहाबाद’ कर दिया गया। 1948 में यूनाइटेड प्राविंसेज हाईकोर्ट (अमालगमेशन) आर्डर के द्वारा चीफ कोर्ट एट अवध को इलाहाबाद हाईकोर्ट में समाहित कर दिया गया। शुरूआती दौर में इलाहाबाद हाईकोर्ट में छह न्यायमूर्ति हुआ करते थे। आज इसकी स्वीकृत जजों की संख्या 160 है।
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