{"_id":"72621ae25f7cdc126cfcaa77bc9855fe","slug":"the-fire-spread-from-the-fireplace-was-innocent-lives-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंगीठी से फैली आग, मासूम की गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंगीठी से फैली आग, मासूम की गई जान
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Dec 2014 02:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगापार के हंडिया कस्बा स्थित ढेढ़ा गांव में मंगलवार रात जरा सी चूक से
विज्ञापन
बेहद दुखद हादसा हो गया। दो चारपायी के बीच रखी अंगीठी पर रजाई गिरने से
फैली आग में तीन माह की दुधमुंही बच्ची की जलकर मौत हो गई जबकि उसके दो
मामा झुलस गए। उनमें एक की हालत गंभीर बनी है। आग की जद में आकर बाइक सहित
कमरे में रखा सारा सामान जल गया। दोनों घायल लड़कों को अस्पताल ले जाया
गया।
हंडिया में वार्ड नंबर दो ढेढ़ा गांव में रहने वाले मुन्नीलाल पाल ने बेटी वंदना देवी का ब्याह तीन साल पहले भदोही के कोइरौना इलाके के फुलवरिया गांव में राजू पाल से किया था। वंदना का दो साल का बेटा अर्जुन है। दुबारा गर्भवती होने पर चार माह पहले वह मायके आ गई थी। तीन माह पहले उसने बेटी को जन्म दिया जिसका नाम अंशिका रखा गया था। तब से वंदना मायके में ही है। उसका बेटा भदोही में पिता के पास ही है। मंगलवार रात करीब आठ बजे का वाकया है। वंदना ने अपनी बच्ची अंशिका को कमरे में अपने छोटे भाई 15 वर्षीय मिथिलेश के साथ चारपायी पर सुलाया था। बगल की चारपायी पर उसके चचेरा भाई संदीप कुमार (15) लेटा था। वंदना ने ठंड की वजह से दोनों चारपायी के बीच में अंगीठी सुलगाकर रख दी। उसी कमरे में बाइक खडी थी।
वंदना बेटी को सुलाकर खाना बनाने चली गई। उधर कमरे में चारपायी से रजाई का एक कोना अंगीठी पर गिरकर जलने लगे। मिनटों में दोनों चारपायी के बिस्तर आग की चपेट में आ गए। आग बाइक तक जा पहुंची। दरवाजा बंद था इसलिए धुआं बाहर नहींनिकल सका इसलिए परिवार के लोगों को आग फैलने के बारे में पता नहीं चल सका। वंदना का चचेरा भाई संदीप दरवाजा खोलकर चीखते हुए बाहर निकला तो परिजन सन्न रह गए। वंदना समेत परिवार के लोग कमरे में घुसे तो वहां आग की लपटों ने दोनों चारपायी, बाइक और बाकी सामान को चपेट में ले लिया था। वंदना का सगा भाई मिथिलेश गंभीर रूप से झुलसा था।
उसकी नाक से खून बहने लगा था। बेटी अंशिका तो जल गई थी। उसकी मौत हो चुकी थी। यह देख वंदना रोने-चीखने लगी लेकिन बच्ची का शरीर पूरी तरह जल गया था। बाइक भी लपटों से घिरी थी। आसपास के लोगों की मदद से आनन-फानन में आग बुझाने की कोशिश शुरू की गई। दमकल दस्ते को बुलाया गया। फिर हंडिया थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई। अग्निकांड में मासूम अंशिका की मौत ने हर किसी को दहला दिया। गंभीर रूप से जख्मी मिथिलेश को स्थानीय सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद शहर में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां भी डॉक्टरों ने उसकी दशा बेहद नाजुक बताई तो परिवार के लोग निजी चिकित्सालय ले गए। वंदना के चचेरे भाई संदीप को इलाज के बाद घर ले जाया गया। खबर पाकर भदोही के कोइरौना से वंदना के पति समेत ससुराल वाले भी आ गए।
हंडिया में वार्ड नंबर दो ढेढ़ा गांव में रहने वाले मुन्नीलाल पाल ने बेटी वंदना देवी का ब्याह तीन साल पहले भदोही के कोइरौना इलाके के फुलवरिया गांव में राजू पाल से किया था। वंदना का दो साल का बेटा अर्जुन है। दुबारा गर्भवती होने पर चार माह पहले वह मायके आ गई थी। तीन माह पहले उसने बेटी को जन्म दिया जिसका नाम अंशिका रखा गया था। तब से वंदना मायके में ही है। उसका बेटा भदोही में पिता के पास ही है। मंगलवार रात करीब आठ बजे का वाकया है। वंदना ने अपनी बच्ची अंशिका को कमरे में अपने छोटे भाई 15 वर्षीय मिथिलेश के साथ चारपायी पर सुलाया था। बगल की चारपायी पर उसके चचेरा भाई संदीप कुमार (15) लेटा था। वंदना ने ठंड की वजह से दोनों चारपायी के बीच में अंगीठी सुलगाकर रख दी। उसी कमरे में बाइक खडी थी।
वंदना बेटी को सुलाकर खाना बनाने चली गई। उधर कमरे में चारपायी से रजाई का एक कोना अंगीठी पर गिरकर जलने लगे। मिनटों में दोनों चारपायी के बिस्तर आग की चपेट में आ गए। आग बाइक तक जा पहुंची। दरवाजा बंद था इसलिए धुआं बाहर नहींनिकल सका इसलिए परिवार के लोगों को आग फैलने के बारे में पता नहीं चल सका। वंदना का चचेरा भाई संदीप दरवाजा खोलकर चीखते हुए बाहर निकला तो परिजन सन्न रह गए। वंदना समेत परिवार के लोग कमरे में घुसे तो वहां आग की लपटों ने दोनों चारपायी, बाइक और बाकी सामान को चपेट में ले लिया था। वंदना का सगा भाई मिथिलेश गंभीर रूप से झुलसा था।
उसकी नाक से खून बहने लगा था। बेटी अंशिका तो जल गई थी। उसकी मौत हो चुकी थी। यह देख वंदना रोने-चीखने लगी लेकिन बच्ची का शरीर पूरी तरह जल गया था। बाइक भी लपटों से घिरी थी। आसपास के लोगों की मदद से आनन-फानन में आग बुझाने की कोशिश शुरू की गई। दमकल दस्ते को बुलाया गया। फिर हंडिया थाने की पुलिस भी वहां पहुंच गई। अग्निकांड में मासूम अंशिका की मौत ने हर किसी को दहला दिया। गंभीर रूप से जख्मी मिथिलेश को स्थानीय सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद शहर में एसआरएन अस्पताल ले जाया गया। वहां भी डॉक्टरों ने उसकी दशा बेहद नाजुक बताई तो परिवार के लोग निजी चिकित्सालय ले गए। वंदना के चचेरे भाई संदीप को इलाज के बाद घर ले जाया गया। खबर पाकर भदोही के कोइरौना से वंदना के पति समेत ससुराल वाले भी आ गए।