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Prayagraj News: पीड़ा के आंसुओं से भी नहीं पिघले डॉक्टर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:43 AM IST
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The doctor did not even relent under the tears of pain.
बंद रही पीएमएसवाई बिल्डिंग की ओटी। अमर उजाला - फोटो : Archive
एसआरएन अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों की नाराजगी का आलम ये रहा कि वार्डों में भर्ती मरीजों को भी जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इनमें से कई मरीजों की हालत बेहद गंभीर थी। वे दर्द से तड़पते रहे। उनकी पीड़ा आंसुओं में बह निकली लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। तीमारदारों के सामने संकट ये आया कि गंभीर मरीज को अचानक कहां लेकर जाएं। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
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डॉक्टरों ने ओपीडी पहले ही बंद करा दी थी। प्रयागराज के अलावा भदोही, जौनपुर, मछली शहर, मीरजापुर, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कौशाम्बी व मध्य प्रदेश के रीवा से बड़ी संख्या में मरीज एसआरएन अस्पताल पहुंचे थे। मरीजों को पता चला कि हड़ताल है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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वे पूछते रहे भइया हड़ताल कब खत्म होगी?, क्या डॉक्टर साहब नहीं देखेंगे ? कहां जाएं कुछ समझ में नहीं आ रहा...? मरीजों के इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं था। इस भीषण गर्मी में दूर-दराज से आए कई मरीज अगले दिन दिखाने की उम्मीद में अस्पताल परिसर और बाहर फुटपाथ पर ठिकाना खोजकर बैठ गए।
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बेटे को होश नहीं, डॉक्टर भेज रहे घर
लालगंज निवासी मजदूर रामधनी का 17 वर्षीय इकलौता बेटा न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती था। उसके सिर का ऑपरेशन हुआ है। अभी होश भी नहीं आया लेकिन हड़ताल के कारण उसका डिस्चार्ज कार्ड बना दिया गया। आंखों में आंसू लिए पिता गुहार लगाता रहा कि उसके पास जेब में एक रुपया नहीं है। इलाज के लिए जमीन तक बेच दी है। यहां से लेकर कहां जाएं? डॉक्टरों ने उसकी पीड़ा नहीं सुनी।

सात ओटी में नहीं हुई एक भी सर्जरी

एसआरएन अस्पताल की सात ओटी में मंगलवार को एक भी सर्जरी नहीं हुई। इनमें आर्थोपेडिक, ईएनटी, ट्रॉमा, कैथलैब, प्लास्टिक सर्जरी सहित अन्य ओटी शामिल हैं। स्त्री रोग विभाग में सुबह 11 बजे के बाद गर्भवतियों को दवा देकर लौटा दिया गया।
तीमारदारों की पीड़ा
मेरी 13 महीने की बेटी आराध्या की पीठ का ऑपरेशन 25 मई को हुआ है। अभी वह पूरी तरह से ठीक नहीं है। डॉक्टर दवा देकर घर जाने के लिए कह दिया है। -अजय कुमार, फूलपुर

मेरे भाई शिव का एक्सीडेंट हुआ है। चेहरे पर गंभीर चोटें हैं। छह जून को भर्ती कराया था। आठ जून को चेहरे का ऑपरेशन होना था लेकिन हड़ताल की वजह से नहीं हुआ। अब डिस्चार्ज करने के लिए कह रहे हैं। -शैलेष, कोरांव

मेरी बहन शबनूर के लिवर में समस्या है। वह कुछ खा-पी नहीं पा रही हैं। अब अस्पताल से जाने के लिए कह रहे हैं। ताजरीन, नैनी गंजिया

मेरी बहन ममता को 24 मई को प्रसव के लिए यहां लाया गया था। बच्चा पेट में मर गया। बहन का लिवर व फेफड़ा भी कमजोर है। उसे होश भी नहीं है। डॉक्टर कहीं और ले जाने के लिए कह रहे हैं। -अजय पटेल, सोरांव
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