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जिला पंचायत सदस्यों को बाहर तो भेज दिया, अब वापस लाने की चुनौती
Thu, 01 Jul 2021 12:59 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 01 Jul 2021 12:59 AM IST
सार
- दोनों ही दलों की ओर से घेरेबंदी शुरू, सुरक्षित लाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी
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prayagraj news : जिला पंचायत प्रयागराज।
- फोटो : prayagraj
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विस्तार
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सदस्यों का समर्थन जुटाने के लिए हर तरह के दांव-पेच अपनाए जा रहे हैं। विपक्षी खेमा संपर्क न कर सके, इसलिए सदस्यों को आसपास के जिलों में भेज दिया गया है। लेकिन दोनों ही प्रत्याशियों के सामने अब इस बात की चुनौती खड़ी हो गई है कि मतदान के दिन किस तरह से अपने-अपने समर्थक सदस्यों को जिला पंचायत भवन तक पहुंचाया जाए।
जिले की पंचायत का मुखिया चुने जाने से पहले सदस्यों की घेरेबंदी की शिकायतें लगातार आ रही हैं। धन-बल के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बीच ज्यादातर सदस्य जिले के बाहर भेज दिए गए हैं। चुनाव पर नजदीक से नजर रखने वाले एक नेता का कहना है कि सदस्य सोनभद्र, मैहर आदि जिलों के होटलों में रखे गए हैं। उनके रहने और घूमने की व्यवस्था के साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे विपक्षी खेमे के संपर्क में न आने पाएं। इस कवायद के बीच इन सदस्यों को मतदान के दिन घेरने या बूथ से ही दूर रखने की रणनीति बनाई गई है।
खास बात यह है कि अध्यक्ष पद के दोनों दावेदार हंडिया के हैं, लेकिन घेरेबंदी की पटकथा यमुनापार में लिखी जा रही है। इसमें मजबूत जनाधार तथा पंचायत चुनाव का लंबा अनुभव रखने वाले तीन नेताओं की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। स्थानीय नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व से भी इस बाबत बात की है। बताया जा रहा है कि एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यहां के एक कद्दावर नेता से वार्ता की। इसके बाद उनके आवास पर ही बैठक में समर्थक सदस्यों को मतदान के दिन बूथ तक लाने की रणनीति पर चर्चा हुई। नेताओं का कहना है कि जिला पंचायत सदस्यों को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दी गई है जो हर तरह से सक्षम हैं। इसमें कई विधायक एवं पूर्व विधायक भी शामिल हैं।
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जिले की पंचायत का मुखिया चुने जाने से पहले सदस्यों की घेरेबंदी की शिकायतें लगातार आ रही हैं। धन-बल के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बीच ज्यादातर सदस्य जिले के बाहर भेज दिए गए हैं। चुनाव पर नजदीक से नजर रखने वाले एक नेता का कहना है कि सदस्य सोनभद्र, मैहर आदि जिलों के होटलों में रखे गए हैं। उनके रहने और घूमने की व्यवस्था के साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे विपक्षी खेमे के संपर्क में न आने पाएं। इस कवायद के बीच इन सदस्यों को मतदान के दिन घेरने या बूथ से ही दूर रखने की रणनीति बनाई गई है।
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खास बात यह है कि अध्यक्ष पद के दोनों दावेदार हंडिया के हैं, लेकिन घेरेबंदी की पटकथा यमुनापार में लिखी जा रही है। इसमें मजबूत जनाधार तथा पंचायत चुनाव का लंबा अनुभव रखने वाले तीन नेताओं की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। स्थानीय नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व से भी इस बाबत बात की है। बताया जा रहा है कि एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यहां के एक कद्दावर नेता से वार्ता की। इसके बाद उनके आवास पर ही बैठक में समर्थक सदस्यों को मतदान के दिन बूथ तक लाने की रणनीति पर चर्चा हुई। नेताओं का कहना है कि जिला पंचायत सदस्यों को बूथ तक लाने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दी गई है जो हर तरह से सक्षम हैं। इसमें कई विधायक एवं पूर्व विधायक भी शामिल हैं।
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