कोर्ट ने मांगी बंदियों की समय पूर्व रिहाई की नीति
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लवकुश की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याची का कहना है कि देश के कई राज्यों में समय पूर्व रिहाई की व्यवस्था है। ऐसे बंदी जिनकी उम्र काफी अधिक हो चुकी है, या गंभीर रूप से बीमार हैं और उनके द्वारा दोबारा किसी अपराध को किए जाने की संभावना नहीं है को जेलों से रिहा किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में इस संबंध में कोई नीति नहीं है। सरकार को ऐसी एक नीति बनाकर बंदियों की रिहाई पर विचार करना चाहिए। कोर्ट ने इससे पहले भी इसी याचिका पर प्रदेश सरकार को नीति प्रस्तुत का निर्देश दिया था मगर सरकार की ओर से कोई जवाब न आने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। याचिका पर 13 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।