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Prayagraj News: महानगर योजना समिति का चुनाव न कराने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
Sat, 09 Aug 2025 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 09 Aug 2025 02:24 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महानगर योजना समिति का चुनाव न कराने पर उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग पर नाराजगी जताई है। साथ ही चुनाव कराने के लिए जरूरी कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने प्रयागराज के कमलेश सिंह व दो अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने महानगर योजना समिति के गठन की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि प्रयागराज को 30 नवंबर 2006 को एक अधिसूचना के माध्यम से महानगर क्षेत्र घोषित किया गया था।
राज्य सरकार ने उप्र राज्य चुनाव आयोग को महानगर योजना समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया था लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आयोग ने महानगर योजना समिति का चुनाव कराने के लिए आवश्यक जानकारी के लिए शहरी विकास विभाग के सचिव को एक पत्र भेजा था। पत्र भी प्रस्तुत किया। अदालत ने कहा कि पत्र अस्पष्ट था और इस पर कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने चुनाव आयोग को सूचना मांगने के लिए नया पत्र 10 दिनों में जारी करने का निर्देश दिया। सचिव को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो 29 अगस्त को चुनाव आयुक्त और प्रमुख सचिव को उपस्थित रहना होगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने प्रयागराज के कमलेश सिंह व दो अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने महानगर योजना समिति के गठन की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि प्रयागराज को 30 नवंबर 2006 को एक अधिसूचना के माध्यम से महानगर क्षेत्र घोषित किया गया था।
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राज्य सरकार ने उप्र राज्य चुनाव आयोग को महानगर योजना समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया था लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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राज्य चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आयोग ने महानगर योजना समिति का चुनाव कराने के लिए आवश्यक जानकारी के लिए शहरी विकास विभाग के सचिव को एक पत्र भेजा था। पत्र भी प्रस्तुत किया। अदालत ने कहा कि पत्र अस्पष्ट था और इस पर कोई जानकारी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने चुनाव आयोग को सूचना मांगने के लिए नया पत्र 10 दिनों में जारी करने का निर्देश दिया। सचिव को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो 29 अगस्त को चुनाव आयुक्त और प्रमुख सचिव को उपस्थित रहना होगा।