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शिक्षक दंपति का लापता पुत्र बरामद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 16 Oct 2016 02:07 AM IST
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इलाहाबाद। जंक्शन के प्लेटफार्म से तीन रोज पहले शिक्षक दंपति के लापता बेटे उत्कर्ष को जीआरपी ने बरामद कर लिया है। वह दशहरे की छुट्टी के बाद माता-पिता के साथ वापस झारखंड नही जाना चाहता था इसलिए प्लेटफार्म पर खड़ी दूसरी ट्रेन में बैठकर देहरादून चला गया था। वहां से वह शनिवार को लौटा तो तलाश में जुटी रेलवे पुलिस ने उसे बरामद कर लिया। परिवार के लोग उसे अपने साथ फाफामऊ में घर ले गए।
रमाकांत त्रिपाठी और उनकी पत्नी झारखंड के गुमला जिले में केंद्रीय स्कूल में शिक्षक हैं। यहां शांतिपुरम फाफामऊ में उन्होंने मकान बनवाया है। रमाकांत के भाई भी यहीं रहते हैं। दशहरा की छुट्टियों में शिक्षक दंपति अपने 13 वर्षीय बेटे उत्कर्ष के साथ फाफामऊ आए थे। 12 अक्तूबर को वे झारखंड लौटने के लिए जंक्शन पहुंचे। वे प्लेटफार्म नंबर छह पर थे तभी उत्कर्ष कोई किताब खरीदने की बात कहकर स्टाल की तरफ गया तो लापता हो गया। दो दिन तक खोजबीन के बाद शुक्रवार को शिक्षक रमाकांत ने जीआरपी थाने में बेटे के गायब होने का केस दर्ज कराया। इंस्पेक्टर जीआरपी मनोज सिंह ने बताया कि उत्कर्ष शनिवार को प्लेटफार्म नंबर नौ पर मिल गया। उसने बताया कि वह माता-पिता से अलग होने के बाद प्लेटफार्म पर खड़ी नौचंदी एक्सप्रेस में बैठकर देहरादून चला गया था। वहां पहुंचने पर वह घबराया तो उसी ट्रेन से लौट भी आया। उत्कर्ष को समझाया गया कि आइंदा ऐसी हरकत नहीं करे। पिता समेत परिवार के लोग आकर उसे जीआरपी थाने से घर ले गए।
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रमाकांत त्रिपाठी और उनकी पत्नी झारखंड के गुमला जिले में केंद्रीय स्कूल में शिक्षक हैं। यहां शांतिपुरम फाफामऊ में उन्होंने मकान बनवाया है। रमाकांत के भाई भी यहीं रहते हैं। दशहरा की छुट्टियों में शिक्षक दंपति अपने 13 वर्षीय बेटे उत्कर्ष के साथ फाफामऊ आए थे। 12 अक्तूबर को वे झारखंड लौटने के लिए जंक्शन पहुंचे। वे प्लेटफार्म नंबर छह पर थे तभी उत्कर्ष कोई किताब खरीदने की बात कहकर स्टाल की तरफ गया तो लापता हो गया। दो दिन तक खोजबीन के बाद शुक्रवार को शिक्षक रमाकांत ने जीआरपी थाने में बेटे के गायब होने का केस दर्ज कराया। इंस्पेक्टर जीआरपी मनोज सिंह ने बताया कि उत्कर्ष शनिवार को प्लेटफार्म नंबर नौ पर मिल गया। उसने बताया कि वह माता-पिता से अलग होने के बाद प्लेटफार्म पर खड़ी नौचंदी एक्सप्रेस में बैठकर देहरादून चला गया था। वहां पहुंचने पर वह घबराया तो उसी ट्रेन से लौट भी आया। उत्कर्ष को समझाया गया कि आइंदा ऐसी हरकत नहीं करे। पिता समेत परिवार के लोग आकर उसे जीआरपी थाने से घर ले गए।
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