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Prayagraj News: न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका में स्पष्ट विभाजन ही लोकतंत्र की असली ताकत
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हिन्दुस्तानी एकेडमी में ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की ओर से आयोजित सम्मेलन मेंबोलते न्यायमू
- फोटो : shiv tripathi
भारतीय संविधान ने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा किया है। ये तीनों अंग अपने कार्यक्षेत्र में पूरी तरह स्वतंत्र हैं, किंतु वे एक-दूसरे पर अंकुश भी रखते हैं। यह भारतीय संविधान की अद्वितीय खूबी है। यह बातें न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने हिंदुस्तानी एकेडमी में ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की इलाहाबाद हाईकोर्ट इकाई के वार्षिक सम्मेलन में ‘संविधान में नियंत्रण और संतुलन के सिद्धांत’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में कहीं।
उन्होंने कहा, जब भी कोई अंग अपनी निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो दूसरा अंग संवैधानिक मर्यादा के भीतर संतुलन स्थापित करने के लिए कदम उठाता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी सुरेंद्रनाथ ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर एक संकटपूर्ण दौर चल रहा है, जहां देश स्वयं के द्वारा बनाए गए अंतरराष्ट्रीय नियमों को ही ध्वस्त कर रहे हैं।
संगठन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल चौहान ने भारतीय समाज और संस्कृति में महिलाओं की गरिमा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान महिलाओं को उच्च स्थान प्रदान करने की संस्कृति को और अधिक मजबूती देता है।
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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से 44 सदस्यीय काउंसिल और 18 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव किया गया। इस नई टीम में अरविंद कुमार राय को अध्यक्ष और आशुतोष कुमार तिवारी को सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। पदाधिकारियों की सूची में परमेश्वर चौधरी, सोनू निर्मल और दीपाली साहू को उपाध्यक्ष, जबकि दीपक कुमार, आबिदा खातून और शिव मंदिर राम को संयुक्त सचिव चुना गया। मनोज कुमार श्रीवास्तव को कोषाध्यक्ष का उत्तरदायित्व दिया गया।
सम्मेलन के अंतिम चरण में सचिव की वार्षिक रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा और बहस हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता वजाहत हुसैन खान ने की और अंत में राज्य सचिव ब्रिजबीर सिंह एडवोकेट ने सभी अतिथियों व आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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उन्होंने कहा, जब भी कोई अंग अपनी निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो दूसरा अंग संवैधानिक मर्यादा के भीतर संतुलन स्थापित करने के लिए कदम उठाता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी सुरेंद्रनाथ ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर एक संकटपूर्ण दौर चल रहा है, जहां देश स्वयं के द्वारा बनाए गए अंतरराष्ट्रीय नियमों को ही ध्वस्त कर रहे हैं।
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संगठन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल चौहान ने भारतीय समाज और संस्कृति में महिलाओं की गरिमा पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान महिलाओं को उच्च स्थान प्रदान करने की संस्कृति को और अधिक मजबूती देता है।
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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसमें सर्वसम्मति से 44 सदस्यीय काउंसिल और 18 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव किया गया। इस नई टीम में अरविंद कुमार राय को अध्यक्ष और आशुतोष कुमार तिवारी को सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। पदाधिकारियों की सूची में परमेश्वर चौधरी, सोनू निर्मल और दीपाली साहू को उपाध्यक्ष, जबकि दीपक कुमार, आबिदा खातून और शिव मंदिर राम को संयुक्त सचिव चुना गया। मनोज कुमार श्रीवास्तव को कोषाध्यक्ष का उत्तरदायित्व दिया गया।
सम्मेलन के अंतिम चरण में सचिव की वार्षिक रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा और बहस हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता वजाहत हुसैन खान ने की और अंत में राज्य सचिव ब्रिजबीर सिंह एडवोकेट ने सभी अतिथियों व आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया।