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घर के बाहर खेल रहे मासूम को कार ने रौंदा, मौत
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the car was tramped to death by an innocent person playing outside the house
- फोटो : CITY DESK
कैंट के नेवादा में तेज रफ्तार कार ने चार साल के मासूम अंशुल को रौंद दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना उस वक्त हुई जब वह घर के पास ही खेल रहा था। स्थानीय लोगों ने आरोपी चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। खबर लिखे जाने तक पुलिस उसे पूछताछ में जुटी थी।
नेवादा में रहने वाला जीतेंद्र कुमार गवर्नमेंट प्रेस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। उसके दो बेटों में अंशुल छोटा था। बृहस्पतिवार शाम 7.30 बजे के करीब अंशुल घर के बाहर ही खेल रहा था। तभी राजापुर की ओर से आई तेज रफ्तार आई 20 कार ने उसे चपेट में ले लिया। कार के अगले हिस्से में फंसकर मासूम कुछ दूर तक घिसटता चला गया। आसपास के लोग शोर मचाते हुए दौड़े लेकिन जब तक कार रुकती, मासूम की मौत हो चुकी थी। लोगों ने चालक को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। साथ ही कार में तोड़फोड़ भी कर दी। उधर मौके पर पहुंचे मां-बाप मासूम बेटे की खून से लथपथ लाश देखकर बदहवास से हो गए। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई और आरोपी को किसी तरह भीड़ से बचाकर कार समेत थाने लाई। उधर बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।पूछताछ में आरोपी चालक ने अपना नाम किशन निवासी नेवादा बताया। जिस कार से हादसा हुआ वह किसी सत्यप्रकाश के नाम से आरटीओ में पंजीकृत है। हालांकि कैंट के प्रभारी इंस्पेक्टर चंद्रभान सिंह देर रात तक यह नहीं बता पाए कि गाड़ी किसकी है। उनका यही कहना था कि जांच की जा रही है। वैसे चर्चा इस बात की भी रही कि आरोपी शहर के एक नामी स्कूल में काम करता है। जबकि गाड़ी एक नामी अस्पताल के मैनेजर की है।
पहले भी समझाया था, लेकिन नहीं माना
हादसे के बाद जुटे स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी चालक अक्सर तेज रफ्तार में कार भगाता था। जिसे लेकर उसे पहले भी कई बार समझाया गया, लेकिन वह नहीं माना। उसकी लापरवाही के चलते ही एक मासूम की जान चली गई।
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कैंट में यह पहला हादसा नहीं
वैसे कैंट में तेज रफ्तार वाहनों का निर्दोषों की जान लेने का यह पहला मामला नहीं। पिछले साल नवंबर में पोलो ग्राउंड के पास बीएचएस में पढ़ने वाले 11वीं के छात्र आदित्य भार्गव की जान तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने ले ली थी। इससे पहले अक्तूबर मेें कैंट के ही नेहरू पार्क रोड पर अनियंत्रित कार ने तीन साल के युवराज को रौंद दिया था जिसके बाद जमकर बवाल भी हुआ था।
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नेवादा में रहने वाला जीतेंद्र कुमार गवर्नमेंट प्रेस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। उसके दो बेटों में अंशुल छोटा था। बृहस्पतिवार शाम 7.30 बजे के करीब अंशुल घर के बाहर ही खेल रहा था। तभी राजापुर की ओर से आई तेज रफ्तार आई 20 कार ने उसे चपेट में ले लिया। कार के अगले हिस्से में फंसकर मासूम कुछ दूर तक घिसटता चला गया। आसपास के लोग शोर मचाते हुए दौड़े लेकिन जब तक कार रुकती, मासूम की मौत हो चुकी थी। लोगों ने चालक को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। साथ ही कार में तोड़फोड़ भी कर दी। उधर मौके पर पहुंचे मां-बाप मासूम बेटे की खून से लथपथ लाश देखकर बदहवास से हो गए। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई और आरोपी को किसी तरह भीड़ से बचाकर कार समेत थाने लाई। उधर बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।पूछताछ में आरोपी चालक ने अपना नाम किशन निवासी नेवादा बताया। जिस कार से हादसा हुआ वह किसी सत्यप्रकाश के नाम से आरटीओ में पंजीकृत है। हालांकि कैंट के प्रभारी इंस्पेक्टर चंद्रभान सिंह देर रात तक यह नहीं बता पाए कि गाड़ी किसकी है। उनका यही कहना था कि जांच की जा रही है। वैसे चर्चा इस बात की भी रही कि आरोपी शहर के एक नामी स्कूल में काम करता है। जबकि गाड़ी एक नामी अस्पताल के मैनेजर की है।
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पहले भी समझाया था, लेकिन नहीं माना
हादसे के बाद जुटे स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आरोपी चालक अक्सर तेज रफ्तार में कार भगाता था। जिसे लेकर उसे पहले भी कई बार समझाया गया, लेकिन वह नहीं माना। उसकी लापरवाही के चलते ही एक मासूम की जान चली गई।
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कैंट में यह पहला हादसा नहीं
वैसे कैंट में तेज रफ्तार वाहनों का निर्दोषों की जान लेने का यह पहला मामला नहीं। पिछले साल नवंबर में पोलो ग्राउंड के पास बीएचएस में पढ़ने वाले 11वीं के छात्र आदित्य भार्गव की जान तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने ले ली थी। इससे पहले अक्तूबर मेें कैंट के ही नेहरू पार्क रोड पर अनियंत्रित कार ने तीन साल के युवराज को रौंद दिया था जिसके बाद जमकर बवाल भी हुआ था।