{"_id":"7817e72c45762b41ace6a5fc0e996510","slug":"the-barn-was-a-shortage-of-farm-diesel-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेत-खलिहान तक पहुंची डीजल की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेत-खलिहान तक पहुंची डीजल की कमी
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sun, 03 May 2015 02:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद (ब्यूरो)। तेल कंपनियों की सुस्ती की मार सिर्फ शहरियों पर ही नहीं, बेमौसम बारिश से परेशान किसानों पर भी पड़ने लगी है। पेट्रोल पंपों पर लगातार डीजल की कमी बनी हुई है। इसके कारण गेहूं की मड़ाई के साथ मूंग, मक्का और हरी सब्जियों की सिंचाई का काम भी प्रभावित होने लगा है।
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में दौड़ने वाले सवारी वाहन भी धीरे-धीरे खड़े होने लगे हैं। उधर, शहरी क्षेत्रों के पंप मालिकों ने ग्राहकों की मारपीट से बचने के लिए पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है। तर्क है कि डीजल जल्द खत्म हो जाने के कारण पंपों पर आए दिन मारपीट हो रही है।
पिछले पखवारेभर से जारी डीजल की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इंडियन ऑयल के सूबेदारगंज स्थित डिपो के डीजल टैंक शनिवार को फिर सूख गए। बताते हैं कि पाइप लाइन की मरम्मत और रिफाइनरी से तेल कम आने के कारण इंडियन ऑयल रेलवे के जरिए पेट्रोल और डीजल मंगा रहा है लेकिन रोजाना पेट्रोल वैगन कंपनी को नहीं मिल पा रहे हैं। इससे प्रत्येक दूसरे-तीसरे दिन मुसीबत बढ़ जा रही है। भारत पेट्रोलियम के पंपों को भी मुगलसराय डिपो से डीजल कम मिल रहा है। ऐसे में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के पंपों पर तीन से चार घंटे में ही डीजल की टंकियां सूख जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में शहरी क्षेत्र से ज्यादा दिक्कत ग्रमीण क्षेत्र में बढ़ी है।
विज्ञापन
मेजा संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के दर्जनभर पंपों में से कहीं भी डीजल नहीं है। इससे डीजल से चलने वाले ट्रैक्टर, जीप, बसें खड़ी हो गई हैं। वाहन न मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शहर पहुंचने और लौटने में दिक्कत हो रही है। मेजा के नेवड़िया निवासी राम सजीवन बताते हैं कि मड़ाई के साथ गर्मी में पानी के दम पर पैदा होने वाली हरी फसलों की सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। बिजली न होने के कारण ज्यादातर लोग डीजल पंपों से ही खेतों की सिंचाई करते हैं। गंगापार क्षेत्र के नवाबगंज, कौड़िहार, सोरांव, हनुमानगंज, फूलपुर जैसे हरी सब्जियों के उत्पादक क्षेत्रों में भी डीजल की कमी से परेशानी बढ़ी है।
विज्ञापन
साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में दौड़ने वाले सवारी वाहन भी धीरे-धीरे खड़े होने लगे हैं। उधर, शहरी क्षेत्रों के पंप मालिकों ने ग्राहकों की मारपीट से बचने के लिए पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है। तर्क है कि डीजल जल्द खत्म हो जाने के कारण पंपों पर आए दिन मारपीट हो रही है।
विज्ञापन
पिछले पखवारेभर से जारी डीजल की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इंडियन ऑयल के सूबेदारगंज स्थित डिपो के डीजल टैंक शनिवार को फिर सूख गए। बताते हैं कि पाइप लाइन की मरम्मत और रिफाइनरी से तेल कम आने के कारण इंडियन ऑयल रेलवे के जरिए पेट्रोल और डीजल मंगा रहा है लेकिन रोजाना पेट्रोल वैगन कंपनी को नहीं मिल पा रहे हैं। इससे प्रत्येक दूसरे-तीसरे दिन मुसीबत बढ़ जा रही है। भारत पेट्रोलियम के पंपों को भी मुगलसराय डिपो से डीजल कम मिल रहा है। ऐसे में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के पंपों पर तीन से चार घंटे में ही डीजल की टंकियां सूख जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में शहरी क्षेत्र से ज्यादा दिक्कत ग्रमीण क्षेत्र में बढ़ी है।
विज्ञापन
मेजा संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के दर्जनभर पंपों में से कहीं भी डीजल नहीं है। इससे डीजल से चलने वाले ट्रैक्टर, जीप, बसें खड़ी हो गई हैं। वाहन न मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शहर पहुंचने और लौटने में दिक्कत हो रही है। मेजा के नेवड़िया निवासी राम सजीवन बताते हैं कि मड़ाई के साथ गर्मी में पानी के दम पर पैदा होने वाली हरी फसलों की सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। बिजली न होने के कारण ज्यादातर लोग डीजल पंपों से ही खेतों की सिंचाई करते हैं। गंगापार क्षेत्र के नवाबगंज, कौड़िहार, सोरांव, हनुमानगंज, फूलपुर जैसे हरी सब्जियों के उत्पादक क्षेत्रों में भी डीजल की कमी से परेशानी बढ़ी है।