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Prayagraj News: रामजन्म और ताड़का वध की लीला देख भावविभोर हुए दर्शक
Wed, 14 Oct 2026 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:18 AM IST
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फोटो कैप्शन: मांडा के महेवा कला में रामजन्म की लीला का मंचन करते कलाकार।
महेवा कला गांव में 111वें वर्ष आयोजित हो रही पौराणिक रामलीला में सोमवार रात रामजन्म और ताड़का-सुबाहु वध की लीला का मनोहारी मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला मंचन में राजा दशरथ अपनी श्वेत होती जटाओं को देखकर वृद्धावस्था और तीन विवाह के बाद भी पुत्र नहीं होने से चिंतित हो उठते हैं। वह गुरु वशिष्ठ से वंश वृद्धि का उपाय पूछते हैं। गुरु के निर्देश पर राजा दशरथ अपने जामाता शृंगी ऋषि को बुलाकर पुत्रेष्टि यज्ञ का अनुष्ठान कराते हैं। यज्ञ से प्राप्त हवि तीनों रानियों को देने के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
इसके बाद राक्षसों के अत्याचार से परेशान महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार पहुंचते हैं। वह यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने की अनुमति मांगते हैं। वन में पहुंचने पर भगवान श्रीराम ताड़का और सुबाहु का वध कर ऋषियों को राक्षसों के आतंक से मुक्ति दिलाते हैं। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
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राजा दशरथ की भूमिका देवी प्रसाद वैश्य, विश्वामित्र की गुलाब पांडेय, राम की सत्यम पांडेय और ताड़का की भूमिका दिनेश पांडेय ने निभाई। रामलीला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार रात धनुष यज्ञ और रामविवाह की लीला का मंचन किया जाएगा।
इसी तरह नहवाई गांव में चल रही रामलीला में कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं राम-सीता विवाह का मंचन किया। धनुष टूटने की आवाज सुनकर क्रोधित परशुराम राजा जनक के दरबार में पहुंचे। उन्हें देखकर वहां मौजूद राजा भागने लगे। तीखे संवाद के बाद परशुराम का भ्रम दूर हुआ और उन्होंने नारायण के अवतार प्रभु श्रीराम एवं शेषावतार लक्ष्मण से क्षमा याचना की। इसके बाद धूमधाम से विवाह की लीला का मंचन किया गया। यहां विश्वामित्र की भूमिका विष्णु शंकर द्विवेदी, राम की ओम, लक्ष्मण की आयुष, सीता की उड़ीत, जनक की शिवशंकर मिश्रा, दशरथ की राजकुमार और परशुराम की भूमिका बृजेश ने निभाई। कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
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रामलीला मंचन में राजा दशरथ अपनी श्वेत होती जटाओं को देखकर वृद्धावस्था और तीन विवाह के बाद भी पुत्र नहीं होने से चिंतित हो उठते हैं। वह गुरु वशिष्ठ से वंश वृद्धि का उपाय पूछते हैं। गुरु के निर्देश पर राजा दशरथ अपने जामाता शृंगी ऋषि को बुलाकर पुत्रेष्टि यज्ञ का अनुष्ठान कराते हैं। यज्ञ से प्राप्त हवि तीनों रानियों को देने के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है।
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इसके बाद राक्षसों के अत्याचार से परेशान महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार पहुंचते हैं। वह यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने की अनुमति मांगते हैं। वन में पहुंचने पर भगवान श्रीराम ताड़का और सुबाहु का वध कर ऋषियों को राक्षसों के आतंक से मुक्ति दिलाते हैं। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने जयकारे लगाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
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राजा दशरथ की भूमिका देवी प्रसाद वैश्य, विश्वामित्र की गुलाब पांडेय, राम की सत्यम पांडेय और ताड़का की भूमिका दिनेश पांडेय ने निभाई। रामलीला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार रात धनुष यज्ञ और रामविवाह की लीला का मंचन किया जाएगा।
इसी तरह नहवाई गांव में चल रही रामलीला में कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं राम-सीता विवाह का मंचन किया। धनुष टूटने की आवाज सुनकर क्रोधित परशुराम राजा जनक के दरबार में पहुंचे। उन्हें देखकर वहां मौजूद राजा भागने लगे। तीखे संवाद के बाद परशुराम का भ्रम दूर हुआ और उन्होंने नारायण के अवतार प्रभु श्रीराम एवं शेषावतार लक्ष्मण से क्षमा याचना की। इसके बाद धूमधाम से विवाह की लीला का मंचन किया गया। यहां विश्वामित्र की भूमिका विष्णु शंकर द्विवेदी, राम की ओम, लक्ष्मण की आयुष, सीता की उड़ीत, जनक की शिवशंकर मिश्रा, दशरथ की राजकुमार और परशुराम की भूमिका बृजेश ने निभाई। कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।