फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The ability to manufacture antibiotics will increase in bacteria with the 'co-culture' technique

Research : ‘को कल्चर’ तकनीक से बैक्टीरिया में बढ़ेगी एंटीबॉयोटिक निर्माण की क्षमता

Fri, 14 Oct 2022 07:43 PM IST
विनोद सिंह रजनीश मिश्र, प्रयागराज
रजनीश मिश्र, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 14 Oct 2022 07:43 PM IST
सार

भारत सरकार के साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड की ओर से एमएनएनआईटी को यह प्रोजेक्ट दो वर्ष के लिए दिया गया है। इसके लिए 30 लाख रुपये का अनुदान भी दिया गया है। प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं संस्थान के बॉयोटेक्नोेलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूपिका सिन्हा कहती हैं, एंटीबॉयोटिक का निर्माण दो तरीके से होता है। 

विज्ञापन
The ability to manufacture antibiotics will increase in bacteria with the 'co-culture' technique
Prayagraj News : डॉ. रूपिका सिन्हा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने नई तकनीक की मदद से बैक्टीरिया में एंटीबॉयोटिक उत्पन्न करने की क्षमता वृद्धि पर काम की पहल की है। ताकि कम से कम बैक्टीरिया से अधिक से अधिक एंटीबॉयोटिक का निर्माण हो सके। अधिक एंटीबॉयोटिक के उत्पादन से कीमत में कमी आएगी।

विज्ञापन



भारत सरकार के साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड की ओर से एमएनएनआईटी को यह प्रोजेक्ट दो वर्ष के लिए दिया गया है। इसके लिए 30 लाख रुपये का अनुदान भी दिया गया है। प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं संस्थान के बॉयोटेक्नोेलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रूपिका सिन्हा कहती हैं, एंटीबॉयोटिक का निर्माण दो तरीके से होता है। 
विज्ञापन



एक केमिकल जबकि दूसरा बैक्टीरिया से उत्पन्न एंटीबॉयोटिक के माध्यम से। ‘को कल्चर’ तकनीक के माध्यम से देखा जाएगा कि किस वातारण और माहौल में बैक्टीरिया अधिक से अधिक एंटीबॉयोटिक का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक होगी।  इससे पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन



साथ ही पूरी तरह से प्राकृतिक माध्यम से यह एंटीबॉयोटिक बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रयोगशाला में 50 एमएल बैक्टीरिया पर प्रयोग में सफलता के बाद 30 लीटर बैक्टीरिया पर प्रयोग किया जाएगा। फिर तकनीक का पेटेंट कराया जाएगा। 



टीबी के इलाज में यह एंटीबॉयोटिक कारगर
डॉ.रू पिका सिन्हा ने बताया कि हर बीमारी के लिए अलग-अलग तरह की एंटीबॉयोटिक का प्रयोग होता है। यह एंटीबॉयोटिक टीबी की बीमारी से ग्रसित मरीजों के इलाज में कारगार होगी। डॉ.रूपिका के साथ प्रोजेक्ट पर जेआरएफ छात्रा भावना टंडन भी काम कर रही है। जनवरी 2022 में मिले प्रोजेक्ट को दो वर्ष में पूरा करना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed