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कॉनेलिया सोराब जी की बदौलत मिला महिलाओं को वकालत करने की छूट
Sat, 11 Sep 2021 10:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 11 Sep 2021 10:24 PM IST
सार
1923 में महिलाओं को वकालत करने की छूट मिली तब वह बतौर वकील प्रैक्टिस में आईं लेकिन इसके दो वर्ष पूर्व उनका इनरोल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हो गया था, जो कि तत्कालीन समय का एक एतिहासिक फैसला था। इसी के बाद महिलाओं को वकाल की प्रैक्टिस करने का अधिकार मिल सका।
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Prayagraj News : कनेलिया सोराबजी (फाइल फोटो)।
- फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
नासिक में 15 नवंबर को 1866 को जन्मी भारत की प्रथम महिला वकील कॉर्नेलिया ने 1894 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई कर लौट आईं। उस समय महिलाओं को वकालत करने का अधिकार नहीं था लेकिन उन्होंने भी जिद नहीं छोड़ी। उन्होंने महिलाओं को कानूनी परामर्श देना शुरू कर दिया लेकिन कानून आड़े आने की वजह से वह अदालत में महिलाओं की रक्षा कर पाने में असमर्थ थी।
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने महिलाओं के लिए वकालत का पेशा करने की छूट देने की मांग की और 1897 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी की एलएलबी परीक्षा में हिस्सा लिया। उसके बाद वह 1899 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वकालत की परीक्षा में भाग लिया। इस दौरान उन्हें वकील के तौर मान्यता नहीं मिली। 1923 में महिलाओं को वकालत करने की छूट मिली तब वह बतौर वकील प्रैक्टिस में आईं लेकिन इसके दो वर्ष पूर्व उनका इनरोल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हो गया था, जो कि तत्कालीन समय का एक एतिहासिक फैसला था। इसी के बाद महिलाओं को वकाल की प्रैक्टिस करने का अधिकार मिल सका।
हालांकि, उनका इलाहाबाद से सीधा ताल्लुक नहीं रहा। 1904 में, बंगाल की कोर्ट ऑफ वार्ड में लेडी असिस्टेंट नियुक्त किया गया था और 1907 में बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम के प्रांतों में बतौर सहायक महिला वकील पद दिया गया। भारत में महिलाओं को 1923 में वकालत करने की छूट मिली तो वह कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगीं। अपने 20 साल की सेवा में, सोराबजी ने 600 से अधिक महिलाओं और अनाथों को कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद की। इसके बदले में कभी कोई शुल्क नहीं लिया। 1929 में वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुईं और लंदन में बस गईं। वहीं पर उनका 1954 में निधन हो गया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता ने दी 56 सालों तक दी कानूनी सेवाएं
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी में राष्ट्रपति द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एबी सरन के तैल चित्र का अनावरण किया गया। एबी सरन इलाहाबाद हाईकोर्ट में 56 सालों तक अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने बीए की पढ़ाई दिल्ली से की। इसके बाद वह इलाहाबाद आ गए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एएलबी किया और फिर यहीं प्रैक्टिस में जम गए। मूलत: बिजनौर के रहने वाले एबी सरन कॉरपोरेशन और इंश्योरेंस के अधिवक्ता रहे। उनके बेट न्यायमूर्ति विनीत सरन इस समय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हैं। तैल चित्र के अनावरण के दौरान न्यायमूर्ति विनीत सरन, उनकी पत्नी उमा सरन, पौत्र कार्तिकेय सरन सहित परिवार के कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने महिलाओं के लिए वकालत का पेशा करने की छूट देने की मांग की और 1897 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी की एलएलबी परीक्षा में हिस्सा लिया। उसके बाद वह 1899 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वकालत की परीक्षा में भाग लिया। इस दौरान उन्हें वकील के तौर मान्यता नहीं मिली। 1923 में महिलाओं को वकालत करने की छूट मिली तब वह बतौर वकील प्रैक्टिस में आईं लेकिन इसके दो वर्ष पूर्व उनका इनरोल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हो गया था, जो कि तत्कालीन समय का एक एतिहासिक फैसला था। इसी के बाद महिलाओं को वकाल की प्रैक्टिस करने का अधिकार मिल सका।
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हालांकि, उनका इलाहाबाद से सीधा ताल्लुक नहीं रहा। 1904 में, बंगाल की कोर्ट ऑफ वार्ड में लेडी असिस्टेंट नियुक्त किया गया था और 1907 में बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम के प्रांतों में बतौर सहायक महिला वकील पद दिया गया। भारत में महिलाओं को 1923 में वकालत करने की छूट मिली तो वह कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगीं। अपने 20 साल की सेवा में, सोराबजी ने 600 से अधिक महिलाओं और अनाथों को कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद की। इसके बदले में कभी कोई शुल्क नहीं लिया। 1929 में वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुईं और लंदन में बस गईं। वहीं पर उनका 1954 में निधन हो गया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता ने दी 56 सालों तक दी कानूनी सेवाएं
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी में राष्ट्रपति द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एबी सरन के तैल चित्र का अनावरण किया गया। एबी सरन इलाहाबाद हाईकोर्ट में 56 सालों तक अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने बीए की पढ़ाई दिल्ली से की। इसके बाद वह इलाहाबाद आ गए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एएलबी किया और फिर यहीं प्रैक्टिस में जम गए। मूलत: बिजनौर के रहने वाले एबी सरन कॉरपोरेशन और इंश्योरेंस के अधिवक्ता रहे। उनके बेट न्यायमूर्ति विनीत सरन इस समय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हैं। तैल चित्र के अनावरण के दौरान न्यायमूर्ति विनीत सरन, उनकी पत्नी उमा सरन, पौत्र कार्तिकेय सरन सहित परिवार के कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।