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विवि में बस वेलकम ... थैंक्यू और खत्म

Tue, 20 Jan 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Tue, 20 Jan 2015 01:16 AM IST
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... Thank you and welcome to the university just finished
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पंगु हो चुकी कार्यप्रणालि का असर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के संबोधन के दौरान भी दिखा। राष्ट्रपति को सुनने की चाहत लेकर सीनेट हाल में मौजूद छात्र-छात्रा सिर्फ ‘वेलकम और थैंक्यू’ ही सुन पाए। राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान सीनेट हाल में लगे सर्वर का लिंक राष्ट्रपति भवन से पूरी तरह से टूटा रहा। इसकी वजह से विद्यार्थी राष्ट्रपति का संबोधन नहीं सुन सके।
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राष्ट्रपति ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटीज, एनआईटीज आदि संस्थानों के शिक्षकों को संबोधित किया। विश्वविद्यालय में सीनेट हाल में उनका संबोधन सुनने की व्यवस्था की गई थी। संबोधन दिन में 12.20 बजे शुरू हुआ और राष्ट्रगान के बाद उनका भाषण शुरू होते ही लिंक टूट गया फिर खत्म होने के बाद ही जुड़ सका। इसका आभास भी पहले हो गया था कि राष्ट्रपति का संबोधन यहां के विद्यार्थियों को सुनने को नहीं मिलेगा। सिग्नल टूटने का सिलसिला संबोधन से पहले ही शुरू हो गया था।
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पूरी व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले प्रोफेसर इनचार्ज प्रोफेसर आरके सिंह को भी इसका आभास हो गया था। तभी तो संबोधन से पहले ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि नेटवर्क की समस्या हो सकती है। इसलिए वे धैर्य बनाएं रखेंगे। साथ में उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि चंद सेकंड में उसे ठीक कर लिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रोफेसर आरके सिंह की यह अपील छात्र-छात्राओं के बीच चर्चा में रही। विश्वविद्यालय के शिक्षक तो राष्ट्रपति का संबोधन सुनने की जरूरत भी नहीं समझते। तभी तो ज्यादातर सीनेट हाल से गायब रहे लेकिन सिग्नल टूटने से छात्र-छात्राओं में निराशा रही।
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) और भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान(ट्रिपलआईटी) में भी राष्ट्रपति का संबोधन सुनने की व्यवस्था की गई थी। एमएनएनआईटी में निदेशक प्रोफेसर पी.चक्रवर्ती, विभागाध्यक्ष, रजिस्ट्रार कर्नल संजीव बनर्जी समेत अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों ने संबोधन सुना। ट्रिपलआईटी में पहली बार राष्ट्रपति का संबोधन सुनने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए कई केंद्र बनाए गए थे। इसमें निदेशक प्रोफेसर सोमनाथ समेत  बड़ी संख्या में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सुस्त कार्यशैली को एक और उदाहरण से समझा जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रपति के संबोधन को भी गंभीरता से नहीं लिया। स्थिति यह रही कि ज्यादातर शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को राष्ट्रपति के संबोधन की जानकारी ही नहीं थी। जबकि, 15 दिन पहले ही यह कार्यक्रम घोषित हो चुका था। राष्ट्रपति का संबोधन सुनने के लिए  सीनेट हाल में कुलपति, रजिस्ट्रार के अलावा व्यवस्था से जुड़े शिक्षक ही दिखाई दिए। इनके अलावा दो-चार शिक्षक ही पहुंचे।


यहां तक  कि प्रोफेसर मृदुला त्रिपाठी को छोड़कर अन्य डीन भी नहीं पहुंचे। अफसर तो कोई भी नहीं पहुंचा। इस संबंध में शिक्षकों ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी।    यही स्थिति छात्र-छात्राओं की भी रही। वहां राष्ट्रपति का संबोधन सुनने के लिए विद्यार्थियाें की बहुत कम संख्या रही। यहां तक कि छात्रसंघ पदाधिकारियों में से भी कोई नहीं रहा। सीनेट हाल में पहुंचे छात्रों का कहना था कि उन्हें अखबार से जानकारी हुई। विश्वविद्यालय या हॉस्टल में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। पिछले साल विश्वविद्यालय से जुड़े कालेजों में भी राष्ट्रपति का भाषण सुनने की व्यवस्था की गई थी लेकिन जानकारी नहीं होने की वजह से वहां भी इस बार कोई पहल नहीं हुई।
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