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टीईटी : तीन सवालों के सभी को मिलेंगे समान अंक
Thu, 20 Dec 2018 01:47 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 20 Dec 2018 01:47 AM IST
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- फोटो : amar ujala
हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा परीक्षा 2018 के तीन सवालों के अंक सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से देने का आदेश दिया है। इनमें से दो सवाल संस्कृत के हैं, जबकि एक प्रश्न उर्दू विषय का है। जबकि संस्कृत के सी सीरीज के प्रश्न संख्या 66 पर विशेषज्ञ की राय परीक्षा नियामक प्राधिकारी के पक्ष में आने के कारण उस पर स्थिति यथावत ही रहेगी। हिमांशु गंगवार, शिमला सिंह सहित अन्य सैकड़ों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने सुनवाई की।
कोर्ट ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को आदेेश दिया है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा की अंतिम तिथि 20 दिसंबर के मद्देनजर या तो सभी अभ्यर्थियों को प्रोविजनल तौर पर परीक्षा में शामिल किया जाए या फिर अंतिम तिथि को बढ़ाकर पुनरीक्षित परिणाम जारी किया जाए। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह, अनिल सिंह बिसेन, आलोक मिश्र आदि ने पक्ष रखा। टीईटी 2018 का आयोजन 18 नवंबर को किया गया था। पांच दिसंबर को इसका परिणाम घोषित किया। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से जारी आंसर की के कुल 14 प्रश्नों को लेकर विवाद था। इनको लेकर सैकड़ों याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई।
कोर्ट ने सी सीरीज के प्रश्न संख्या 66 पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर रामसेवक दुबे से विशेषज्ञ राय मांगी थी। बुधवार को प्रोफेसर दुबे स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने बताया कि प्रश्न का जो उत्तर परीक्षा नियामक प्राधिकारी की आंसर की में है, वही सही है। इसके साथ ही इस प्रश्न का विवाद समाप्त हो गया, जबकि कोर्ट ने संस्कृत के सी सीरीज के प्रश्न संख्या 38 और 59 में दो-दो विकल्पों के सही उत्तर होने के कारण इनके एक-एक अंक सभी को समान रूप से देने का आदेश दिया है। इसी प्रकार से उर्दू के बी सीरीज बुकलेट के प्रश्न संख्या 75 को गलत मानते हुए इसके अंक भी सभी उर्दू विषय के अभ्यर्थियों को समान रूप से देने का आदेश दिया है। कोर्ट को बताया गया कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य अर्हता है और परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार 20 दिसंबर को ही है। इस पर कोर्ट ने प्राधिकारी से कहा है कि या तो सभी अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से परीक्षा में शामिल किया जाए या अंतिम तिथि आगे बढ़ाकर पुनरीक्षित परिणाम जारी किया जाए।
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कोर्ट ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को आदेेश दिया है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा की अंतिम तिथि 20 दिसंबर के मद्देनजर या तो सभी अभ्यर्थियों को प्रोविजनल तौर पर परीक्षा में शामिल किया जाए या फिर अंतिम तिथि को बढ़ाकर पुनरीक्षित परिणाम जारी किया जाए। याचिका पर अधिवक्ता सीमांत सिंह, अनिल सिंह बिसेन, आलोक मिश्र आदि ने पक्ष रखा। टीईटी 2018 का आयोजन 18 नवंबर को किया गया था। पांच दिसंबर को इसका परिणाम घोषित किया। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से जारी आंसर की के कुल 14 प्रश्नों को लेकर विवाद था। इनको लेकर सैकड़ों याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई।
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कोर्ट ने सी सीरीज के प्रश्न संख्या 66 पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर रामसेवक दुबे से विशेषज्ञ राय मांगी थी। बुधवार को प्रोफेसर दुबे स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने बताया कि प्रश्न का जो उत्तर परीक्षा नियामक प्राधिकारी की आंसर की में है, वही सही है। इसके साथ ही इस प्रश्न का विवाद समाप्त हो गया, जबकि कोर्ट ने संस्कृत के सी सीरीज के प्रश्न संख्या 38 और 59 में दो-दो विकल्पों के सही उत्तर होने के कारण इनके एक-एक अंक सभी को समान रूप से देने का आदेश दिया है। इसी प्रकार से उर्दू के बी सीरीज बुकलेट के प्रश्न संख्या 75 को गलत मानते हुए इसके अंक भी सभी उर्दू विषय के अभ्यर्थियों को समान रूप से देने का आदेश दिया है। कोर्ट को बताया गया कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य अर्हता है और परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि बृहस्पतिवार 20 दिसंबर को ही है। इस पर कोर्ट ने प्राधिकारी से कहा है कि या तो सभी अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से परीक्षा में शामिल किया जाए या अंतिम तिथि आगे बढ़ाकर पुनरीक्षित परिणाम जारी किया जाए।
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