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शिक्षकों ने ही उठाए नई शिक्षा नीति पर गंभीर सवाल

Mon, 29 Jul 2019 10:09 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2019 10:09 PM IST
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Teachers take serious questions on new education policy
Teachers take serious questions on new education policy - फोटो : ALDCOMPACT
ऑक्टा की ओर से सोमवार को सीएमपी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान शिक्षा नीति की ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य डॉ. राम शंकर कुरील के समक्ष इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने कई सुझाव रखे और इस नीति को लेकर तमाम गंभीर सवाल उठाए।
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डॉ. कुरील ने कहा कि एकेडमिक, रिसर्च एवं एक्सटेंशन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सुझाव दिए गए हैं। साथ ही पिछडे़ क्षेत्रों, पिछड़े वर्गों और उपेक्षित तबकों तक शिक्षा के प्रसाद को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति में शिक्षा और शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है मानसिकता को परिवर्तित करना और देश से जुड़ना। कहा कि अगर हम बदलते हुए परिवेश के हिसाब से नहीं सुधरे तो सिस्टम हमें खुद सुधार देगा और अपने से बाहर कर देगा।
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इस दौरान संघटक कॉलेजों की ओर से कई सुझाव दिए गए। छोटे स्कूलों को बंद करना अनुचित बताया गया। बदलती परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा नीति की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए गए और कहा गया कि छोटे संस्थानों पर बड़ों को तवज्जो देना उचित नहीं है। यह शिक्षा नीति स्पष्ट नहीं है और काल्पनिक बातों पर आधारित है। एक प्रतिनिधि ने कहा कि शिक्षा नीति में सबसे उपेक्षित टाइप थ्री के महाविद्यालय है, जो बिल्कुल उचित नहीं है। विश्वविद्यालयों को उनका मेंटर बनाना और भी संदेह पैदा करता है।
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प्रतिनिधियों ने शिक्षा के निजीकरण पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होना चाहिए, निजीकरण नहीं। प्रत्येक वर्ष नियम, कानून और नीतियों में परिवर्तन से शिक्षा प्रभावित हो रही है। नीति निर्माण में युवा शिक्षाविदों को शामिल नहीं किया जा रहा है। इस दौरान संस्कृत की शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने का सुझाव भी आया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन ऑक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने किया। इस मौके पर सीएमपी के प्राचार्य डॉ. बृजेश कुमार, एडीसी के प्राचार्य डॉ. अतुल सिंह, ईसीसी के प्राचार्य डॉ. अरुण मोसेस, इविवि हिंदी विभाग के डॉ. राकेश सिंह, पूर्व ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह आदि मौजूद रहे।
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