{"_id":"5a396c3b4f1c1b6a678c2d84","slug":"teacher-against-the-tradition-of-removing-vc-in-middle-session","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुलपति को बीच सत्र में हटाने की परंपरा के खिलाफ शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुलपति को बीच सत्र में हटाने की परंपरा के खिलाफ शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 20 Dec 2017 01:19 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद विश्वविद्यालय को अराजकता से बचाने और कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की उन्नति के लिए किए जा रहे प्रयासों के समर्थन में आटा एवं ऑक्टा के नेतृत्व में शिक्षकों ने मंगलवार को विश्वविद्यालय में शांति प्रदर्शन किया। इस दौरान शांति मार्च निकाला गया और सीनेट हाल पर सभा हुई। इसमें विवि समेत संघटक महाविद्यालयों के तीन सौ से अधिक शिक्षक शामिल हुए।
शांति मार्च के बाद हुई सभा हुई सभा में आटा के अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कहा कि इविवि को अराजकता की बलि देने वाली ताकतें पुन: सक्रिय हो गई हैं। अनुशासित छात्रों एवं शिक्षकों से भरे हुए विभागों में पठन-पाठन होता हुआ विवि बनाने की कोशिश करना हम सबका कर्तव्य है। कहा कि विवि में कुलपतियों को बीच में ही हटाने की परंपरा बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान कुलपति के प्रयास से किए गए विकास कार्यों की सूची विवि और महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों के हस्ताक्षर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, एमएचआरडी मंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी। सभा में ऑक्टा के अध्यक्ष डॉ.सुनिलकांत मिश्र नेे कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप महाविद्यालयों में पीजी खुलना, शिक्षकों का प्रमोशन, शिक्षकों की नियुक्ति युवाओं एवं समाज के हित में है। संघ शिक्षकों की तरह से मंत्रालय तक लगातार अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करता रहा है लेकिन पिछले छह माह से हमें मंत्री से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा। हम सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। शिक्षक संघों से संवादहीनता के कारण ही आज यह स्थिति है।
इस दौरान उन्होंने कुलपति के प्रयास से हुए कामों पर भी विस्तार से चर्चा की। ऑक्टा के महासचिव डॉ.उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान कुलपति ने विवि और महाविद्यालयों के विकास क लिए जो कार्य किए, वे मील का पत्थर हैं। कुलपति प्रो.हांगलू का जाना संस्थान, छात्र और शिक्षकों के हित में नहीं होगा। उन्होंने मांग किया कि कुलपति को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उनकी निष्पक्ष जांच की जाए। आटा के महासचिव प्रो.शिवमोहन प्रसाद ने कहा कि विवि के कारण ही आज गरीब छात्र पढ़ पाते हैं। इसलिए इसे बचाना सभी शिक्षकों का दायित्व है। इसमें उपाध्यक्ष, डॉ.लालसा यादव, ईश्वर शरण महाविद्यालय केप्राचार्य डॉ.आनंद शंकर सिंह, ऑक्टा के उपाध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी, डॉ.रेखा रानी, डॉ.राजेश कुमार गर्ग, प्रो.संगीता श्रीवास्तव, डॉ.रणधीर सिंह, डॉ.नीलिमा सिंह, डॉ.अंजना श्रीवास्तव, डॉ.एरम फरीद उस्मानी, डॉ.रमा सिंह, डॉ.केएन सिंह, डॉ.काजल देव, डॉ.नरेंद्र वाजपेई, प्रो.बीएन सिंह, प्रो.हर्ष कुमार, प्रो.साहित्य कुमार नाहर, प्रो.बीके राय, प्रो.सूर्य नारायण, प्रो.हरिशंकर उपाध्याय आदि शामिल थे।
विज्ञापन
एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी एवं प्रयाग उत्थान मंच के तत्वावधान में इविवि के कुलपति के समर्थन में एडीसी कीडगंज पदयात्रा निकाली गई, जो बैरहना चौराहा पर सम्पन्न हुई। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि विवि की गरिमा को कुछ अराजक तत्व अपने स्वार्थवश प्रदूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें शिब्बू तिवारी, डॉ.चंद्रशेखर, डॉ.निहारिका ने विचार व्यक्त किए। पदयात्रा में पिंटू, अजीत, रितेश, रवि आदि शामिल थे।
विज्ञापन
शांति मार्च के बाद हुई सभा हुई सभा में आटा के अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कहा कि इविवि को अराजकता की बलि देने वाली ताकतें पुन: सक्रिय हो गई हैं। अनुशासित छात्रों एवं शिक्षकों से भरे हुए विभागों में पठन-पाठन होता हुआ विवि बनाने की कोशिश करना हम सबका कर्तव्य है। कहा कि विवि में कुलपतियों को बीच में ही हटाने की परंपरा बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान कुलपति के प्रयास से किए गए विकास कार्यों की सूची विवि और महाविद्यालयों के सभी शिक्षकों के हस्ताक्षर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, एमएचआरडी मंत्री और मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी। सभा में ऑक्टा के अध्यक्ष डॉ.सुनिलकांत मिश्र नेे कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप महाविद्यालयों में पीजी खुलना, शिक्षकों का प्रमोशन, शिक्षकों की नियुक्ति युवाओं एवं समाज के हित में है। संघ शिक्षकों की तरह से मंत्रालय तक लगातार अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करता रहा है लेकिन पिछले छह माह से हमें मंत्री से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा। हम सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। शिक्षक संघों से संवादहीनता के कारण ही आज यह स्थिति है।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने कुलपति के प्रयास से हुए कामों पर भी विस्तार से चर्चा की। ऑक्टा के महासचिव डॉ.उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान कुलपति ने विवि और महाविद्यालयों के विकास क लिए जो कार्य किए, वे मील का पत्थर हैं। कुलपति प्रो.हांगलू का जाना संस्थान, छात्र और शिक्षकों के हित में नहीं होगा। उन्होंने मांग किया कि कुलपति को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं उनकी निष्पक्ष जांच की जाए। आटा के महासचिव प्रो.शिवमोहन प्रसाद ने कहा कि विवि के कारण ही आज गरीब छात्र पढ़ पाते हैं। इसलिए इसे बचाना सभी शिक्षकों का दायित्व है। इसमें उपाध्यक्ष, डॉ.लालसा यादव, ईश्वर शरण महाविद्यालय केप्राचार्य डॉ.आनंद शंकर सिंह, ऑक्टा के उपाध्यक्ष धीरेंद्र द्विवेदी, डॉ.रेखा रानी, डॉ.राजेश कुमार गर्ग, प्रो.संगीता श्रीवास्तव, डॉ.रणधीर सिंह, डॉ.नीलिमा सिंह, डॉ.अंजना श्रीवास्तव, डॉ.एरम फरीद उस्मानी, डॉ.रमा सिंह, डॉ.केएन सिंह, डॉ.काजल देव, डॉ.नरेंद्र वाजपेई, प्रो.बीएन सिंह, प्रो.हर्ष कुमार, प्रो.साहित्य कुमार नाहर, प्रो.बीके राय, प्रो.सूर्य नारायण, प्रो.हरिशंकर उपाध्याय आदि शामिल थे।
विज्ञापन
एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी एवं प्रयाग उत्थान मंच के तत्वावधान में इविवि के कुलपति के समर्थन में एडीसी कीडगंज पदयात्रा निकाली गई, जो बैरहना चौराहा पर सम्पन्न हुई। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि विवि की गरिमा को कुछ अराजक तत्व अपने स्वार्थवश प्रदूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसमें शिब्बू तिवारी, डॉ.चंद्रशेखर, डॉ.निहारिका ने विचार व्यक्त किए। पदयात्रा में पिंटू, अजीत, रितेश, रवि आदि शामिल थे।