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दुष्कर्म पीड़िता का दोबारा बयान लेना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग - हाईकोर्ट

Fri, 13 Aug 2021 10:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Aug 2021 10:25 PM IST
सार

  • धारा 161(3) की प्रक्रिया का पालन करने के लिए गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश 

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Taking statement of rape victim again: Abuse of judicial process - High Court
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार दुष्कर्म पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद पुलिस विवेचक द्वारा आरोपी की मिलीभगत से बिना आडियो वीडियो रिकार्डिंग के दोबारा बयान लेने को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया है और प्रमुख सचिव गृह व पुलिस महानिदेशक को दो हफ्ते में सभी पुलिस अधीक्षकों को धारा 161(3) की प्रक्रिया का पालन करने की गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश दिया है तथा इसे 2 सितंबर को कोर्ट में पेश करने को कहा है। कोर्ट ने साथ ही यह भी कहा है कि दो माह में इस आशय का सर्कुलर जारी किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने फूलपुर, प्रयागराज के बुल्ले  की जमानत अर्जी पर दिया है।
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याची का कहना था कि केस की विवेचना ठीक ढंग से नहीं की गई। सह अभियुक्त को दुष्कर्म के आरोप से पीड़िता का दोबारा बयान लेकर पुलिस ने अलग कर दिया,  इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए। कोर्ट ने विवेचक को तलब कर सफाई मांगी तो उसने कहा दोबारा बयान लेने पर रोक नहीं है। उसने प्रक्रिया की खामियों पर बिना शर्त माफी मांगी। बयान की आडियो वीडियो रिकार्डिंग नहीं की गयी। यह भी गलती मानी कि बयान उसने लिया है, महिला पुलिस ने नहीं। मामले में कोर्ट ने एसएसपी प्रयागराज को उचित कार्रवाई करने को कहा है।
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कोई भी कानून से ऊपर नहीं, निष्पक्ष हो अपराधों की विवेचना
कोर्ट ने कहा कि अपराध की निष्पक्ष, पारदर्शी विवेचना कराना न केवल पुलिस वरन कोर्ट की भी जिम्मेदारी है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। विवेचक को गलत उद्देश्य से विवेचना नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष, पारदर्शी विवेचना कराना आपराधिक न्याय व्यवस्था का जरूरी हिस्सा है। धारा 164 का बयान धारा 161 के दर्ज बयान पर हमेशा प्रभावी होता है। हाईकोर्ट की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक के अधिकार सुरक्षित रहें। अपराध की निष्पक्ष पारदर्शी विवेचना की जाए।
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