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अनुकंपा नियुक्ति देने में आर्थिक स्थिति का रखें ध्यान
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Take care of financial situation in giving compassionate appointment
अनुकंपा नियुक्ति देने में आर्थिक स्थिति का रखें ध्यान
0 पिता की मृत्यु के समय दुधमुही रही बच्ची की नियुक्ति पर निर्णय लेने का आदेश
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर निर्णय लेते समय आवेदक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसे सरसरी तौर से खारिज नहीं करना चाहिए। हाईकोर्ट ने ललितपुर में लेखपाल पिता की मौत के समय सात माह की बच्ची को बालिग होने पर मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इंकार करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत नए सिरे से छह सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार के निर्णय के बाद उसके चार सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी नियुक्ति के संबंध में आदेश पारित करें ।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने रेनू की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है । याची अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि लेखपाल पिता की 26 मई 1990 को सेवाकाल में मृत्यु हो गई । 15 नवंबर 1989 को उसका जन्म हुआ था।पिता की मृत्यु के समय याची सात माह की थी। जन्म के कुछ दिनों बाद ही उसकी मां की भी मौत हो गई । कोर्ट के आदेश से चाचा की संरक्षण में वह पली। जब वह 16 साल की हुई तो उसने 11 अप्रैल 2004 को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की । बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ललितपुर ने याची को नाबालिग मानते हुए नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। 18 वर्ष की होने पर उसने दुबारा अर्जी दी। राज्य सरकार को आवेदन देने मे देरी से छूट देने की सिफारिश की गई। जिसे निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई।
अधिववक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि शिव कुमार दुबे केस में सुप्रीम कोर्ट ने आश्रित की आर्थिक स्थिति एवं अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति पूर्वक नियुक्ति पर विचार करने का दिशा निर्देश जारी किया है । राज्य सरकार ने यह कहते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था कि याची को 375 रुपये प्रति माह पारिवारिक पेंशन दी जा रही है। कोर्ट ने कहा याची की वित्तीय स्थिति का परीक्षण करते हुए राज्य सरकार नए सिरे से इस संबंध में निर्णय लें।
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0 पिता की मृत्यु के समय दुधमुही रही बच्ची की नियुक्ति पर निर्णय लेने का आदेश
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर निर्णय लेते समय आवेदक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसे सरसरी तौर से खारिज नहीं करना चाहिए। हाईकोर्ट ने ललितपुर में लेखपाल पिता की मौत के समय सात माह की बच्ची को बालिग होने पर मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इंकार करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत नए सिरे से छह सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार के निर्णय के बाद उसके चार सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी नियुक्ति के संबंध में आदेश पारित करें ।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने रेनू की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है । याची अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि लेखपाल पिता की 26 मई 1990 को सेवाकाल में मृत्यु हो गई । 15 नवंबर 1989 को उसका जन्म हुआ था।पिता की मृत्यु के समय याची सात माह की थी। जन्म के कुछ दिनों बाद ही उसकी मां की भी मौत हो गई । कोर्ट के आदेश से चाचा की संरक्षण में वह पली। जब वह 16 साल की हुई तो उसने 11 अप्रैल 2004 को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की । बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ललितपुर ने याची को नाबालिग मानते हुए नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। 18 वर्ष की होने पर उसने दुबारा अर्जी दी। राज्य सरकार को आवेदन देने मे देरी से छूट देने की सिफारिश की गई। जिसे निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ याचिका दाखिल की गई।
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अधिववक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि शिव कुमार दुबे केस में सुप्रीम कोर्ट ने आश्रित की आर्थिक स्थिति एवं अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति पूर्वक नियुक्ति पर विचार करने का दिशा निर्देश जारी किया है । राज्य सरकार ने यह कहते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था कि याची को 375 रुपये प्रति माह पारिवारिक पेंशन दी जा रही है। कोर्ट ने कहा याची की वित्तीय स्थिति का परीक्षण करते हुए राज्य सरकार नए सिरे से इस संबंध में निर्णय लें।
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