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सर्वसुलभ टेक्नोलॉजी विकसित करने पर जोर

Sat, 04 Mar 2017 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 04 Mar 2017 01:51 AM IST
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Tai Technology focused on developing
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सैदाबाद के बींदा गांव में बिनोवा भावे रिसर्च इंस्टीट्यूट (वीबीआरआई) में चल रहे एनआरआई टेक्नोलॉजी मीट एंड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन नैनो मैटेरियल्स एंड नैनो टेक्नोलॉजी में विश्व के दर्जन भर से अधिक वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का जमावड़ा लगा है। तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस छह सत्रों में चलाया जा रहा है। इसमें एनर्जी, हेल्थ, नैनो टेक्नोलॉजी, शिक्षा, एग्रीकल्चर, पानी, पर्यावरण, नैनो डिवाइसेस, कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स, मैग्नेटिक, नैनो मैटेरियल्स आदि विषयों पर देश के जाने माने वैज्ञानिक अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
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आईसीएनएएनओ 2017 एंड एनआरआई टेक्नोलॉजी मीट में ऐसी टेक्नॉलाजी विकसित करने पर ज्यादा जोर है जो सर्वसुलभ हो और वह हर किसी के पहुंच में आ सके। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चल रहे सत्र में ऐसे युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को रिसर्च की बारीकियां बताई जा रही हैं जो विदेशों में रहकर शोध कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीण परिवेश के बड़ी संख्या में युवाओं को इससे जोड़कर उन्हें इसके लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि वह भी इसका लाभ उठाकर देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। कॉन्फ्रेंस में दर्जन भर देशों के 25 से अधिक वैज्ञानिक और शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं।
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पिछले साल दो कमरों से शुरू हुआ वीबीआरआई परिसर इस समय तीन फ्लोर में बदल गया है। आगे इसको छह फ्लोर में करने की योजना है। इसी कैंपस में लॉ कॉलेज भी संचालित होता है। वीवीआईपी लुक के साथ इंस्टीट्यूट को इंटरनेशनल इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ पूर्णतया वाईफाई किया गया है। देश और विदेश के जाने माने वैज्ञानिक अलग-अलग कमरों में विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में भारत सहित स्वीडन, यूके, पुर्तगाल, जर्मनी, जापान, चाइना, बेलारूस, टर्की, रूस, यूक्रेन, साउथ कोरिया, साउथ अफ्रीका, फ्रांस सहित कई देशों के वैज्ञानिक और शोधार्थी प्रोफेसर राजीव आहूजा, प्रोफेसर माइकल साइजादी, प्रो. हिसातोषी कोबयासी, लुकमान उजून, मारिया नटालिया, स्वाति डे, रेगीना सूत, डॉ. हीरक कुमार पात्रा, प्रो. आदित्य, एफ जेनी, उरूल मुरुगन आदि ने अपने अपने अनुभव और शोध को शेयर किया।
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वीबीआरआई के वाइस डिप्टी डायरेक्टर माइकल सर्वागोसी का कहना है कि कॉन्फ्रेंस में एडवांस मैटेरियल्स के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। विश्व स्तर पर होने वाले रिसर्च की बारीकियां बताई जा रही हैं। इस वीबीआरआई से जुड़ने पर उन्हें प्रसन्नता हुई। उनका अपना अनुभव है कि इंडिया के रिसर्चर मेहनती और अनुशासित होते हैं। वह नई-नई चीजों को सीखने में रुचि रखते हैं। बताया कि कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य रिसर्च के माध्यम के समाज में व्याप्त समस्याओं को दूर करना है। लोगों को नई तकनीकि के बारे में अवगत कराना है।

पानी, बिजली, टेक्नोलॉजी आदि के क्षेत्र में रिसर्च कर उसे जनमानस के बीच उपयोग में लाना है, ताकि उसका लाभ लोगों को को मिल सके। कृषि, एनर्जी, शिक्षा और पानी के क्षेत्र में ऐसी नई-नई टेक्नोलॉजी ईजाद तो हुई है, लेकिन वह महंगी होने के कारण सामान्य लोगों से दूर है। जैसे पानी को शुद्ध करने के लिए तमाम डिवाइस बाजार में हैं, जो संपन्न लोगों की ही पहुंच में हैं। गांव के गरीब उसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। संपन्न लोग ही उसका उपयोग कर पा रहे हैं। इसके अलावा तमाम विश्वविद्यालयों में भी आए दिन शोध प्रकाशित होते हैं जो सिर्फ फाइल में ही दबकर रह जाते हैं और जमीन पर नहीं आ पाते हैं। इससे अलग हटकर कॉन्फ्रेंस में ऐसे शोध पर जोर दिया जा रहा है जिसका लाभ कम से कम खर्च या बिना खर्च के लोगों को मिले। इसी तरह सोलर एनर्जी, कृषि और शिक्षा सहित अन्य क्षेत्र में भी काम करने का प्रयास है।

एनआरआई टेक्नोलॉजी मीट एंड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन नैनो मैटेरियल्स एंड नैनो टेक्नोलॉजी में अंतिम दिन शुक्रवार को विश्व के शीर्ष वैज्ञानिक अपने शोध के बारे में जानकारी देने के साथ गांव में भी गए। उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और उसके हिसाब से शोध करने का भरोसा दिलाया। नेशनल एकेडमी आफ बेलारूस के प्रो. सर्गे फुटको ने अपनी खोज नैनो फिल्टर के बारे में बताया। बताया कि इससे गाड़ियों से निकलने वाला धुएं का असर पर्यावरण पर काफी हद तक कम किया जा सकता है।


यह फिल्टर जहरीले धुएं को सोखकर पानी में बदल देगा। आईएएएम मेडल लेक्चर पुर्तगाल की मारिया नटालिया कार्डीरो ने दिया। उन्होंने सिलिको टूल के बारे में जानकारी दी। फ्रांस के प्रो. रेगिस गुएगन ने नैनो शीट के बारे में बताया। कहा कि इससे कोई चीज घंटों में नहीं कुछ मिनटों में चार्ज हो जाएगी। वैज्ञानिक प्रो. आशुतोष तिवारी ने जल्द ही डिजिटल खुरपी और डिजिटल फावड़ा बनाने का घोषणा की। इनका उपयोग बुजुर्ग बिना किसी परेशानी के कर सकेंगे। रूस की इरिना अंटोनोवा, प्रो. रेगिना सूट्स, चीन के डॉ. वेनबो वांग, कनाडा के डॉ. सिनोज अब्राहम, जर्मनी के प्रो. योगेंद्र मिश्र के साथ प्रमोद मेहता, अशोक नायक, इरा भटनाकर, आईआईटी मुंबई के डॉ. मुरुगेसम सोमसुंदरम ने भी जानकारी दी।
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