स्वामी वासुदेवानंद बोले : मठ-मंदिरों को छोड़कर हिंदू समाज को धर्म, संस्कृति के लिए जागृत करें संत
विहिप काशी प्रांत मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य एवं स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि हिंदू समाज का जागरण ही हिंदू समाज की समस्याओं का समाधान है। बिखरते परिवार से समाज में संस्कार समाप्त हो रहे हैं।
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विश्व हिंदू परिषद मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि संतों से आह्वान किया कि वह मठ-मंदिरों को छोड़कर हिंदू समाज को धर्म, संस्कृति के लिए जागृत करें। हिंदु धर्म एवं संस्कृति को विस्तार देने के लिए भी संत आगे आएं। इसके लिए बिखरते हिंदु परिवारों को पहले एकजुट किया जाए। स्वामी वासुदेवानंद ने यह विचार अलोपीबाग स्थित आश्रम में व्यक्त किए।
विहिप काशी प्रांत मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य एवं स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि हिंदू समाज का जागरण ही हिंदू समाज की समस्याओं का समाधान है। बिखरते परिवार से समाज में संस्कार समाप्त हो रहे हैं। इसलिए हिंदू समाज की मुख्यधारा से दूर हुए अपने लोगों को मुख्यधारा में लाने का कार्य हमें ही करना है।
इस अवसर पर एकनाथ पीठ के आचार्य जितेंद्रनाथ ने कहा, हिंदू धर्म संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसको कोई आक्रांता समाप्त नहीं कर सकता। भारत की पूरी दुनिया में पहचान शांति और धर्म के प्रेरक के रूप में है। धर्म संस्कृति के नाम पर हमारा जो समाज किसी कालखंड में हमसे दूर हुआ उन्हें मुख्यधारा में लाने का कार्य हमको करना है । स्वामी घनश्यामाचार्य ने कहा कि जागृत एवं समर्थ हिंदू दुनिया में अग्रणी होगा। विश्व की मंगल कामना इसी बिंदु पर निर्भर करती है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सच्चा बाबा आश्रम के महंत स्वामी गोपाल जी महाराज ने कहा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में जन-जन ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। बाबा अमरनाथ की यात्रा की कठिनाई को दूर करने में भी हमारी एकता काम आई, रामसेतु की रक्षा करने में भी हिंदू समाज सफल रहा। अब समरसता जैसे मुद्दे पर भी हमें प्रयास करना होगा। ऐसा करेंगे तभी काशी और मथुरा में सफल होंगे।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद जैसी समस्या का समाधान तभी होगा जब हिंदू समाज पूर्ण रूप से जागृत हो। कार्यक्रम का संचालन प्रांत संगठन मंत्री मुकेश कुमार ने किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, आचार्य जमुना पुरी जी महाराज, ओंकार गिरि, स्वामी नारायण दास, चंद्र भूषण दास, राम प्रपन्नाचार्य, हरिशंकर, विमल प्रकाश, नितिन, अमित पाठक, आनंद शंकर दुबे, सुरेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।