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उगते सूर्य को अर्घ्य से पूरी हुई साधना

Sat, 28 Oct 2017 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 28 Oct 2017 01:30 AM IST
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Suryaksha completed with rising sun
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
भगवान सूर्य की उपासना का महाव्रत डाला छठ शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूरा हुआ। सूर्य के उगते ही घंटा-घड़ियाल, शंख ध्वनि और जयकारों से गंगा-यमुना के विभिन्न घाटों सहित संगम तट गूंज उठा। संगम तट पर आदित्य हृदयस्त्रोत के मंत्रों का पाठ भी हुआ। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आधी रात के बाद से ही तैयारियां शुरू हो गईं थीं। कई घरों में तो पूरी रात छठ गीतों के साथ जागरण हुआ।
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संगम सहित गंगा-यमुना के तट तक जाने वाले रास्ते छठ गीतों से गूंजते रहे। निर्जला व्रत के बावजूद व्रती महिलाओं के चेहरे पर उल्लास और मन प्रफुल्लित था। नाक से माथे तक मंगल सिंदूर लगाए नंगे पांव घाट पर पहुंचने का सिलसिला भोर से काफी पहले ही शुरू हो गया था। घाट पहुंचकर महिलाओं ने पूजा स्थल पर जलता दीपक रखा। कमर तक पानी में खड़े होकर उगते सूर्य की पल-पल प्रतीक्षा की। सूर्य की पहली किरण के साथ ही अर्घ्य का क्रम शुुरू हुआ और सुबह तक चलता रहा। व्रती महिलाओं ने अर्घ्य देकर परिवार एवं संतान के सुख-सौभाग्य, आयुष्य की मंगल कामना की। तट पर ही प्रसाद बांटा गया। घर आकर बड़े बुजुर्गों का पांव छूकर आशीर्वाद लिया और मीठी चीज खाकर व्रती महिलाओं ने पारण किया। व्रत का संकल्प सकुशल पूरा हुआ तो चेहरे पर खुशी और संतोष का भाव झलका।
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पूर्वांचल छठ पूजा समिति की ओर से देश के सैनिकों के लिए कोसी भरी गई। उनके शौर्य शक्ति को बढ़ाने के लिए सूर्य देव से प्रार्थना की गई। अध्यक्ष अजय राय ने आचार्य पुरोहितों की देखरेख में कोसी भरने के बाद लेटकर संगम तट आने वाले व्रतियों को सम्मानित किया। इसके बाद प्रसाद बांटा गया। इस अवसर पर सुदामा सिंह, शेषनाथ सिंह, लल्लन राय, विनय उपाध्याय, अजीत राय, कृष्णानंद तिवारी, हिमांशु दुबे, अरुण तिवारी, आशीष उपाध्याय, सुरेश यादव, विकास पांडेय, अमन सिंह, अतुल राय, शुभम पटेल, राहुल सिंह, प्रदीप कुमार गोस्वामी, संजीव सिंह, नीरज यादव, विनोद सिंह आदि उपस्थित थे।
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सूर्य प्रतिमा को मंत्रोच्चार के साथ विदाई दी गई। पूर्वांचल छठ पूजा समिति की ओर से संगम नोज पर स्थापित सात घोड़ों से जुड़े रथ पर सवार भगवान भास्कर की प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ रामघाट स्थित विसर्जन तालाब तक लाया गया और श्रद्धापूर्वक विसर्जित किया गया। तालाब में कम पानी होने से प्रतिमा जल में डूबी नहीं तब समिति के लोग तालाब में उतरे और प्रतिमा के ऊपर जल डाला। अध्यक्ष अजय राज के मुताबिक विसर्जन तालाब में पर्याप्त जल न होने से लोगों आस्था आहत हुई।


बलुआघाट बारादरी पर बाबा समाजसेवी संस्थान के सतीश केसरवानी की देखरेख में स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं का सहयोग किया। व्रती महिलाओं को पूजा-अर्चना एवं घाट पर सफाई अभियान चलाने वालों में जगदीश केसरवानी, मनोज, सुधीर, पवन, राजीव, जितेंद्र आदि शामिल थे। अर्पित सेवा संस्थान की ओर से गंगा तट पर स्वच्छता अभियान सचिव अर्चना शुक्ला की अगुवाई में हुआ। तन्मय उपाध्याय, सीमा पांडेय, अक्षत, आशीष, रेनू, प्रवेश आदि अभियान में शामिल रहे। धन्यवाद श्याम सुंदर पटेल ने ज्ञापित किया।
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