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सुमित शुक्ला हत्याकांड में नया खुलासा, सामने आई वारदात की सीसीटीवी फुटेज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Updated Mon, 12 Nov 2018 07:44 PM IST
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सुमित शुक्ला हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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इनामी छात्रनेता अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला हत्याकांड का सोमवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। तीन दिन पहले हिरासत में लिए गए 50-50 हजार के इनामी तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाते हुए दावा किया कि भागने में इनकी मदद चार युवकों ने की थी, जिनकी तलाश की जा रही है।
इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एक आरोपी इनामी छात्रनेता अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला पर पीछे से गोली चलाते हुए दिख रहा है। गोली चलाते ही आरोपी भाग जाता है। पुलिस ने इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण बातें बताई।
25 हजार के इनामी अच्युतानंद की हत्या 31 अक्तूबर की रात पीसीबी हॉस्टल में कर दी गई थी। मामले के तीनों आरोपियों 50-50 हजार के इनामी सीएमपी छात्रसंघ अध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी, हरिकेश मिश्रा व सौरभ सिंह उर्फ प्रिंस को तीन दिन पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। सोमवार को तीनों की गिरफ्तारी नैनी के छिवकी से दिखाते हुए एसएसपी ने बताया कि इनसे गहन पूछताछ की गई।
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इसमें उन्होंने बताया कि हॉस्टल में आयोजित जन्मदिन पार्टी में आशुतोष दोस्तों हरिकेश व प्रवीण सिंह गज्जू के साथ पहुंचा था। डांस करने के दौरान गज्जू का अच्युतानंद के करीबी आलोक चौबे से विवाद हुआ तो हरिकेश व आशुतोष उसके पक्ष से बोलने लगे। जिस पर अच्युतानंद ने तीनों को वहां से भगा दिया। कुछ देर बाद अच्युतानंद ने ही फोन कर बुलाया।
आशुतोष हरिकेश व गज्जू के साथ ही सौरभ, कनक उर्फ राहुल व देवऋषि सिंह उर्फ देवा शूटर के साथ पहुंचा। हालांकि भीतर केवल आशुतोष, हरिकेश व सौरभ ही गए। डर था कि अच्युतानंद व उसके साथी हमला कर सकते हैं, ऐसे में आशुतोष ही अच्युतानंद के पास गया और उसके ठीक पीछे वाली सीट पर जाकर बैठ गया। कुछ ही पल बीते थे कि अचानक उसने अच्युतानंद की पीठ पर गोली दाग दी और वहां से भाग निकला।
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आश्ुतोष ने बताया है कि अच्युतानंद उसका गुरु था लेकिन, पिछले कई महीनों से वह सबके सामने उसे बेइज्जत कर रहा था। छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद भी वह ऐसा करता रहा। जिसे लेकर उसके मन में गुस्सा था। पार्टी में विवाद के बाद भी उसे गालीगलौच कर भगाया। इस बार भी वह अपमान का घूंट पीकर रह गया। लेकिन, जब दोबारा उसे बुलाया गया तो वह गुस्से पर काबू नहीं रख पाया और उसे गोली मार दी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास से एक पिस्टल, दो तमंचे व आठ कारतूस बरामद हुए हैं।
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इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें एक आरोपी इनामी छात्रनेता अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला पर पीछे से गोली चलाते हुए दिख रहा है। गोली चलाते ही आरोपी भाग जाता है। पुलिस ने इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण बातें बताई।
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25 हजार के इनामी अच्युतानंद की हत्या 31 अक्तूबर की रात पीसीबी हॉस्टल में कर दी गई थी। मामले के तीनों आरोपियों 50-50 हजार के इनामी सीएमपी छात्रसंघ अध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी, हरिकेश मिश्रा व सौरभ सिंह उर्फ प्रिंस को तीन दिन पहले ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। सोमवार को तीनों की गिरफ्तारी नैनी के छिवकी से दिखाते हुए एसएसपी ने बताया कि इनसे गहन पूछताछ की गई।
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इसमें उन्होंने बताया कि हॉस्टल में आयोजित जन्मदिन पार्टी में आशुतोष दोस्तों हरिकेश व प्रवीण सिंह गज्जू के साथ पहुंचा था। डांस करने के दौरान गज्जू का अच्युतानंद के करीबी आलोक चौबे से विवाद हुआ तो हरिकेश व आशुतोष उसके पक्ष से बोलने लगे। जिस पर अच्युतानंद ने तीनों को वहां से भगा दिया। कुछ देर बाद अच्युतानंद ने ही फोन कर बुलाया।
आशुतोष हरिकेश व गज्जू के साथ ही सौरभ, कनक उर्फ राहुल व देवऋषि सिंह उर्फ देवा शूटर के साथ पहुंचा। हालांकि भीतर केवल आशुतोष, हरिकेश व सौरभ ही गए। डर था कि अच्युतानंद व उसके साथी हमला कर सकते हैं, ऐसे में आशुतोष ही अच्युतानंद के पास गया और उसके ठीक पीछे वाली सीट पर जाकर बैठ गया। कुछ ही पल बीते थे कि अचानक उसने अच्युतानंद की पीठ पर गोली दाग दी और वहां से भाग निकला।
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान आश्ुतोष ने बताया है कि अच्युतानंद उसका गुरु था लेकिन, पिछले कई महीनों से वह सबके सामने उसे बेइज्जत कर रहा था। छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद भी वह ऐसा करता रहा। जिसे लेकर उसके मन में गुस्सा था। पार्टी में विवाद के बाद भी उसे गालीगलौच कर भगाया। इस बार भी वह अपमान का घूंट पीकर रह गया। लेकिन, जब दोबारा उसे बुलाया गया तो वह गुस्से पर काबू नहीं रख पाया और उसे गोली मार दी। पुलिस का दावा है कि आरोपियों के पास से एक पिस्टल, दो तमंचे व आठ कारतूस बरामद हुए हैं।
चार मददगारों की तलाश में जुटी पुलिस
फाइल फोटो
पुलिस का दावा है कि हत्या के बाद तीनों आरोपियों की भागने में अच्छे लॉज निवासी गज्जू, देवऋषि, कनक व हॉस्टलर प्रदीप यादव ने मदद की। प्रदीप ने ही पहले आशुतोष और इसके बाद सौरभ व हरिकेश को रोडवेज बस अड्डे छोड़ा। जबकि गज्जू, देवऋषि व कनक ओला कैब से झूंसी तक गए व इसके बाद वाराणसी भाग निकले।
उधर, तीनों हत्यारोपी निजी वाहन से लखनऊ और फिर वहां से नेपाल भाग निकले जहां आशुतोष की बुआ रहती थी। इसकी भनक लगने के बाद नैनी इंस्पेक्टर पंकज सिंह व सिपाही बृजेंद्र राय वहां पहुंचे और तीनों को पकड़कर अपने साथ ले लाए। सूत्रों की मानें तो प्रदीप को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि पुलिस इससे इंकार कर रही है। उसका कहना है कि चारों मददगारों की तलाश की जा रही है।
पहले भी एक हत्या में रह चुका है शामिल
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी आशुतोष ने पूर्व में हुई हत्या की एक वारदात में शामिल होने की भी बात कबूली है। सिविल लाइंस में बीयर बार में 3 मई 2015 में हुई हत्या में वह शामिल था। इसके अलावा कर्नलगंज में हत्या के प्रयास के दो केस में भी वह वांछित था।
उधर, तीनों हत्यारोपी निजी वाहन से लखनऊ और फिर वहां से नेपाल भाग निकले जहां आशुतोष की बुआ रहती थी। इसकी भनक लगने के बाद नैनी इंस्पेक्टर पंकज सिंह व सिपाही बृजेंद्र राय वहां पहुंचे और तीनों को पकड़कर अपने साथ ले लाए। सूत्रों की मानें तो प्रदीप को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि पुलिस इससे इंकार कर रही है। उसका कहना है कि चारों मददगारों की तलाश की जा रही है।
पहले भी एक हत्या में रह चुका है शामिल
पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी आशुतोष ने पूर्व में हुई हत्या की एक वारदात में शामिल होने की भी बात कबूली है। सिविल लाइंस में बीयर बार में 3 मई 2015 में हुई हत्या में वह शामिल था। इसके अलावा कर्नलगंज में हत्या के प्रयास के दो केस में भी वह वांछित था।