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Prayagraj : पैरागैंगलियोमा से ग्रसित तीन मरीजों की एसआरएन में सफल सर्जरी

Mon, 25 Dec 2023 12:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 25 Dec 2023 12:49 PM IST
सार

पैरागैंगलियोमा बीमारी अक्सर पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों में पाई जाती है। क्योंकि जमीन की सतह से ऊपर होने के कारण ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिसके कारण गले में ऑक्सीजन के सेंसर की साइज बढ़ने लगती है। कभी-कभी यह ट्यूमर बना देती है।

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Successful surgery of three patients suffering from paraganglioma in SRN.
सर्जरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में पैरागैंगलियोमा नामक बीमारी से ग्रसित तीन मरीजों की सफल सर्जरी हुई। इन तीनों मरीजों के गले में दिमाग की मुख्य धमनी कैरोटिड आर्टरी और इंटरनल कैरोटिड आर्टरी पूरी तरह से ट्यूमर से घिरी हुई थी। मरीज तीसरी स्टेज में पहुंच गए थे। सर्जरी के दस दिनों बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। चिकित्सकों की मानें तो यह अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

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पैरागैंगलियोमा बीमारी अक्सर पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों में पाई जाती है। क्योंकि जमीन की सतह से ऊपर होने के कारण ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिसके कारण गले में ऑक्सीजन के सेंसर की साइज बढ़ने लगती है। कभी-कभी यह ट्यूमर बना देती है।
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मैदानी क्षेत्र में एक लाख में चार से पांच लोग इस कैंसर से ग्रसित पाए जाते हैं। इसका समय पर इलाज न होने से दिमाग की नसें ब्लॉक हो जाती हैं और इंसान की मृत्यु का खतरा रहता है। एसआरएन के सीनियर रेजिडेंट डॉ. राजुल अभिषेक व डॉ. आशीष पांडेय की टीम ने यह सफल सर्जरी की। प्रत्येक सर्जरी में पांच घंटे से अधिक का समय लगा। तीनों मरीज मेजा, कौशांबी और मीरापुर इलाके के रहने वाले हैं।

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केस नंबर 1- मेजा निवासी 60 वर्षीय वृद्धा के गले में दो साल से ट्यूमर था, जो बढ़ रहा था। महिला आयुष्मान लाभार्थी भी थीं। इनकी सर्जरी 15 नवंबर को हुई। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।

केस नंबर 2- मीरापुर निवासी वृद्ध (65) के गले में कैरोटिड बॉडी ट्यूमर था और इंटरनल कैरोटिड आर्टरी को पूरी तरह से घेर लिया था। 17 नवंबर को इनकी सर्जरी की गई और दस दिनों बाद इन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

केस नंबर 3- कौशांबी निवासी 32 वर्षीय महिला को कैरोटिड बॉडी ट्यूमर था। जांच के दौरान पता चला कि इनका ट्यूमर तीसरी स्टेज पर पहुंच गया। ऐसे में सर्जरी करना कठिन था। मगर चिकित्सकों ने मरीज के साथ मिलकर रिस्क लिया। 20 नवंबर को हुई सर्जरी के बाद महिला पूरी तरह से स्वस्थ है।

यह एक कठिन सर्जरी थी, जिसमें तीनों मरीज स्टेज थ्री में पहुंच चुके थे। इस सर्जरी के लिए विशेष प्रकार की योजना बनाई गई। अब मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। - डॉ. राजुल अभिषेक, सीनियर रेजिडेंट, कैंसर विभाग, एसआरएन।

इस प्रकार की गंभीर बीमारियों का इलाज एसआरएन में कुशल चिकित्सकों के द्वारा सफलतापूर्वक हो रहा है। हम आधुनिक तरीकों से इलाज कर रहे हैं। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, मोतिलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

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