फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Subjects any country becomes king

राजा नहीं रियाया से बनता है देश

Mon, 01 Aug 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 01 Aug 2016 01:48 AM IST
विज्ञापन
Subjects any country becomes king
मुंशी प्रेमचंद्र - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जंयती पर रविवार को प्रलेस, जलेस एवं जसम के न्योते पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र में जुटे रचनाकारों ने न सिर्फ कलम के सिपाही को पूरे मन से याद किया बल्कि समसामयिक संदर्भों में शिद्दत के साथ उनके रचना संसार की परत दर परत पड़ताल भी की। वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह ने ‘सुभागी’ के बहाने दलित-सवर्ण विवाह के प्रेमचंद के सपनों को रेखांकित किया। साथ ही कहा कि कफन कहानी इस बात को सामने लाती है कि जिस समाज में भूख सामाजिक संबंधों से बड़ा सवाल हो जाए, वह समाज खुद पर कफन डालने को अभिशप्त है। 
विज्ञापन

प्रेमचंद की अमर कृति ‘सोजे वतन’ पर चर्चा के क्रम में पटना से आए प्रेमचंद के अध्येताआशुतोष पार्थेश्वर ने कहा, ‘सोजे-वतन’ की कहानियों के जरिए प्रेमचंद ने प्रस्तावित किया कि देश राजा से नहीं रियाया से बनता है। इन कहानियों में देश की प्रगति का झंडा अकेले पुरुष नहीं, बल्कि स्त्रियां भी बुलंद करती हैं। उन्होंने देश की पहचान को धर्म से नहीं जोड़ा। देश और देशभक्ति की जो कल्पना प्रस्तुत की, वह आज पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक है।
विज्ञापन


प्रो.एए फातमी ने कहा, सोजे वतन की कहानियां कलात्मक दृष्टि से भले ही महत्वपूर्ण न हों लेकिन जज्बे और अंतर्वस्तु के लिहाज से युगांतकारी है। उन्होंने प्रेमचंद के इलाहाबाद से गहरे रिश्तों को भी रेखांकित किया। प्रो.आलोक राय ने कहा, प्रेमचंद का महत्व उनकी महानता में नहीं बल्कि सहजता में है। शकील सिद्दीकी ने कहा, रशीद जहां ने सबसे पहले कफन कहानी का नाट्य रूपांतरण और मंचन किया। संचालन संतोष चतुर्वेदी ने किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


शुरुआत में कवि हरीशचंद्र पांडे ने लेखिका महाश्वेता देवी और तबला वादक लच्छू महाराज जबकि कवि नंदल हितैषी ने गजलकार सुरेश कुमार शेष के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ा। दो मिनट का मौन रखकर शांति प्रार्थना की गई। कार्यक्रम में जीपी मिश्र, रविकिरण जैन, प्रो.अनीता गोपेश, नीलम शंकर, अशफाक हुसैन, असरार गांधी, भारत भूषण जोशी, एमएन ओझा, सूर्यनारायण, संध्या नवोदिता अनिल भौमिक आदि मौजूद थे।

स्मृति पर्व की शुरुआत में वरिठ कथाकार दूधनाथ सिंह, रामजी राय, आलोक राय, संतोष भदौरिया आदि ने शकील सिद्दीकी की साहित्य भंडार से प्रकाशित दो पुस्तकों ‘रशीद जहां की संपूर्ण कहानियां’ और ‘औरत-कांटेवाला तथा अन्य नाटक’ का लोकार्पण किया। प्रो.संतोष भदौरिया ने पुस्तकों का परिचय देते हुए रशीद जहां के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। अनुवादक और संपादक शकील सिद्दीकी ने पुस्तकों की रचना प्रक्रिया और शोध संदर्भों से परिचित कराते हुए उनकी प्रासंगिकता की चर्चा की। इसी क्रम में हितेश सिंह की ओर से संपादित पत्रिका प्रयाग-पथ के तीसरे अंक का भी लोकार्पण किया गया। 

स्वर्ग रंगमंडल की ओर से मुंशी प्रेमचंद के अमर किरदार विषयक संगोष्ठी में लोककलाविद् अतुल यदुवंशी ने समसामयिक संदर्भों में प्रेमचंद के किरदारों की पड़ताल की। सोनम सेठ ने कहा, प्रेमचंद की रचनाओं की प्रस्तुतियों में किरदारों को जीने के साथ हर बार उनके मर्म के माध्यम से संस्कारों की सीख मिली। नौटंकी के चर्चित कलाकार नीरज अग्रवाल ने कहा, पंच-परमेश्वर, बूढ़ी काकी व कफन में विभिन्न किरदारों को निभाते हुए उन पात्रों की मनोदशा को समझने की परख हुई। डॉ.अनुपम आनंद ने कहा, प्रेमचंद हमेशा प्रासंगिक  रहेंगे जबकि प्रवीण शेखर ने कहा, प्रेमचंद की रचनाओं को अन्य विधाओं के माध्यम से भी देखने की जरूरत है। संचालन धीरज अग्रवाल ने किया। चर्चा में सचिन केसरवानी, एजाज खान, गौरव बजाज आदि मौजूद थे। 

इसी क्रम में प्रतिबिंब संस्था की ओर से संस्था के स्थापना दिवस पर आशुतोष पांडेय लिखित एवं निर्देशित और आकाश अग्रवाल द्वारा अभिनीत हिंदी एकल नाटक एक्ट विदाउट लाइट का मंचन किया गया। प्रकाश परिकल्पना एवं संचालन निखिलेश मौर्य, शुभम पांडेय, अमित कुमार, ध्वनि संचालन चंकी बच्चन का रहा। मंजिल संस्था की ओर से भी मिंटो पार्क के पास बड़े भाई साहब नाटक का मंचन किया गया।


अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के युवा प्रकोष्ठ की ओर से एक कार्यक्रम में मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान की चर्चा की गई। वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव ने कहा, साहित्य के शहर में प्रेमचंद की स्मृतियों को सहेजने के लिए संस्थाओं की ओर से कोई पहल नहीं की गई। इस दौरान प्रदेश सरकार से प्रेमचंद के नाम से सड़क, चौराहा या स्मारक बनवाने की मांग की गई। संचालन महासचिव सुमित श्रीवास्तव और संयोजन पवन श्रीवास्तव ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed