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स्कूलों में लौटे शिक्षामित्र, पढ़ाई-लिखाई पटरी पर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 03 Aug 2017 02:00 AM IST
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में सात दिन के बाद बुधवार को रौनक लौट आई। शिक्षामित्र विद्यालयों में पहुंच गए। ज्यादातर विद्यालयों में शिक्षक पूरे रहे तो पढ़ाई भी तय समय से हुई। छात्र-छात्राओं को भोजन भी मिला। कई दिनों से ठप पड़े विद्यालय में अन्य काम भी निपटाए गए।
सर्वोच्च अदालत से 25 जुलाई को फैसला आने के बाद शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों ने विद्यालय जाना बंद कर दिया था। जिले में 3477 प्राथमिक विद्यालय एवं 1001 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तकरीबन 13500 शिक्षक तैनात हैं। इसमें से 3248 शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षक भी शामिल हैं। इनके अलावा 394 शिक्षामित्र भी हैं। फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, करछना, शंकरगढ़ आदि के ग्रामीण इलाकों में काफी विद्यालय ऐसे हैं, जो शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद जब शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना बंद कर दिया तब से पठन-पाठन प्रभावित रहा। कई विद्यालयों में ताले तक लटक गए थे।
मंगलवार को लखनऊ में शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से हुई वार्ता में 15 के भीतर समाधान का आश्वासन मिलने और मुख्यमंत्री द्वारा पठन-पाठन शुरू कराने का निर्देश मिलने के बाद बुधवार को शिक्षामित्र अपने-अपने विद्यालय पहुंचे। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि ज्यादातर विद्यालयों में शिक्षामित्र पहुंच गए और पढ़ाई भी हुई। उन्होंने बृहस्पतिवार से स्थिति और ठीक होने की उम्मीद जताई।
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शिक्षामित्रों के बुधवार से विद्यालय लौटने के बाद सचिव बेसिक शिक्षा संजय सिन्हा ने सभी बीएसए को विद्यालयों में पठन-पाठन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा है कि समायोजित शिक्षामित्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद विद्यालयों में शैक्षिक कार्य में व्यवधान की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा है कि शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचे और शैक्षिक कार्य किसी भी दशा में बाधित न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
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सर्वोच्च अदालत से 25 जुलाई को फैसला आने के बाद शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों ने विद्यालय जाना बंद कर दिया था। जिले में 3477 प्राथमिक विद्यालय एवं 1001 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तकरीबन 13500 शिक्षक तैनात हैं। इसमें से 3248 शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षक भी शामिल हैं। इनके अलावा 394 शिक्षामित्र भी हैं। फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, करछना, शंकरगढ़ आदि के ग्रामीण इलाकों में काफी विद्यालय ऐसे हैं, जो शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद जब शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना बंद कर दिया तब से पठन-पाठन प्रभावित रहा। कई विद्यालयों में ताले तक लटक गए थे।
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मंगलवार को लखनऊ में शिक्षामित्रों की मुख्यमंत्री से हुई वार्ता में 15 के भीतर समाधान का आश्वासन मिलने और मुख्यमंत्री द्वारा पठन-पाठन शुरू कराने का निर्देश मिलने के बाद बुधवार को शिक्षामित्र अपने-अपने विद्यालय पहुंचे। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि ज्यादातर विद्यालयों में शिक्षामित्र पहुंच गए और पढ़ाई भी हुई। उन्होंने बृहस्पतिवार से स्थिति और ठीक होने की उम्मीद जताई।
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शिक्षामित्रों के बुधवार से विद्यालय लौटने के बाद सचिव बेसिक शिक्षा संजय सिन्हा ने सभी बीएसए को विद्यालयों में पठन-पाठन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा है कि समायोजित शिक्षामित्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद विद्यालयों में शैक्षिक कार्य में व्यवधान की सूचना प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा है कि शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचे और शैक्षिक कार्य किसी भी दशा में बाधित न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।