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Allahabad University : इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्राएं बोलीं...कैंपस में अब वो बात नहीं

Wed, 24 Jul 2024 11:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 24 Jul 2024 11:07 AM IST
सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कैंपस पहुंच रहे हैं। यहां पर यूपी ही नहीं देश के कोने-कोने से छात्र पढ़ाई करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं। वह विवि के बारे में क्या सोचते हैं और कैसा माहौल चाहते हैं इस पर उनसे बातचीत की गई। 

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students of Allahabad University said...that thing is no longer there in the campus
इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूरब का ऑक्सफोर्ड...अपना इलाहाबाद विश्वविद्यालय। यहां छात्राएं जब दाखिला लेती हैं तो कपड़ों की पोटली के साथ ढेर सारी आशाएं और उम्मीदें भी बांधे चली आती हैं। मगर, जब माहौल अनुकूल नहीं मिलता तो उनकी धारणाएं ध्वस्त होने लगती हैं। उन्हें लगता है कि इस ऑक्सफोर्ड में अब वो वाली बात नहीं। साल-दो साल बिता चुकीं छात्राओं ने अनुभवों को साझा किया, नई छात्राओं को सलाह भी दी।

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मैं बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हूं। मुझे लगा था कि विश्वविद्यालय का इतना नाम है, पढ़ाई का बढ़िया माहौल मिलेगा। लेकिन, अनुभव बुरा रहा। पहले इसका हाल पता चल जाता तो दाखिला ही नहीं लेती। यहां पढ़ने के लिए कम, घूमने के लिए ज्यादा आते हैं। जिन्हें पढ़ना है, वह घर ही रहते हैं। -स्वाती साहनी

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मेरा यह आखिरी साल है। यूनिवर्सिटी की भव्यता देखकर दाखिला लिया था। पर, यहां की इमारतें जितनी अच्छी हैं, माहौल उतना ही खराब। नए विद्यार्थियों से यही कहूंगी कि शुरुआती दिनों में यहां की राजनीति के चक्कर में मत पड़िएगा। अपनी पढ़ाई पर फोकस रखना ही ठीक। -इशिता पांडेय

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में फाइन आर्ट्स की छात्रा हूं। कोर्स की तीन विधा हैं, पेंटिंग, स्कल्पचर और एप्लाइड। एप्लाइड में कोई शिक्षक नहीं है। सीनियर की मदद से कोर्स की पढ़ाई होती है। हफ्ते में लगभग एक क्लास हो पाती है। हर रोज टीचर आएं, पढ़ाएं तभी हम बेहतर कर पाएंगे। प्रिया शुक्ला

बीए मीडिया स्टडीज के दूसरे सेमेस्टर में हूं। यहां का माहौल अच्छा है, पढ़ाई भी। कक्षाओं का संचालन भी होता है। यह पाठ्यक्रम अच्छा है। बहुत कुछ यहां पर सीखने को मिलेेगा, क्योंकि दूसरे मीडिया संस्थानों के मुकाबले यहां अच्छी पढ़ाई होती है। अकर्षिता सिंह चौहान

यूनिवर्सिटी का माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्ती से कैंपस की स्थिति सुधरी है। हर विभाग में तकरीबन सभी रिक्त पदों पर भर्तियां भी हो चुकी हैं। कक्षाएं भी नियमित चल रही हैं। किसी छात्र-छात्रा को कोई शिकायत है तो उसे भी दूर कराएंगे। - प्रो. जया कपूर, पीआरओ, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी



 

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