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इविवि में छात्रसंघ बहाली के लिए छात्रनेताओं ने किया शांतिभोज
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Students led peace program for restoration of students' union at university
- फोटो : ALDCOMPACT
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प्रयागराज। छात्रसंघ बहाली के लिए अहिंसक रूप से चल रहे आंदोलन के 21 दिन पूरे होने पर छात्रों ने सोमवार को अनशन स्थल पर शांति भोज का आयोजन किया और शांति भोज का प्रसाद ग्रहण करते हुए आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की। इस दौरान तमाम सांसदों और गणमान्य व्यक्तियों को पत्र भेजकर उन्हें विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया गया।
छात्रसंघ को मुद्दा संसद में उठाने और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए धरने पर बैठे छात्रों ने कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे यश भारती से सम्मानित मनिंद्र मिश्र ने छात्रसंघ बहाली के लिए जारी छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का छात्रसंघ देश में काबिल राजनेताओं की पौधशाला रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रसंघ को समाप्त किए जाने का निर्णय अन्याय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अविनीश यादव एवं निवर्तमान उपमंत्री सत्यम सिंह सनी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि छात्रसंघ की बहाली जितनी शीघ्रता से करेंगे, विश्वविद्यालय के हित में उतना ही बेहतर होगा। धरने में छात्र नेता अखिलेश यादव, अदील हमजा, विवेकानंद पाठक, जिया कोनैन रिजवी, सत्येंद्र सिंह, राहुल क्रांति, प्रशांत समाजसेवी, अरविंद सरोज, सौरभ सिंह बंटी, आनंद सेंगर, दुर्गेश प्रताप सिंह, विशाल सिंह रिशु, अंकित द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन की ओर से डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर चार छात्र नेताओं का प्रवेश विश्वविद्यालय परिसर में रोकने के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है। हालांकि इन चारों छात्र नेताओं का प्रवेश इविवि प्रशासन ने पहले से ही प्रतिबंधित कर रखा है लेकिन विश्वविद्यालय में सुरक्षा कर्मियों की भारी-भरकम फौज इन्हें रोक पाने में नाकामयाब साबित हो रही है, सो अब जिला एवं पुलिस प्रशासन से मदद मांगी गई है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे कीओर से डीएम और एसएसपी को लिखे पत्र में कहा गया है कि अराजकता के तमाम मामलों में आरोपी छात्र नेता रोहित कुमार मिश्र, विक्रांत सिंह, अदील हमजा और अखिलेश यादव का प्रवेश विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिबंधित किया जा चुका है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि किसी भी कक्षा का छात्र न होने हुए भी ये विश्वविद्यालय परिसर में सिर मुड़वाना, श्राद्ध करना, परिसर को अशांत करना, भारतीय नीति रिवाजों एवं धार्मिक कर्मकांड का उपहास करना जैसे कृत्य कर रहे हैं और विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
इससे अराजकता एवं अपराधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। पत्र के जरिये अनुरोध किया गया है कि परिसर में इनके प्रवेश को वर्जित करते हुए प्रशासनिक आदेश जारी किया जाए। इसके अलावा भी चीफ प्रॉक्टर की ओर से डीएम-एसएसपी को पत्र भेजकर कुछ अन्य छात्रों के नाम दिए गए हैं और उन पर भी आरोप लगाया गया है कि वे कभी सिर मुड़वाकर तो कभी तेरही का भोज आयोजित करके विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
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छात्रसंघ को मुद्दा संसद में उठाने और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंचाने के लिए धरने पर बैठे छात्रों ने कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे यश भारती से सम्मानित मनिंद्र मिश्र ने छात्रसंघ बहाली के लिए जारी छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का छात्रसंघ देश में काबिल राजनेताओं की पौधशाला रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रसंघ को समाप्त किए जाने का निर्णय अन्याय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
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छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अविनीश यादव एवं निवर्तमान उपमंत्री सत्यम सिंह सनी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि छात्रसंघ की बहाली जितनी शीघ्रता से करेंगे, विश्वविद्यालय के हित में उतना ही बेहतर होगा। धरने में छात्र नेता अखिलेश यादव, अदील हमजा, विवेकानंद पाठक, जिया कोनैन रिजवी, सत्येंद्र सिंह, राहुल क्रांति, प्रशांत समाजसेवी, अरविंद सरोज, सौरभ सिंह बंटी, आनंद सेंगर, दुर्गेश प्रताप सिंह, विशाल सिंह रिशु, अंकित द्विवेदी आदि शामिल रहे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) प्रशासन की ओर से डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर चार छात्र नेताओं का प्रवेश विश्वविद्यालय परिसर में रोकने के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है। हालांकि इन चारों छात्र नेताओं का प्रवेश इविवि प्रशासन ने पहले से ही प्रतिबंधित कर रखा है लेकिन विश्वविद्यालय में सुरक्षा कर्मियों की भारी-भरकम फौज इन्हें रोक पाने में नाकामयाब साबित हो रही है, सो अब जिला एवं पुलिस प्रशासन से मदद मांगी गई है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे कीओर से डीएम और एसएसपी को लिखे पत्र में कहा गया है कि अराजकता के तमाम मामलों में आरोपी छात्र नेता रोहित कुमार मिश्र, विक्रांत सिंह, अदील हमजा और अखिलेश यादव का प्रवेश विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिबंधित किया जा चुका है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि किसी भी कक्षा का छात्र न होने हुए भी ये विश्वविद्यालय परिसर में सिर मुड़वाना, श्राद्ध करना, परिसर को अशांत करना, भारतीय नीति रिवाजों एवं धार्मिक कर्मकांड का उपहास करना जैसे कृत्य कर रहे हैं और विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर रहे हैं।
इससे अराजकता एवं अपराधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। पत्र के जरिये अनुरोध किया गया है कि परिसर में इनके प्रवेश को वर्जित करते हुए प्रशासनिक आदेश जारी किया जाए। इसके अलावा भी चीफ प्रॉक्टर की ओर से डीएम-एसएसपी को पत्र भेजकर कुछ अन्य छात्रों के नाम दिए गए हैं और उन पर भी आरोप लगाया गया है कि वे कभी सिर मुड़वाकर तो कभी तेरही का भोज आयोजित करके विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर रहे हैं।