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यूपीएससी के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों ने खोला मोर्चा
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Students demonstrated against UPSC
- फोटो : ALDCOMPACT
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सिविल सेवा चयन में हिंदी भाषी छात्रों के गिरते ग्राफ के विरोध में निकाली रैली
प्रधानमंत्री को प्रेषित किया ज्ञापन, परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जाने की मांग
प्रयागराज। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के चयन में हिंदी भाषा छात्रों का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। प्रतियोगी छात्रों का मानना है कि यूपीएससी की ओर से पिछले कुछ वर्षों में किए गए तमाम बदलावों के कारण ऐसा हो रहा है और यह हिंदी भाषी छात्रों के साथ अन्याय है। इसके विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्रों चंद्रशेखर आजाद पार्क से सिविल लाइंस सुभाष चौराहे तक रैली निकाली और प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की।
छात्रों का कहना है कि वर्ष 2010 के बाद यूपीपीएससी ने कई ऐसे बदलाव किए, जिनकी वजह से वर्तमान में हिंदी माध्यम का परिणाम महज एक फीसदी हो गया है। हिंदी माध्यम के साथ क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी से मानविकी विषय से स्नातक छात्रों की संख्या भी चयन में शून्य होती जा रही है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही वर्ष 2010 में 837 लोग साक्षात्कार में सम्मिलित हुए थे और अब परिणाम के स्तर पर विश्वविद्यालय भी शून्य होता जा रहा है।
रैली का नेतृत्व कर रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता रजनीश सिंह ‘रिशू’ ने कहा कि सरकार की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा है कि 812 में से 485 लोग हिंदी मातृभाषा से चयनित हो रहे हैं। यह भ्रम उत्पन्न करता है। हमें समझना होगा कि यहां मातृभाषा नहीं, बल्कि परीक्षा के माध्यम की बात हो रही है। चयन में हिंदी भाषी छात्रों एवं क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी का गिरता ग्राफ चिंताजनक है जबकि यह सरकार की विचारधारा को पोषित करने वाला और ग्रामीण युवाओं का बड़ा वर्ग भी है।
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इस मसले पर छात्रों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया, जिसके माध्यम से अभ्यर्थियों ने हिंदी माध्यम के परिणाम सुधार के साथ पूर्व में दिए गए अवसरों में हुई क्षति को पूर्ण करने एवं अभ्यर्थियों को पूरक अवसर दिए जाने की मांग की। इस दौरान आशुतोष मिश्र, भावेश, आलोक त्रिपाठी, अनिकेत सिंह, संगम, पीयूष, हर्षित, रिया सिंह, गार्गी शुक्ल, दिव्या सिंह, अनामिका सिंह, काजल, आकांक्षा आदि उपस्थित रहे।
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प्रधानमंत्री को प्रेषित किया ज्ञापन, परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जाने की मांग
प्रयागराज। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा के चयन में हिंदी भाषा छात्रों का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। प्रतियोगी छात्रों का मानना है कि यूपीएससी की ओर से पिछले कुछ वर्षों में किए गए तमाम बदलावों के कारण ऐसा हो रहा है और यह हिंदी भाषी छात्रों के साथ अन्याय है। इसके विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्रों चंद्रशेखर आजाद पार्क से सिविल लाइंस सुभाष चौराहे तक रैली निकाली और प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की।
छात्रों का कहना है कि वर्ष 2010 के बाद यूपीपीएससी ने कई ऐसे बदलाव किए, जिनकी वजह से वर्तमान में हिंदी माध्यम का परिणाम महज एक फीसदी हो गया है। हिंदी माध्यम के साथ क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी से मानविकी विषय से स्नातक छात्रों की संख्या भी चयन में शून्य होती जा रही है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही वर्ष 2010 में 837 लोग साक्षात्कार में सम्मिलित हुए थे और अब परिणाम के स्तर पर विश्वविद्यालय भी शून्य होता जा रहा है।
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रैली का नेतृत्व कर रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता रजनीश सिंह ‘रिशू’ ने कहा कि सरकार की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा है कि 812 में से 485 लोग हिंदी मातृभाषा से चयनित हो रहे हैं। यह भ्रम उत्पन्न करता है। हमें समझना होगा कि यहां मातृभाषा नहीं, बल्कि परीक्षा के माध्यम की बात हो रही है। चयन में हिंदी भाषी छात्रों एवं क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी का गिरता ग्राफ चिंताजनक है जबकि यह सरकार की विचारधारा को पोषित करने वाला और ग्रामीण युवाओं का बड़ा वर्ग भी है।
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इस मसले पर छात्रों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया, जिसके माध्यम से अभ्यर्थियों ने हिंदी माध्यम के परिणाम सुधार के साथ पूर्व में दिए गए अवसरों में हुई क्षति को पूर्ण करने एवं अभ्यर्थियों को पूरक अवसर दिए जाने की मांग की। इस दौरान आशुतोष मिश्र, भावेश, आलोक त्रिपाठी, अनिकेत सिंह, संगम, पीयूष, हर्षित, रिया सिंह, गार्गी शुक्ल, दिव्या सिंह, अनामिका सिंह, काजल, आकांक्षा आदि उपस्थित रहे।