प्रयागराज : राजर्षि मंडपम की तीसरी मंजिल से गिरकर दसवीं के छात्र की मौत, परिवार में मचा कोहराम
कोतवाली थाना क्षेत्र के बताशा मंडी के रहने वाले रजनीश वर्मा सोनारी का काम करते हैं। उनका बेटा हर्षित (15) झूंसी स्थित एक स्कूल में दसवीं का छात्र था। शुक्रवार की शाम करीब पांच बजे वह पड़ोस में रहने वाले अपने दोस्त अभिषेक के साथ क्रिकेट खेलने घर से निकला था।
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चंद्रलोक सिनेमा के सामने राजर्षि मंडपम की तीसरी मंजिल से गिरकर दसवीं के छात्र हर्षित वर्मा की मौत हो गई। हर्षित शुक्रवार की शाम अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। गेंद तीसरी मंजिल पर चली गई। गेंद को निकालने के लिए वह बांस बल्ली के सहारे चढ़ा। टीन पर पैर रखते ही वह नीचे गिर गया। घटना के बाद घर वाले बेसुध हैं।
कोतवाली थाना क्षेत्र के बताशा मंडी के रहने वाले रजनीश वर्मा सोनारी का काम करते हैं। उनका बेटा हर्षित (15) झूंसी स्थित एक स्कूल में दसवीं का छात्र था। शुक्रवार की शाम करीब पांच बजे वह पड़ोस में रहने वाले अपने दोस्त अभिषेक के साथ क्रिकेट खेलने घर से निकला था। दोनों मंडपम में खेल रहे थे। उसी समय गेंद तीसरी मंजिल पर चली गई। मंडपम बंद था, लेकिन दीवार के बगल में ही बांस बल्ली लगी थी।
हर्षित उसी के सहारे तीसरी मंजिल पर चढ़ गया। तीसरी मंजिल पर छत की जगह टीन लगे हुए हैं। हर्षित ने जैसे ही उस पर पैर रखा, टीन नीचे गिर गई और हर्षित भी। उसके साथी अभिषेक ने हर्षित को गिरते हुए नहीं देखा लेकिन, जोर की आवाज सुनी। वह सहम गया और चुपचाप घर चला गया। उसने किसी से कुछ नहीं बताया।
जब रात आठ बजे के बाद भी हर्षित घर नहीं पहुंचा तो परिजन ढूंढने लगे। मुहल्ले में इधर उधर ढूंढने के बाद वह अभिषेक के पास पहुंचे। वह बुरी तरह से डरा हुआ था। उसने पूरी घटना के बारे में बताया तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। अभिषेक और घर वालों को लेकर पुलिस मंडपम पहुंची। वहां हाल का ताला खुलवाया गया। अंदर हॉल में हर्षित पड़ा था। उसकी मौत हो चुकी थी। साउथ मलाका चौकी इंचार्ज राजेश सिंह ने बताया कि परिवार वालों ने किसी पर शक नहीं जताया है। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार को शव घर वालों के सुपुर्द कर दिया गया।
बेसुध हुए परिजन, सांत्वना देने वालों के भी आंसू निकले
हर्षित की मौत से परिवार वाले पूरी तरह से बेसुध हो गए है। मां नंदिनी और पिता रजनीश के आंसू नहीं रुक रहे हैं। हर्षित की बहन भी परिवार वालों से लिपटकर लगातार रो रही थी। 15 साल के बेटे की मौत पर रिश्तेदार क्या सांत्वना देते, घर वालों के आंसू देखकर वह भी बिलख पड़ते।