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मुद्दों से भटके, राष्ट्रवाद-जातिवाद पर अटके
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 02 Oct 2018 01:12 AM IST
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इविवि छात्रसंघ चुनाव के लिए सोमवार को छात्रसंघ भवन में आयोजित दक्षता भाषण में ज्यादातर प्रत्याशी मुद्दों से भटकते नजर आए। छात्र हितों से जुड़ी बातें कम हुईं और प्रत्याशी राष्ट्रवाद एवं जातिवाद पर ही अटके रह गए। कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी तो खुद चुनाव अधिकारी प्रो. आरके उपाध्याय को माइक संभालना पड़ा और कहना पड़ा कि दक्षता भाषण की गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी अपनी बात कहें। उन्हें चेतावनी तक देनी पड़ी की वीडियो रिकार्डिंग हो रही है, इसलिए संभलकर बोलें।
एबीवीपी से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अतेंद्र सिंह ने समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों के बारे में इशारों में कहा है कि हर बार लखनऊ में बैठे लोग इनका टिकट तय करते हैं और अध्यक्ष एवं महामंत्री पद के लिए केवल एक ही जाति के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा जाता है। अतेंद्र ने सैफई का नाम लेकर भी समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों पर निशाना साधा। कहा कि वह वर्ष 2012 से इविवि के छात्र हैं और ऐसे लोग उनसे हिसाब मांगते हैं, जिन्होंने दो विश्वविद्यालय में दो बसंत भी नहीं देखे। इस पर पलटवार करते हुए समाजवादी छात्रसभा से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी उदय प्रकाश यादव ने कहा कि जातिवाद का आरोप लगाने वाले एबीवीपी के लोग जरा ध्यान दें कि उनके यहां पांचों प्रमुख पदों पर किस जाति के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है। पार्टी इस बार उन लोगों को चुनाव लड़ा रही है, जो कुलपति के खिलाफ धरने पर बैठे छात्रों पर हमला करते हैं और इनके तीन बड़े नेता कुलपति के पास जाकर अपने प्रत्याशियों का चुनाव जिताने की मांग करते हैं।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आदर्श कुमार ने कहा कि वह किसी पार्टी से नहीं हैं और सरकार को बताना चाह रहे हैं कि वंदेमारतम् किसी का पेटेंट नहीं है। शर्म नहीं आती कि जिस राम का नाम लेकर सत्ता में आए, उस राम को अब तक तिरपाल में लपेटकर रखा है। वहीं, समाजवाद का नाम लेने वाले परिवारवाद पर उतारू हैं और उन्होंने लोहिया के विचारों को तिलांजलि दे रखी है। दक्षता भाषण में मंच पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, केके राय, लक्ष्मी शंकर ओझा, इंदु प्रकाश सिंह, कृष्णमूर्ति सिंह यादव, संजय तिवारी, हेमंत कुमार टुन्नू, अजीत यादव, दिनेश यादव, भूपेंद्र यादव, रोहित मिश्र, ऋचा सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष प्रो. आरके सिंह ने भी छात्रों को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन निर्वाचन अधिकारी प्रो. आरके उपाध्याय ने किया।
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दक्षता भाषण के दौरान छात्रसंघ भवन के सामने मैदान पर हजारों छात्रों की भीड़ इकट्ठा थी। कार्यक्रम की शुरुआत में ही दो प्रत्याशियों के समर्थक भिड़ गए और मैदान पर भगदड़ मच गई। हालांकि वहां बड़ी संख्या में मौजूद आरएएफ के जवानों ने हालात पर काबू पा लिया। कुछ देर बाद फिर से समर्थकों के बीच भिड़ंत हो गई और भगदड़ मच गई। इस पर सुरक्षाकर्मियों को लाठियां पटककर छात्रों को पीछे करना पड़ा। मंच से भी छात्रों से लगातार अपील की जाती रही कि शांति बनाए रखें।
दक्षता भाषण के मद्देनजर इविवि परिसर में सुरक्षा के जबर्दस्त इंतजार किए गए थे। बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रही। दक्षता भाषण शुरू होने से पहले वहां डीएम सुहास एलवाई और एसएसपी नितिन तिवारी भारी फोर्स के साथ पहुंचे। उन्होंने इविवि प्रशासन के अफसरों से सुरक्षा को लेकर बातचीत की और इसके बाद कार्यक्रम शुरू हुआ।
दक्षता भाषण के दौरान छात्रसंघ भवन के सामने मैदान पर समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों का बैनर लहराते रहे और पम्फलेट भी उड़ाते रहे। परिसर के भीतर और बाहर सड़क पम्फलेट से पट गई। मंच से कई बार चेतावनी दी गई कि समर्थक अपने-अपने बैनर नीचे कर लें, क्योंकि पीछे खड़े छात्र-छात्राएं मंच तक नहीं देख पा रहे हैं। हालांकि उनकी चेतावनी का कोई असर नहीं पड़ा और वहां अफरातफरी की स्थिति बनी रही।
दक्षता भाषण की शुरुआत में माइक और लाउडस्पीकर की संख्या कम होने पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह और निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव भड़क गए। भीषण बीच में ही रोक दिया गया। छात्रनेताओं का कहना है कि माइक और लाउडस्पीकर की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि पीछे खड़े छात्र-छात्राओं तक आवाज नहीं पहुंच रही है। इसके बाद आवाज तेज की गई।
दक्षता भाषण के दौरान इस बार बम नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मर फटा। छात्रसंघ प्रवेश द्वार के बाहर सड़क पर लगा ट्रांसफार्मर दक्षता भाषण के दौरान दो बार फटा। अचानक तेज आवाज आते ही सुरक्षा कर्मी चौकन्ने हो गए। चर्चा होने लगी कि बम फट गया है लेकिन कुछ ही देर में स्थिति सामान्य हो गई।
इस बार इविवि प्रशासन ने प्रत्याशियों को केपीयूसी के सामने वाले गेट से प्रवेश करने के लिए कहा था, लेकिन प्रत्याशियों ने परंपरा के अनुरूप छात्रसंघ के गेट से ही समर्थकों के साथ परिसर में प्रवेश किया गया। इस बार मंच से कई बार कहा गया कि प्रत्याशी केपीयूसी के सामने वाले गेट से आए लेकिन सभी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ छात्रसंघ गेट से ही परिसर में पहुंचे। समर्थक अपने प्रत्याशियों को कंधे पर उठाए ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस की शक्ल में नाचते, गाते परिसर में पहुंचे। छात्रों में जबर्दस्त उत्साह दिखाई दिया। प्रत्याशियों के भाषण के दौरान पूरा परिसर लगातार तालियों की आवाज से गूंजता रहा।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
इस बार संघर्ष के नाम पर होगा चुनाव
‘इस बार चुनाव संघर्ष के नाम पर होगा। मैंने कुलपति की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई। हॉस्टल वॉश आउट का विरोध किया और वॉश आउट नहीं होने दिया। नतीजत मुझे जेल जाना पड़ा। चुनाव जीता को कुलपति को यहां रहने नहीं दूंगा। 25 नवंबर 2015 में डेलीगेसी के छात्रों के लिए रूम रेंट के मामले में आंदोलन किया और जेल जाना पड़ा। हर मोर्चे पर छात्रों के लिए लड़ाई लड़ी। अध्यक्ष बना तो महिला छात्रावास में सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करूंगा और छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को कैंप लगवाकर आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दिलाऊंगा।’ उदय प्रकाश यादव
खेल की बेहतरी के लिए होगा काम
‘देश को जब भी जरूरत पड़ी तो इविवि ने एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया। विश्वविद्यालय को ऐसे ही एक और आंदोलन की जरूरत है। मैं यूपी अंडर-16 क्रिकेट प्रतियोगिता का खिलाड़ी रहा हूं। अगर अध्यक्ष पद का चुनाव जीतता हूं तो डीएसडब्लयू कार्यालय से स्पोर्ट्स बोर्ड को अलग कराऊंगा। यहां दूर-दराज के गावों से छात्र रोज पढ़ने आते हैं। कोई किसान का बेटा तो बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। कोशिश होगी कि बसों में छात्रों को मुफ्त यात्रा की सुविधा मुहैया कराई जा सके। इसके अलावा छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर प्रयास किए जाएंगे।’ अंतेंद्र सिंह
छात्रों के आईकार्ड को मिले बस पास का दर्जा
‘इविवि में रैंकिंग तेजी से गिर रही है। विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में मकड़ियों के जाले लगे हैं। जब भी छात्र समस्याओं की बात होती है, आइसा सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। छात्रों से जुड़ा कोई भी मुद्दा हो, आंदोलन की अगुवाई हमेशा से संगठन के प्रतिनिधि करते रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। कुलपति पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इसमें ढेरों सुधार की जरूरत है। अध्यक्ष चुना गया तो पूरा प्रयास होगा कि छात्रों के आईकार्ड को बस पास घोषित किया जाए।’ शैलेश कुमार पासवान
फिर चलेगी इविवि की बंद पड़ी घड़ी
‘मैं किसी पार्टी, संगठन या पैनल ने नहीं जुड़ा हूं। मैं एमए का सामान्य छात्र हूं। एक आम छात्र के रूप में पूर्व में हुए दक्षता भाषण में प्रत्याशियों को झूठे वादे करते सुना है और वादों को कभी पूरा न होते हुए भी देखा है। प्रोफेसर क्लास नहीं लेते। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रैंकिंग डेढ़ सौ के पायदान पर पहुंच गई है। छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता को विश्वविद्यालय की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों की इंट्री परिसर में बैन होगी, चाहे वो कोई भी हो। एंबुलेंस की व्यवस्था होगी, गुणवत्ता वाली कैंटीन होगी, इविवि में सीनेट हाल की बंद पड़ी घड़ी फिर चलेगी’ आदर्श कुमार ‘तिरूपाठी’
मेरी जाति कलम और किताब है
‘मैं किसान का बेटा हूं। मेरी जाति कलम और किताब है। छात्रों के लिए संघर्ष में तीन बार जेल गया। मैं इविवि को अपनी मां और छात्रावास को अपना परिवार मानता हूं। विश्वविद्यालय में जब एक शोध छात्र ने आत्महत्या की तो मैंने मुखाग्नि दी। छात्रावास वॉश आउट और लाइब्रेरी में किताबों के मुद्दे पर लंबे समय तक संघर्ष किया। चुनाव जीता को छात्रावास की सुविधा को बेहतर बनाने और सेंट्रल लाइब्रेरी से हर छात्र को किताब दिलवाने का प्रयास होगा।’ कुंवर साहब सिंह
विज्ञान संकाय में कैंपस इंटरव्यू के लिए होगा प्रयास
‘लोग जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर चुनाव लड़ते हैं लेकिन मैं केवल छात्र हित के नाम पर चुनाव लड़ रहा हूं। चुनाव जीता को पहला प्रयास होगा कि महिला छात्रावास का गेट कम से कम रात 11 बजे तक खुला रहे। सेंट्रल लाइब्रेरी का संचालन सुचारु रूप से किया जाएगा, इसका भी पूरा प्रयास होगा। विज्ञान संकाय में कैंपस इंटरव्यू हो और छात्र-छात्राओं को रोजगार मिले, इसका प्रयास भी होगा। कैंटीन की बेहतर व्यवस्था और महिला छात्रावास में हॉस्पिटल का इंतजाम करना भी मेरी प्राथमिकता में शामिल है।’ रजनीश तिवारी ‘नंदन’
घटिया शिक्षा नीति से छात्र-छात्राओं का शोषण
‘केंद्र सरकार ने देश की कृषि और शिक्षा नीति को घटिया बनाकर रख दिया है। इसके जरिये छात्र-छात्राओं की भलाई नहीं, बल्कि शोषण किया जा रहा है। आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओ का भी शोषण किया जा रहा है। अगर मैं अध्यक्ष चुना गया तो वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करूंगा। मेरी लड़ाई केवल किसाब-कॉपी तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हरिजन वर्ग के लोगों के लिए भी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटूंगा।’ सूरज कुमार हरिजन ‘बौद्ध’
उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी
दो करोड़ तो दूर, दो लाख को भी नहीं मिलेगा रोजगार
‘वर्ष 2014 में सत्ता में आई सरकार ने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन दो लाख लोगों को भी रोजगार नहीं मिला। डिजिटल इंडिया की बात करते हैं और परीक्षाओं के पेपर आउट होने से नहीं रोक पाते। इविवि में छात्राओं से छेड़खानी की घटना आम हो चुकी है। चुनाव जीता तो छात्राओं से छेड़खानी करने वालों को परिसर से खदेड़ा जाएगा। मैं हॉकी का खिलाड़ी हूं और इविवि में खेल के क्षेत्र में भी बहुत कुछ करना है।’ अखिलेश यादव
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छात्राओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था होगी बेहतर
‘चुनाव जीता को इविवि का इतिहास बदल दूंगा। छात्राओं के लिए सुरक्षा की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। हॉस्टल में एटीएम की व्यवस्था हो, इसके लिए प्रयास होगा। कुलपति को भी सावधान हो जाना चाहिए। छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। पूरा प्रयास होगा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय को खोया हुआ गौरव वापस लाया जा सके। इसके लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ी जाएगी। केवल छात्रों के समर्थन की जरूरत है।’ मुनेश कुमार ‘सरोज’
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अब छात्र तय करेंगे सरकार का भविष्य
‘छात्र हितों के लिए लड़ने को तत्पर हूं। बदलाव का समय आ गया है। मेरी लड़ाई उन अफसरों के खिलाफ है, जिन्होंने इविवि का लॉन्चिंग पैड बना दिया है। मैं सामान्य छात्र हूं और आपके लिए संघर्ष कर रहा हूं। सरकार ने दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी। सरकार ने क्या किया, यह सब जानते हैं और अब छात्र ही सरकार का भविष्य तय करेंगे। चुनाव का परिणाम कुछ भी हो, मैं हमेशा छात्रों के साथ उनके संघर्ष में शामिल रहूंगा।’ नितेश सिंह ‘राजपूत’
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नियमित रूप से होगा कैंपस चयन
‘यह छात्रसंघ का चुनाव है, किसी पार्टी या संगठन का चुनाव नहीं है। मैं अन्य प्रत्याशियों की तरह वादों की झड़ी नहीं लगाऊंगा और न ही जाति, धर्म की बात करूंगा। वादे हर साल किए जाते हैं और तोड़ दिए जाते हैं। मैं केवल एक वादा करना चाहता हूं कि हमेशा छात्रों के साथ खड़ा रहूंगा। चुनाव जीता को पूरा प्रयास होगा कि कैंपस चयन नियमित रूप से कराए जाएं, यहां बड़ी-बड़ी कंपनियां आएं और छात्र-छात्राओं को रोजगार मिल सके।’ सचिन शर्मा ‘पंडित’
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बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर खुलेगा
‘दूसरे जिलों से तमाम गरीब परिवारों के छात्र अपने मां-बाप की उम्मीदें पूरी करने यहां आते हैं। मैं भी इन्हीं उम्मीदों के साथ यहां आया था लेकिन विश्वविद्यालय में सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। उपाध्यक्ष बना तो चुनाव जीता को बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर खुलेगा। प्रत्येक छात्र को लाइब्रेरी से किसाबें मिलेंगी, प्रयोगशालाओं में सुधार किया जाएगा और परिसर में नया इंकलाब होगा। छात्रों की यही जरूरत है और इसे पूरा करने का हर संभव प्रयास करूंगा।’ संदीप कुमार ‘प्रॉक्टर’
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सबसके पास बड़े झंडे, मेरे पास कई एजेंडे
‘मैं ऐसे समाज से आता हूं, जिसे हमेशा पीछे रखा गया। मैं यहां मुख्य धारा में शामिल होने आया हूं। अगर चुनाव जीता को विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई आदिवासी छात्र उपाध्यक्ष बनेगा। अन्य प्रत्याशियों के पास बड़े झंडे हैं लेकिन मेरे पास कई बड़े एजेंडे हैं। उपाध्यक्ष बना तो सबसे पहले आंबेडकर प्रतिमा को बैरिकेडिंग से आजाद कराऊंगा। साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बंद पड़ी घड़ी भी बनवाई जाएगी।’ विकास कुमार कोल ‘किंग’
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छात्रों को मिलेगी सब्सिडी युक्त कैंटीन की सुविधा
‘मैं एबीवीपी से हूं और चुनाव में छात्रों से समर्थन मांगने आया हूं। छात्र हित के लिए कई आंदोलनों में मैंने अग्रणी भूमिका निभाई है। चुनाव जीतने पर सब्सिडी युक्त कैंटीन और मेस मेरी प्राथमिकता होगी। महिला छात्रावास को दो एंबुलेंस मिले, छात्रावास का गेट रात 12 बजे तक खुला रहे, बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर फिर से खुले, इसके लिए भी पूरा प्रयास किया जाएगा। लेकिन यह सब पूरा करने के लिए मुझे छात्रों का वोट और सपोर्ट चाहिए।’ विरेंद्र सिंह चौहान
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एबीवीपी से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अतेंद्र सिंह ने समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों के बारे में इशारों में कहा है कि हर बार लखनऊ में बैठे लोग इनका टिकट तय करते हैं और अध्यक्ष एवं महामंत्री पद के लिए केवल एक ही जाति के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा जाता है। अतेंद्र ने सैफई का नाम लेकर भी समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों पर निशाना साधा। कहा कि वह वर्ष 2012 से इविवि के छात्र हैं और ऐसे लोग उनसे हिसाब मांगते हैं, जिन्होंने दो विश्वविद्यालय में दो बसंत भी नहीं देखे। इस पर पलटवार करते हुए समाजवादी छात्रसभा से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी उदय प्रकाश यादव ने कहा कि जातिवाद का आरोप लगाने वाले एबीवीपी के लोग जरा ध्यान दें कि उनके यहां पांचों प्रमुख पदों पर किस जाति के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है। पार्टी इस बार उन लोगों को चुनाव लड़ा रही है, जो कुलपति के खिलाफ धरने पर बैठे छात्रों पर हमला करते हैं और इनके तीन बड़े नेता कुलपति के पास जाकर अपने प्रत्याशियों का चुनाव जिताने की मांग करते हैं।
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अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आदर्श कुमार ने कहा कि वह किसी पार्टी से नहीं हैं और सरकार को बताना चाह रहे हैं कि वंदेमारतम् किसी का पेटेंट नहीं है। शर्म नहीं आती कि जिस राम का नाम लेकर सत्ता में आए, उस राम को अब तक तिरपाल में लपेटकर रखा है। वहीं, समाजवाद का नाम लेने वाले परिवारवाद पर उतारू हैं और उन्होंने लोहिया के विचारों को तिलांजलि दे रखी है। दक्षता भाषण में मंच पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, केके राय, लक्ष्मी शंकर ओझा, इंदु प्रकाश सिंह, कृष्णमूर्ति सिंह यादव, संजय तिवारी, हेमंत कुमार टुन्नू, अजीत यादव, दिनेश यादव, भूपेंद्र यादव, रोहित मिश्र, ऋचा सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष प्रो. आरके सिंह ने भी छात्रों को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन निर्वाचन अधिकारी प्रो. आरके उपाध्याय ने किया।
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दक्षता भाषण के दौरान छात्रसंघ भवन के सामने मैदान पर हजारों छात्रों की भीड़ इकट्ठा थी। कार्यक्रम की शुरुआत में ही दो प्रत्याशियों के समर्थक भिड़ गए और मैदान पर भगदड़ मच गई। हालांकि वहां बड़ी संख्या में मौजूद आरएएफ के जवानों ने हालात पर काबू पा लिया। कुछ देर बाद फिर से समर्थकों के बीच भिड़ंत हो गई और भगदड़ मच गई। इस पर सुरक्षाकर्मियों को लाठियां पटककर छात्रों को पीछे करना पड़ा। मंच से भी छात्रों से लगातार अपील की जाती रही कि शांति बनाए रखें।
दक्षता भाषण के मद्देनजर इविवि परिसर में सुरक्षा के जबर्दस्त इंतजार किए गए थे। बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रही। दक्षता भाषण शुरू होने से पहले वहां डीएम सुहास एलवाई और एसएसपी नितिन तिवारी भारी फोर्स के साथ पहुंचे। उन्होंने इविवि प्रशासन के अफसरों से सुरक्षा को लेकर बातचीत की और इसके बाद कार्यक्रम शुरू हुआ।
दक्षता भाषण के दौरान छात्रसंघ भवन के सामने मैदान पर समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों का बैनर लहराते रहे और पम्फलेट भी उड़ाते रहे। परिसर के भीतर और बाहर सड़क पम्फलेट से पट गई। मंच से कई बार चेतावनी दी गई कि समर्थक अपने-अपने बैनर नीचे कर लें, क्योंकि पीछे खड़े छात्र-छात्राएं मंच तक नहीं देख पा रहे हैं। हालांकि उनकी चेतावनी का कोई असर नहीं पड़ा और वहां अफरातफरी की स्थिति बनी रही।
दक्षता भाषण की शुरुआत में माइक और लाउडस्पीकर की संख्या कम होने पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह और निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव भड़क गए। भीषण बीच में ही रोक दिया गया। छात्रनेताओं का कहना है कि माइक और लाउडस्पीकर की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि पीछे खड़े छात्र-छात्राओं तक आवाज नहीं पहुंच रही है। इसके बाद आवाज तेज की गई।
दक्षता भाषण के दौरान इस बार बम नहीं, बल्कि ट्रांसफार्मर फटा। छात्रसंघ प्रवेश द्वार के बाहर सड़क पर लगा ट्रांसफार्मर दक्षता भाषण के दौरान दो बार फटा। अचानक तेज आवाज आते ही सुरक्षा कर्मी चौकन्ने हो गए। चर्चा होने लगी कि बम फट गया है लेकिन कुछ ही देर में स्थिति सामान्य हो गई।
इस बार इविवि प्रशासन ने प्रत्याशियों को केपीयूसी के सामने वाले गेट से प्रवेश करने के लिए कहा था, लेकिन प्रत्याशियों ने परंपरा के अनुरूप छात्रसंघ के गेट से ही समर्थकों के साथ परिसर में प्रवेश किया गया। इस बार मंच से कई बार कहा गया कि प्रत्याशी केपीयूसी के सामने वाले गेट से आए लेकिन सभी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ छात्रसंघ गेट से ही परिसर में पहुंचे। समर्थक अपने प्रत्याशियों को कंधे पर उठाए ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस की शक्ल में नाचते, गाते परिसर में पहुंचे। छात्रों में जबर्दस्त उत्साह दिखाई दिया। प्रत्याशियों के भाषण के दौरान पूरा परिसर लगातार तालियों की आवाज से गूंजता रहा।
अध्यक्ष पद के प्रत्याशी
इस बार संघर्ष के नाम पर होगा चुनाव
‘इस बार चुनाव संघर्ष के नाम पर होगा। मैंने कुलपति की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई। हॉस्टल वॉश आउट का विरोध किया और वॉश आउट नहीं होने दिया। नतीजत मुझे जेल जाना पड़ा। चुनाव जीता को कुलपति को यहां रहने नहीं दूंगा। 25 नवंबर 2015 में डेलीगेसी के छात्रों के लिए रूम रेंट के मामले में आंदोलन किया और जेल जाना पड़ा। हर मोर्चे पर छात्रों के लिए लड़ाई लड़ी। अध्यक्ष बना तो महिला छात्रावास में सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करूंगा और छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को कैंप लगवाकर आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दिलाऊंगा।’ उदय प्रकाश यादव
खेल की बेहतरी के लिए होगा काम
‘देश को जब भी जरूरत पड़ी तो इविवि ने एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया। विश्वविद्यालय को ऐसे ही एक और आंदोलन की जरूरत है। मैं यूपी अंडर-16 क्रिकेट प्रतियोगिता का खिलाड़ी रहा हूं। अगर अध्यक्ष पद का चुनाव जीतता हूं तो डीएसडब्लयू कार्यालय से स्पोर्ट्स बोर्ड को अलग कराऊंगा। यहां दूर-दराज के गावों से छात्र रोज पढ़ने आते हैं। कोई किसान का बेटा तो बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है। कोशिश होगी कि बसों में छात्रों को मुफ्त यात्रा की सुविधा मुहैया कराई जा सके। इसके अलावा छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर प्रयास किए जाएंगे।’ अंतेंद्र सिंह
छात्रों के आईकार्ड को मिले बस पास का दर्जा
‘इविवि में रैंकिंग तेजी से गिर रही है। विश्वविद्यालय के सेमिनार हॉल में मकड़ियों के जाले लगे हैं। जब भी छात्र समस्याओं की बात होती है, आइसा सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। छात्रों से जुड़ा कोई भी मुद्दा हो, आंदोलन की अगुवाई हमेशा से संगठन के प्रतिनिधि करते रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। कुलपति पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इसमें ढेरों सुधार की जरूरत है। अध्यक्ष चुना गया तो पूरा प्रयास होगा कि छात्रों के आईकार्ड को बस पास घोषित किया जाए।’ शैलेश कुमार पासवान
फिर चलेगी इविवि की बंद पड़ी घड़ी
‘मैं किसी पार्टी, संगठन या पैनल ने नहीं जुड़ा हूं। मैं एमए का सामान्य छात्र हूं। एक आम छात्र के रूप में पूर्व में हुए दक्षता भाषण में प्रत्याशियों को झूठे वादे करते सुना है और वादों को कभी पूरा न होते हुए भी देखा है। प्रोफेसर क्लास नहीं लेते। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की रैंकिंग डेढ़ सौ के पायदान पर पहुंच गई है। छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता को विश्वविद्यालय की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों की इंट्री परिसर में बैन होगी, चाहे वो कोई भी हो। एंबुलेंस की व्यवस्था होगी, गुणवत्ता वाली कैंटीन होगी, इविवि में सीनेट हाल की बंद पड़ी घड़ी फिर चलेगी’ आदर्श कुमार ‘तिरूपाठी’
मेरी जाति कलम और किताब है
‘मैं किसान का बेटा हूं। मेरी जाति कलम और किताब है। छात्रों के लिए संघर्ष में तीन बार जेल गया। मैं इविवि को अपनी मां और छात्रावास को अपना परिवार मानता हूं। विश्वविद्यालय में जब एक शोध छात्र ने आत्महत्या की तो मैंने मुखाग्नि दी। छात्रावास वॉश आउट और लाइब्रेरी में किताबों के मुद्दे पर लंबे समय तक संघर्ष किया। चुनाव जीता को छात्रावास की सुविधा को बेहतर बनाने और सेंट्रल लाइब्रेरी से हर छात्र को किताब दिलवाने का प्रयास होगा।’ कुंवर साहब सिंह
विज्ञान संकाय में कैंपस इंटरव्यू के लिए होगा प्रयास
‘लोग जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर चुनाव लड़ते हैं लेकिन मैं केवल छात्र हित के नाम पर चुनाव लड़ रहा हूं। चुनाव जीता को पहला प्रयास होगा कि महिला छात्रावास का गेट कम से कम रात 11 बजे तक खुला रहे। सेंट्रल लाइब्रेरी का संचालन सुचारु रूप से किया जाएगा, इसका भी पूरा प्रयास होगा। विज्ञान संकाय में कैंपस इंटरव्यू हो और छात्र-छात्राओं को रोजगार मिले, इसका प्रयास भी होगा। कैंटीन की बेहतर व्यवस्था और महिला छात्रावास में हॉस्पिटल का इंतजाम करना भी मेरी प्राथमिकता में शामिल है।’ रजनीश तिवारी ‘नंदन’
घटिया शिक्षा नीति से छात्र-छात्राओं का शोषण
‘केंद्र सरकार ने देश की कृषि और शिक्षा नीति को घटिया बनाकर रख दिया है। इसके जरिये छात्र-छात्राओं की भलाई नहीं, बल्कि शोषण किया जा रहा है। आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओ का भी शोषण किया जा रहा है। अगर मैं अध्यक्ष चुना गया तो वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करूंगा। मेरी लड़ाई केवल किसाब-कॉपी तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हरिजन वर्ग के लोगों के लिए भी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटूंगा।’ सूरज कुमार हरिजन ‘बौद्ध’
उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी
दो करोड़ तो दूर, दो लाख को भी नहीं मिलेगा रोजगार
‘वर्ष 2014 में सत्ता में आई सरकार ने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन दो लाख लोगों को भी रोजगार नहीं मिला। डिजिटल इंडिया की बात करते हैं और परीक्षाओं के पेपर आउट होने से नहीं रोक पाते। इविवि में छात्राओं से छेड़खानी की घटना आम हो चुकी है। चुनाव जीता तो छात्राओं से छेड़खानी करने वालों को परिसर से खदेड़ा जाएगा। मैं हॉकी का खिलाड़ी हूं और इविवि में खेल के क्षेत्र में भी बहुत कुछ करना है।’ अखिलेश यादव
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छात्राओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था होगी बेहतर
‘चुनाव जीता को इविवि का इतिहास बदल दूंगा। छात्राओं के लिए सुरक्षा की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा। हॉस्टल में एटीएम की व्यवस्था हो, इसके लिए प्रयास होगा। कुलपति को भी सावधान हो जाना चाहिए। छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। पूरा प्रयास होगा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय को खोया हुआ गौरव वापस लाया जा सके। इसके लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ी जाएगी। केवल छात्रों के समर्थन की जरूरत है।’ मुनेश कुमार ‘सरोज’
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अब छात्र तय करेंगे सरकार का भविष्य
‘छात्र हितों के लिए लड़ने को तत्पर हूं। बदलाव का समय आ गया है। मेरी लड़ाई उन अफसरों के खिलाफ है, जिन्होंने इविवि का लॉन्चिंग पैड बना दिया है। मैं सामान्य छात्र हूं और आपके लिए संघर्ष कर रहा हूं। सरकार ने दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी। सरकार ने क्या किया, यह सब जानते हैं और अब छात्र ही सरकार का भविष्य तय करेंगे। चुनाव का परिणाम कुछ भी हो, मैं हमेशा छात्रों के साथ उनके संघर्ष में शामिल रहूंगा।’ नितेश सिंह ‘राजपूत’
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नियमित रूप से होगा कैंपस चयन
‘यह छात्रसंघ का चुनाव है, किसी पार्टी या संगठन का चुनाव नहीं है। मैं अन्य प्रत्याशियों की तरह वादों की झड़ी नहीं लगाऊंगा और न ही जाति, धर्म की बात करूंगा। वादे हर साल किए जाते हैं और तोड़ दिए जाते हैं। मैं केवल एक वादा करना चाहता हूं कि हमेशा छात्रों के साथ खड़ा रहूंगा। चुनाव जीता को पूरा प्रयास होगा कि कैंपस चयन नियमित रूप से कराए जाएं, यहां बड़ी-बड़ी कंपनियां आएं और छात्र-छात्राओं को रोजगार मिल सके।’ सचिन शर्मा ‘पंडित’
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बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर खुलेगा
‘दूसरे जिलों से तमाम गरीब परिवारों के छात्र अपने मां-बाप की उम्मीदें पूरी करने यहां आते हैं। मैं भी इन्हीं उम्मीदों के साथ यहां आया था लेकिन विश्वविद्यालय में सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। उपाध्यक्ष बना तो चुनाव जीता को बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर खुलेगा। प्रत्येक छात्र को लाइब्रेरी से किसाबें मिलेंगी, प्रयोगशालाओं में सुधार किया जाएगा और परिसर में नया इंकलाब होगा। छात्रों की यही जरूरत है और इसे पूरा करने का हर संभव प्रयास करूंगा।’ संदीप कुमार ‘प्रॉक्टर’
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सबसके पास बड़े झंडे, मेरे पास कई एजेंडे
‘मैं ऐसे समाज से आता हूं, जिसे हमेशा पीछे रखा गया। मैं यहां मुख्य धारा में शामिल होने आया हूं। अगर चुनाव जीता को विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई आदिवासी छात्र उपाध्यक्ष बनेगा। अन्य प्रत्याशियों के पास बड़े झंडे हैं लेकिन मेरे पास कई बड़े एजेंडे हैं। उपाध्यक्ष बना तो सबसे पहले आंबेडकर प्रतिमा को बैरिकेडिंग से आजाद कराऊंगा। साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बंद पड़ी घड़ी भी बनवाई जाएगी।’ विकास कुमार कोल ‘किंग’
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छात्रों को मिलेगी सब्सिडी युक्त कैंटीन की सुविधा
‘मैं एबीवीपी से हूं और चुनाव में छात्रों से समर्थन मांगने आया हूं। छात्र हित के लिए कई आंदोलनों में मैंने अग्रणी भूमिका निभाई है। चुनाव जीतने पर सब्सिडी युक्त कैंटीन और मेस मेरी प्राथमिकता होगी। महिला छात्रावास को दो एंबुलेंस मिले, छात्रावास का गेट रात 12 बजे तक खुला रहे, बंद पड़ा रेलवे रिजर्वेशन काउंटर फिर से खुले, इसके लिए भी पूरा प्रयास किया जाएगा। लेकिन यह सब पूरा करने के लिए मुझे छात्रों का वोट और सपोर्ट चाहिए।’ विरेंद्र सिंह चौहान