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अध्यात्म की गंगा में डुबकी लगाएंगे विदेशी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Jan 2017 01:40 AM IST
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माघ मेला
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पौष पूर्णिमा (12 जनवरी) से आरंभ होने वाले माघ मेले में अबकी विदेशी सैलानियों का भी जमावड़ा होगा। कई संतों के शिविरों में ठौर लेेने वाले विदेशी स्नान-ध्यान के अतिरिक्त योग के गुर भी सीखेंगे। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, चीन, जापान, ओमान, फिजी सहित दुनिया के कई मुल्कों के लोग संगमनगरी के संतों के संपर्क में हैं। वहीं संतों ने भी विदेशी भक्तों के लिए विशेष तैयारियां की हैं। उनके लिए अलग से शिविर बनाए जाएंगे।
कई देशों की यात्रा से लौटे गंगा सेना के प्रमुख स्वामी आनंद गिरि ने कहा कि विदेशी श्रद्धालुओं का एक दल 12 जनवरी को संगम क्षेत्र पहुंचेगा। इसमेेेेें न्यूजीलैंड एवं आस्ट्रेलिया के युवा शामिल हैं। मकर संक्रांति के बाद बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु आएंगे और माघ मास पर्यंत रुककर ध्यान और योग का अभ्यास करेंगे। इसी क्रम में क्रियायोग संस्थान, सच्चा बाबा आश्रम के शिविर में भी विदेशियों का जमावड़ा रहेगा।
संगमनोज के पास बनने वाले गंगा सेना के शिविर में विदेशी श्रद्धालुओं के लिए खास स्विस कॉटेज बनाई जाएगी, जहां उनके लिए खाने-रुकने की अलग व्यवस्था होगी। स्वामी आनंद गिरि के मुताबिक विदेशियों, खास कर यूरोपीय देशों में भारतीय संस्कृति को जानने की ललक बढ़ी है। वे भारत आना और यहां की परंपरा-संस्कृति से परिचित होना चाहते हैं। भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के लिए बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय भी अपने बच्चों संग आएंगे।
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कई देशों की यात्रा से लौटे गंगा सेना के प्रमुख स्वामी आनंद गिरि ने कहा कि विदेशी श्रद्धालुओं का एक दल 12 जनवरी को संगम क्षेत्र पहुंचेगा। इसमेेेेें न्यूजीलैंड एवं आस्ट्रेलिया के युवा शामिल हैं। मकर संक्रांति के बाद बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु आएंगे और माघ मास पर्यंत रुककर ध्यान और योग का अभ्यास करेंगे। इसी क्रम में क्रियायोग संस्थान, सच्चा बाबा आश्रम के शिविर में भी विदेशियों का जमावड़ा रहेगा।
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संगमनोज के पास बनने वाले गंगा सेना के शिविर में विदेशी श्रद्धालुओं के लिए खास स्विस कॉटेज बनाई जाएगी, जहां उनके लिए खाने-रुकने की अलग व्यवस्था होगी। स्वामी आनंद गिरि के मुताबिक विदेशियों, खास कर यूरोपीय देशों में भारतीय संस्कृति को जानने की ललक बढ़ी है। वे भारत आना और यहां की परंपरा-संस्कृति से परिचित होना चाहते हैं। भारतीय संस्कृति से जुड़ाव के लिए बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय भी अपने बच्चों संग आएंगे।
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