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आत्मा की मजबूती से ही दूर होगा तनाव
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 16 Oct 2016 02:06 AM IST
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इलाहाबाद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ता ब्रह्माकुमारी शिवानी का कहना है कि मनुष्य की प्रकृति शांत रहने की है लेकिन बाहर की परिस्थितियां अनुकूल न होने पर उसके मन को व्याकुल कर देती हैं। इससे तनाव बढ़ता है और मन में अच्छे बुरे का भाव उत्पन्न होने लगता है। मनुष्य को ऐसे भावों को अपने मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए तभी वह स्वाभाविक तौर पर शांत रह कर अपनी वास्तविक प्रकृति को बनाए रख सकता है।
प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र की ओर से शनिवार को सिविल लाइंस स्थित टूरिस्ट बंगला में आयोजित कार्यक्रम ‘खुशियां आपके दामन में’के तहत उन्होंने आत्मा की मजबूती पर जोर दिया। कहा, हमारी सारी समस्याओं के मूल में आत्मा की ताकत का कम होना है। हम अपने आप को बदलने के बजाए दूसरों को सुधारने में लगे रहते हैं। नतीजतन हम दिनोंदिन कमजोर होते रहते हैं। कई तरह की बीमारियां हमें घेर लेती हैं, जिनसे छुटकारा पाना आसान नहीं हैं। अनुकूल परिस्थितियों में खुशियां और विपरीत परिस्थितियों में मन में हलचल होना यानी दुखी होना स्वाभाविक है। प्रकृति के साथ अनुकूलन एवं सकारात्मक सोच से ही शांति पाई जा सकती है।
बहन शिवानी ने ध्यान करने के सरल उपाय भी सिखाए। हाल में मौजूद लोगों के सवालों के जवाब भी किए। शुरूआत में ब्रह्राकुमारीज की ओर से ब्रह्माकुमारी श्रद्धा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया । संचालन प्रियंवदा सिंह ने किया। न्यायमूर्ति वी.के.श्रीवास्तव, संगीता श्रीवास्तव, अधिवक्ता भूपेंद्र नाथ, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी, ब्रह्माकुमारी मनोरमा, सुधा, सुषमा आदि मौजूद थीं।
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सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है संगमनगरी
पहली बार शहर आईं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ता ब्रह्माकुमारी बहन शिवानी ने संगमनगरी को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बताया। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम आध्यात्मिकता के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। पुणे विश्वविद्यालय से बीटेक की टॉपर रहीं शिवानी ने ‘अमर उजाला’ से मुलाकात में कहा, मैंने कुछ छोड़ा नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका बदला है। अच्छे कर्म, ज्ञान, ध्यान, योग, दुआएं हासिल करने से आत्मा को मजबूती हासिल करनी होगी। इसी से तनाव दूर रहेगा।
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प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र की ओर से शनिवार को सिविल लाइंस स्थित टूरिस्ट बंगला में आयोजित कार्यक्रम ‘खुशियां आपके दामन में’के तहत उन्होंने आत्मा की मजबूती पर जोर दिया। कहा, हमारी सारी समस्याओं के मूल में आत्मा की ताकत का कम होना है। हम अपने आप को बदलने के बजाए दूसरों को सुधारने में लगे रहते हैं। नतीजतन हम दिनोंदिन कमजोर होते रहते हैं। कई तरह की बीमारियां हमें घेर लेती हैं, जिनसे छुटकारा पाना आसान नहीं हैं। अनुकूल परिस्थितियों में खुशियां और विपरीत परिस्थितियों में मन में हलचल होना यानी दुखी होना स्वाभाविक है। प्रकृति के साथ अनुकूलन एवं सकारात्मक सोच से ही शांति पाई जा सकती है।
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बहन शिवानी ने ध्यान करने के सरल उपाय भी सिखाए। हाल में मौजूद लोगों के सवालों के जवाब भी किए। शुरूआत में ब्रह्राकुमारीज की ओर से ब्रह्माकुमारी श्रद्धा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया । संचालन प्रियंवदा सिंह ने किया। न्यायमूर्ति वी.के.श्रीवास्तव, संगीता श्रीवास्तव, अधिवक्ता भूपेंद्र नाथ, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी, ब्रह्माकुमारी मनोरमा, सुधा, सुषमा आदि मौजूद थीं।
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सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है संगमनगरी
पहली बार शहर आईं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ता ब्रह्माकुमारी बहन शिवानी ने संगमनगरी को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बताया। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम आध्यात्मिकता के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। पुणे विश्वविद्यालय से बीटेक की टॉपर रहीं शिवानी ने ‘अमर उजाला’ से मुलाकात में कहा, मैंने कुछ छोड़ा नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका बदला है। अच्छे कर्म, ज्ञान, ध्यान, योग, दुआएं हासिल करने से आत्मा को मजबूती हासिल करनी होगी। इसी से तनाव दूर रहेगा।