गंगा दशहरा पर विशेष: सिमटती जा रही धारा, संगम पर घुटने भर जल में डुबकी लगा रहे श्रद्धालु
संगम पर जल स्तर इतना सिमट गया है कि लोग स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं। गंगा की इस दशा को लेकर साधु-संत और तीर्थ पुरोहितों ने चिंता जताई है। यहां माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा था, लेकिन अब संगम पर ही डुबकी लगाने भर के लिए जल नहीं रह गया है।
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गंगोत्री से गंगासागर तक करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार बनी जीवनदायिनी गंगा संगमनगरी में दुख की गठरी बनकर कराह रही है। धारा कई जगह सिमट गई है। प्रवाह कम होने से फाफामऊ से संगम के बीच कई जगह रेत के टापू मुंह चिढ़ा रहे हैं। हालत यह है कि संगम पर घुटने भर जल होने से लोग डुबकी तक नहीं लगा पा रहे हैं।
संगम पर गंगा का जल श्रद्धालुओं, तीर्थपुरोहितों, संतों की चिंता बढ़ गई है। तटवर्ती इलाकों में रेती पर फसलों की सिंचाई का भी संकट पैदा हो गया है। भूजल स्तर खिसकने की आशंका भी बढ़ गई है। समय रहते न्यूनतम प्रवाह की चिंता नहीं की गई तो तीर्थनगरी में संकट बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
प्रवाह कम होने से यह संकट पैदा हुआ है। साथ ही नालों से गंदा पानी बहाए जाने से मुक्तिदायिनी की धारा प्रदूषित हो रही है। माघ मेले के दौरान जहां गंगा में तेज प्रवाह की वजह से साधु-संतों के शिविरों के पास कटान हो गई थी और प्रवाह करीब तीन सौ मीटर के दायरे तक फैला नजर आ रहा था।
गंगा का जलस्तर कम होने पर बढ़ी तीर्थपुरोहितों की चिंता
संगम पर जल स्तर इतना सिमट गया है कि लोग स्नान भी नहीं कर पा रहे हैं। गंगा की इस दशा को लेकर साधु-संत और तीर्थ पुरोहितों ने चिंता जताई है। यहां माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा था, लेकिन अब संगम पर ही डुबकी लगाने भर के लिए जल नहीं रह गया है।
इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि गंगा में नरौरा और कानपुर बैराज से पानी न के बराबर छोड़ा जा रहा है। गंगा पर लंबे समय से काम कर रहे टीकरमाफी मठ के महंत स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी गंगा में जल न छोड़े जाने से नाराज हैं। उनका कहना है कि पर्वों पर ही पानी छोड़ा जा रहा है। जबकि, झूंसी, नैनी और फाफामऊ के सारे नाले खुलेआम गंगा में बहाए जा रहे हैं। इसे किसी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
जय त्रिवेणी जय प्रयाग संस्था के अध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने गंगा की इस दुर्दशा के विरोध में तीर्थ पुरोहितों, साधु-संतों से सड़क पर उतरने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि बांधों से जल नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
गंगा की दुर्दशा के लिए प्रशासन और संत दोनों जिम्मेदार: हरि चैतन्य
स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ने शनिवार को गंगा की दुर्दशा के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। कहा, सिर्फ झूठे हलफनामे कोर्ट मेंं पेश किए जा रहे हैं। कानपुर से लेकर प्रयागराज तक दो सौ से अधिक नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में बहाया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए साधु-संतों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अफसोस जताया कि पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद अपने प्रयाग प्रवास के दौरान सिर्फ हिंदू राष्ट्र पर परिचर्चा करते रहे। गंगा निर्मलीकरण के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। वह गंगा निर्मलीकरण का मुद्दा उठाते तो उनके पीछे पूरा शहर खड़ा हो सकता था। उन्होंने कहा कि गंगा के मुद्दे पर देश के शीर्ष संतों को चुप्पी तोड़नी चाहिए।
महाकुंभ में स्वच्छ जलधारा मुहैया कराने के लिए दाखिल करेंगे जनहित याचिका : वीसी श्रीवास्तव
हाईकोर्ट में गंगा निर्मलीकरण पर जनहित याचिका दाखिल करने वाले वकील वीसी श्रीवास्तव ने कहा कि वह गंगा में नालों को बहाने और प्रवाह कम होने का मुद्दा एनजीटी के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने बताया कि एक जुलाई को कोर्ट खुलने के साथ वह आगामी महाकुंभ में स्वच्छ गंगाजल की धारा उपलब्ध कराने के मामले पर अलग जनहित याचिका दाखिल करेंगे। इसके जरिए प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन से पूछा जाएगा कि वह महाकुंभ में स्वच्छ जलधारा मुहैया कराने की कार्य योजना प्रस्तुत करे।