फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   SP Rampur stranded in defiance of high court order

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर फंसे एसपी रामपुर

Sun, 05 Nov 2017 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 05 Nov 2017 01:30 AM IST
विज्ञापन
SP Rampur stranded in defiance of high court order
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
हाईकोर्ट के आदेश की न सिर्फ अवहेलना करने बल्कि आदेश की जानकारी देने पर हंसी उड़ाने के मामले में एसपी रामपुर बुरे फंस गए हैं। हाईकोर्ट ने इसकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी को सोमवार को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया है। उनको सीओ स्वार के साथ सुबह दस बजे अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि दोनों अधिकारी अपना शपथपत्र इलाहाबाद आकर ही बनवाएंगे। हाईकोर्ट ने महानिबंधक और एसएसपी इलाहाबाद को निर्देश दिया है कि उनके आदेश की तामील एसपी रामपुर को कराना सुनिश्चित करें।
विज्ञापन


एसपी और सीओ पर आरोप है कि उन्होंने दहेज हत्या के आरोपियों विनोद और अन्य की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने के बावजूद विनोद को गिरफ्तार कर लिया। याची के अधिवक्ता अश्वनी कुमार यादव ने जब टेलीफोन पर उनको हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि विनोद को किसी दूसरे मामले में जेल भेज देंगे। इतना ही नहीं अपर शासकीय अधिवक्ता आरडी सिंह ने फोन कर एसपी को आदेश की जानकारी दी तो उन्होंने हंसी उड़ाई।
विज्ञापन


याची विनोद के अधिवक्ता ने इस वाकये की जानकारी दो नवंबर को न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ में दी। अधिकारियों से वार्ता का पूरा ब्यौरा टेलीफोन नंबर और समय सहित कोर्ट को बताया गया। शासकीय अधिवक्ता ने भी एसपी से हुई बातचीत का पूरा ब्यौरा कोर्ट को बताया। उन्होंने बताया कि स्टे की जानकारी देने पर एसपी अवमाननापूर्ण तरीके से हंसे और कहा उनके पास कोर्ट केआदेश की प्रति नहीं है। जब बताया गया कि आदेश इंटरनेट पर अपलोड हो गया है तो उन्होंने कहा मेरा आईओ उसे देख लेगा। कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं ने जो बताया वह कानून के राज की जड़ों पर चोट करने वाली बात है। प्रथम दृष्टया दोनों अधिकारी सिविल और आपराधिक अवमानना के दोषी हैं। कोर्ट ने याची को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है तो संबंधित मजिस्ट्रेट बिना किसी जमानत या मुचलका लिए तत्काल रिहा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed