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Prayagraj : एक फीट लंबे पाइप से निकली शंख की आवाज, वर्मा सर की क्लास में विज्ञान के प्रयोगों ने किया हैरान

Mon, 28 Apr 2025 06:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 28 Apr 2025 06:32 PM IST
सार

कक्षा की शुरुआत एक फीट लंबे पाइप से शंख की आवाज निकालकर हुई। एक साधारण पाइप से शंख की आवाज निकलते देख छात्र हैरान दिखे। जिसके बाद एक छात्र को बुलाकर उस पाइप से शंख की आवाज निकालने को कहा गया। लेकिन आवाज की जगह पर केवल हवा की आवाज आ रही थी।

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Sound of conch shell came out from one feet long pipe, science experiments in Verma Sir's class surprised ever
मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास मेहता सभागार में आयोजित डॉ. एचसी वर्मा की पाठशाला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सभागार में अमर उजाला के ‘वर्मा सर की क्लास’ कार्यक्रम में विज्ञान के प्रयोगों ने छात्रों को हैरान कर दिया। कार्यक्रम में एक फीट लंबी पाइप के माध्यम से शंख की आवाज निकालकर दिखाया और एक डब्बा उठाने पर भारी और उसपर दूसरा रखने से हल्का होने के प्रयोग व अन्य प्रयोगों ने छात्रों को हैरान कर दिया।

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प्रयोग एक:

कक्षा की शुरुआत एक फीट लंबे पाइप से शंख की आवाज निकालकर हुई। एक साधारण पाइप से शंख की आवाज निकलते देख छात्र हैरान दिखे। जिसके बाद एक छात्र को बुलाकर उस पाइप से शंख की आवाज निकालने को कहा गया। लेकिन आवाज की जगह पर केवल हवा की आवाज आ रही थी।

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इसका जवाब देते हुए डॉ. रंजीत ने कहा कि यह केवल हवा के प्रेशर और उसके अंतर के कारण ऐसा हो रहा है।

प्रयोग दो :

दूसरे प्रयोग में दो डिब्बों को एक के ऊपर एक रखकर छात्रों को पहले एक डिब्बा उठाने को कहा गया। उसके बाद डिब्बे को दूसरे डिब्बे पर रखकर दोनों डिब्बे उठाने को कहा गया। तो कई छात्रों ने बताया कि पहले वाला भारी था लेकिन दोनों उठाने पर हल्का लग रहा है।

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जिसके बाद डॉ. अमित बाजपेयी ने बताया कि दो उठाने पर हल्का नहीं है बल्कि थोड़ा सा भारी है। हमने इसको उठाने से पहले ही आपको बता दिया था कि पहला भारी है इसलिए आपको ऐसा लगा।

प्रयोग तीन:

लोटे के पानी को गिराने के बाद भी दिखाया लोटे में पानी

तीसरे प्रयोग में डॉ. रंजीत ने एक लोटे का पूरा पानी पहले गिरा दिया उसके बाद फिर छात्रों को दिखाया और दुबारा से उसमें से पानी गिरने लगा जिसे देख छात्र चकित रह गए। इसके बाद उन्होनें बताया कि लोटे के अंदर एक छोटी सी ग्लास छिपी हुई थी जो बटन से संचालित होती है बटन दबाने पर पानी नहीं गिरता है। जब पानी गिराना होता था तो बटन छोड़ देते थे इसलिए पानी गिरने लगता था।

सीखने की ललक हो तो कोचिंग की नहीं है जरूरत: डॉ. वत्सला मिश्रा

कार्यक्रम की शुरुआत में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि अगर सीखने की ललक हो तो कोचिंग की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि साइंस रटने का विषय नहीं है। बल्कि यह एक सीखने का विषय है जिसमें प्रैक्टिकल का विषय है।

उन्होंने आगे कहा कि किसी कोचिंग और कॉलेज से कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने अमर उजाला का आभार जताते हुए कहा कि प्रोफेसर एचसी वर्मा की किताब तो पढ़ा था आज मिलने का मौका भी मिल गया।

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