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किसी का गेस्ट हाउस तो कोई मार्केट का मालिक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 11 May 2016 02:41 AM IST
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दरभंगा कालोनी में सड़क पर खड़ी गाड़िया।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हजारों रुपये वेतन पाने वाले अफसरों ने न सिर्फ करोड़ों रुपये के बंगले बनवाए बल्कि गेस्ट हाउस और मार्केट भी बना डाली। इनका धंधा चौतरफा फैला है। सड़क या सीसी रोड का निर्माण हो या कोई दूसरा काम, ज्यादातर ठेके ऐसे अफसरों के करीबी रिश्तेदारों को ही मिलते हैं। सरकारी वाहन की हालत भले ही जर्जर हो लेकिन घर में लग्जरी वाहनों की कतार लगी है। काली कमाई को बैंक में रखा तो फंसने का डर है, सो कई जगह जमीन भी खरीद कर छोड़ दी है।
जॉर्जटाउन में रेलवे के बड़े डॉट पुल के पास एक गेस्ट हाउस है, जिसका विवादों से पुराना नाता है। दरअसल, जमीन राजकीय आस्थान की है और इसे फ्रीहोल्ड किए जाने को कोई प्रावधान नहीं है लेकिन राजकीय सेवा में तैनात एक पूर्व अफसर ने अपने प्रभाव से सरकारी दस्तावेजों में इसको नजूल के रूप में दर्ज करा दिया और उसे फ्रीहोल्ड कराकर वहां गेस्टहाउस बनवा डाला। इसी तरह राजकीय सेवा में तैनात एक महिला अफसर ने भी अपने प्रभाव से राजकीय आस्थान की भूमि को नजूल में दर्ज कराया और उसे फ्रीहोल्ड कराकर वहां बंगला बनवा दिया, जिसका अब व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। खास यह कि महिला अफसर दूसरे जिले में तैनात हैं लेकिन इलाहाबाद में सरकारी आवास पर भी उनका कब्जा है।
बहुत पहले यहां पुलिस में जिला स्तर के अफसर ने भी तेलियरगंज में सरकारी जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनवा दी। उस इमारत को तोड़ने के लिए सदर तहसील प्रशासन की ओर से आदेश भी जारी किया गया लेकिन अफसर के प्रभाव में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बहुमंजिला इमारत में मार्केट खुली है। ये तो चंद उदाहरण हैं। इलाहाबाद में ऐसे अफसरों की लाइन लगी है। न सिर्फ बंगला, गेस्टहाउस बल्कि ये अफसर कई लग्जरी गाड़ियों और जमीनों के मालिक हैं। इनके घरों के बाहर इनोवा, टोएटा, मर्सडीज, ऑडी, होंडा सिटी, स्कोडा, टाटा सफारी, स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर खड़ी दिख जाएंगी। एक-एक अफसर के पास पांच से छह गाड़ियां हैं। उन्हें घर में रखने की जगह नहीं बची तो सड़क को ही पार्किंग बना लिया। ऐसे अफसरों के घर में विलासता का हर सामान मौजूद है। खुद तो कमा ही रहे हैं, नियमों को ताक पर रखकर करीबी रिश्तेदारों को भी इन बहुधंधी अफसरों ने आसमान पर पहुंचा दिया। किसी का भतीजा तो किसी का भाई ठेकेदार है और इनके विभाग से संबंधित हर बड़ा ठेका घर वालों को ही मिलता है।
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केंद्र में संपत्ति घोषित करने का प्रावधान, राज्य में नहीं
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और अफसरों पर लगाम कसने के लिए एक अहम निर्णय लिया है कि सभी कर्मचारी और अफसर हर साल अपनी और अपने आश्रितों की संपत्ति के बारे में घोषणा करेंगे लेकिन राजकीय कर्मचारियों और अफसरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि केंद्र में इसकी घोषणा होने के बाद संपत्ति घोषित किए जाने के लिए निर्धारित अंतिम तिथि कई बार बढ़ाई जा चुकी है, क्योंकि बहुत से अफसर इससे कतरा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने फरमान जारी किया था कि सभी कर्मचारी और अफसर अप्रैल-2015 में एक निर्धारित प्रारूप पर अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे। कर्मचारी और अफसर वर्ष 2013 से 2015 तक अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देंगे। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से फरमान जारी किए के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अफसरों ने अब तक ब्यौरा नहीं दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन और राज्य सरकार की पेंशन सलाहकार समिति के सदस्य एएन यादव का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार प्रदेश सरकार को ज्ञापन देकर केंद्र की तर्ज पर राजकीय कर्मियों और अफसरों की संपत्ति घोषित किए जाने की मांग की है लेकिन प्रदेश सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं सकी। उनका कहना है कि कोई भी कर्मचारी या अफसर हो, नौकरी ज्वाइन करते वक्त उससे संपत्ति का ब्यौरा लिया जाए और हर साल यह प्रक्रिया जारी रखी जाए ताकि मालूम हो सके कि प्रत्येक वर्ष उसकी संपत्ति में कितना इजाफा हुआ। इससे भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम लगेगी।
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जॉर्जटाउन में रेलवे के बड़े डॉट पुल के पास एक गेस्ट हाउस है, जिसका विवादों से पुराना नाता है। दरअसल, जमीन राजकीय आस्थान की है और इसे फ्रीहोल्ड किए जाने को कोई प्रावधान नहीं है लेकिन राजकीय सेवा में तैनात एक पूर्व अफसर ने अपने प्रभाव से सरकारी दस्तावेजों में इसको नजूल के रूप में दर्ज करा दिया और उसे फ्रीहोल्ड कराकर वहां गेस्टहाउस बनवा डाला। इसी तरह राजकीय सेवा में तैनात एक महिला अफसर ने भी अपने प्रभाव से राजकीय आस्थान की भूमि को नजूल में दर्ज कराया और उसे फ्रीहोल्ड कराकर वहां बंगला बनवा दिया, जिसका अब व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। खास यह कि महिला अफसर दूसरे जिले में तैनात हैं लेकिन इलाहाबाद में सरकारी आवास पर भी उनका कब्जा है।
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बहुत पहले यहां पुलिस में जिला स्तर के अफसर ने भी तेलियरगंज में सरकारी जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनवा दी। उस इमारत को तोड़ने के लिए सदर तहसील प्रशासन की ओर से आदेश भी जारी किया गया लेकिन अफसर के प्रभाव में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बहुमंजिला इमारत में मार्केट खुली है। ये तो चंद उदाहरण हैं। इलाहाबाद में ऐसे अफसरों की लाइन लगी है। न सिर्फ बंगला, गेस्टहाउस बल्कि ये अफसर कई लग्जरी गाड़ियों और जमीनों के मालिक हैं। इनके घरों के बाहर इनोवा, टोएटा, मर्सडीज, ऑडी, होंडा सिटी, स्कोडा, टाटा सफारी, स्कॉर्पियो, फॉर्च्यूनर खड़ी दिख जाएंगी। एक-एक अफसर के पास पांच से छह गाड़ियां हैं। उन्हें घर में रखने की जगह नहीं बची तो सड़क को ही पार्किंग बना लिया। ऐसे अफसरों के घर में विलासता का हर सामान मौजूद है। खुद तो कमा ही रहे हैं, नियमों को ताक पर रखकर करीबी रिश्तेदारों को भी इन बहुधंधी अफसरों ने आसमान पर पहुंचा दिया। किसी का भतीजा तो किसी का भाई ठेकेदार है और इनके विभाग से संबंधित हर बड़ा ठेका घर वालों को ही मिलता है।
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केंद्र में संपत्ति घोषित करने का प्रावधान, राज्य में नहीं
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और अफसरों पर लगाम कसने के लिए एक अहम निर्णय लिया है कि सभी कर्मचारी और अफसर हर साल अपनी और अपने आश्रितों की संपत्ति के बारे में घोषणा करेंगे लेकिन राजकीय कर्मचारियों और अफसरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि केंद्र में इसकी घोषणा होने के बाद संपत्ति घोषित किए जाने के लिए निर्धारित अंतिम तिथि कई बार बढ़ाई जा चुकी है, क्योंकि बहुत से अफसर इससे कतरा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने फरमान जारी किया था कि सभी कर्मचारी और अफसर अप्रैल-2015 में एक निर्धारित प्रारूप पर अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे। कर्मचारी और अफसर वर्ष 2013 से 2015 तक अपनी संपत्ति का पूरा ब्यौरा देंगे। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से फरमान जारी किए के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अफसरों ने अब तक ब्यौरा नहीं दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन और राज्य सरकार की पेंशन सलाहकार समिति के सदस्य एएन यादव का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार प्रदेश सरकार को ज्ञापन देकर केंद्र की तर्ज पर राजकीय कर्मियों और अफसरों की संपत्ति घोषित किए जाने की मांग की है लेकिन प्रदेश सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं सकी। उनका कहना है कि कोई भी कर्मचारी या अफसर हो, नौकरी ज्वाइन करते वक्त उससे संपत्ति का ब्यौरा लिया जाए और हर साल यह प्रक्रिया जारी रखी जाए ताकि मालूम हो सके कि प्रत्येक वर्ष उसकी संपत्ति में कितना इजाफा हुआ। इससे भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम लगेगी।