स्मार्ट सिटी में बेहतर होगा जल प्रबंधन
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सिविल लाइंस स्थित एक होटल में हुई बैठक में यूएस एम्बेसी के प्रोग्राम डायरेक्टर मार्क अजुहा एवं विलियम टेलर ने कहा कि यहां गंदे पानी का बड़ा कारण सीवरेज सिस्टम है। सीवरेज योजना पर काम योजनाबद्ध तरीके से न होने के कारण पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी वजह से घरों में गंदा पानी जा रहा है। इसे तकनीक के जरिए ठीक किया जाएगा। कहा कि पानी की बर्बादी रुके और उसकी मॉनीटरिंग हो, इसके लिए घरों में वाटर मीटर लगाना जरूरी है। साथ ही इसका रिपोर्ट कार्ड भी होना चाहिए, क्योंकि अभी तक सभी काम सिर्फ अनुमान के आधार पर हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी तरह की सुविधा देने के लिए धनराशि आवश्यक है। इसके लिए यूजर चार्ज सिस्टम सख्त होना चाहिए।
नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय ने विशेषज्ञों को सुविधाओं के लिए सिस्टम और यह कैसा हो, इसके बारे में अवगत कराया। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने सीवरेज एवं वेस्ट वॉटर को रिसाइकिल कर इस्तेमाल के बारे में पूछा। इस पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम अजेय रस्तोगी ने बताया कि नैनी में वेस्ट वॉटर को साफ कर खेती में प्रयोग किया जा रहा है। भविष्य में पावर प्लांट को 80 एमएलडी आपूर्ति पर भी कार्रवाई चल रही है। बैठक में निगम, एडीए, पीडब्ल्यूडी, जलकल, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रोडवेज, बिजली, स्वास्थ्य आदि विभागों के अफसर मौजूद थे।
केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी चयन के दूसरे चरण की प्रतियोगिता पांच अप्रैल से शुरू हो गई। यह प्रतियोगिता छह जून तक चलेगी। इस बार स्मार्ट सिटी में चयन के लिए नगर निगम ने नए सिरे से प्रपोजल तैयार करने की रणनीति बनाई है। इस संबंध में मंगलवार को मंडलायुक्त राजन शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा की गई।
एरिया बेस्ड डेवलमेंट एवं पैन सिटी सॉल्यूशन के तहत रिट्रोफिटिंग एरिया में इस बार सिविल लाइंस को रखा गया है। पिछली बार निगम ने कटरा क्षेत्र को इसमें शामिल किया था। बताया गया कि कटरा में राजस्व वसूली की संभावना कम है। साथ ही कवरेजन्स स्कोप भी कम है, जबकि सिविल लाइंस में ऐसी समस्या नहीं आएगी। पैन सिटी में ऐसी नागरिक सुविधा का चयन किया जाना है, जिसे पूरे शहर में सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। इसके लिए स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट एवं ई-गर्वनेंस सुविधा को फिर से चयनित किया गया।
इसके साथ प्लानिंग कम्पोनेंट, प्रपोज्ड प्रोजेक्ट प्लान के हर कार्य में आशंकित समस्याओं का स्वरूप एवं उनका निस्तारण सुनिश्चित करना, एसपीवी का गठन एवं पावर डेलीगेशन, राजस्व की संभावना, लैंड मोनेटाइजेशन, टैक्स वृद्धि एवं राजस्व इस्टीमेशन तथा पे-बैक प्लान, प्रोजेक्ट के लिए जमीन एवं धन की आवश्यकता, विभिन्न विभागों के मध्य मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग पर योजना तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।